चीन का नजरिया: फायदा हो तो खतरा मंजूर, बलूचिस्तान की खदानों पर नजर
खदानों की लीज 15 साल और बढ़ाने का करार पाकिस्तान के सैनडाक मेटल्स लिमिटेड (एसएमएल) और चीन की कंपनी मेट्रॉलॉजिकल कंस्ट्रक्शन कंपनी ऑफ चाइना (एमसीसी) के बीच हुआ है। पहले से जारी समझौते की अवधि 31 अक्तूबर 2022 को पूरी होने वाली थी। लेकिन अब इसकी अवधि 31 अक्तूबर 2037 तक बढ़ा दी गई है...
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पाकिस्तान में सुरक्षा संबंधी बढ़ते खतरों के बावजूद चीन ने बलूचिस्तान प्रांत में सोना और तांबे की खदानों का लीज और 15 साल के लिए बढ़वा लिया है। बलूचिस्तान प्रांत में हाल में कई घातक आतंकवादी हमले हुए हैं। वहां चीन विरोधी भावनाएं भी उभार पर हैं। बलूचिस्तान को आजाद कराने कि लिए आंदोलन चला रहे संगठनों का आरोप है कि चीन की परियोजनाओं से स्थानीय आबादी को कोई लाभ नहीं हुआ है। उलटे इनकी वजह से इस प्रांत का पर्यावरण खराब हुआ है।
खदानों की लीज 15 साल और बढ़ाने का करार पाकिस्तान के सैनडाक मेटल्स लिमिटेड (एसएमएल) और चीन की कंपनी मेट्रॉलॉजिकल कंस्ट्रक्शन कंपनी ऑफ चाइना (एमसीसी) के बीच हुआ है। पहले से जारी समझौते की अवधि 31 अक्तूबर 2022 को पूरी होने वाली थी। लेकिन अब इसकी अवधि 31 अक्तूबर 2037 तक बढ़ा दी गई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि ताजा करार इस बात की मिसाल है कि पाकिस्तान में सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति को लेकर चीन भले ही नाराजगी जता रहा हो, लेकिन उसने पाकिस्तान में अपनी आर्थिक परियोजनाओं को जारी रखने का फैसला किया है।
पाकिस्तान में तैनात चीनी कर्मियों की संख्या बढ़ी
हाल में चीन की परियोजनाओं को लेकर स्थानीय आबादी में खास नाराजगी देखी गई है। पिछले साल डासू पनबिजली संयंत्र पर घातक हमला हुआ था, जिसमें नौ चीनी इंजीनियर मारे गए थे। ये हमला उत्तर-पश्चिमी कोशिस्तान क्षेत्र में हुआ था। लेकिन जानकारों का कहना है कि सुरक्षा संबंधी ऐसे खतरों के बावजूद हाल में पाकिस्तान में तैनात चीनी कर्मियों की संख्या बढ़ी है। इन कर्मियों को चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) से जुड़ी परियोजनाओं के साथ-साथ अन्य परियोजना स्थलों पर भी तैनात किया गया है।
चीन के योजना मंत्रालय ने 2017 में बताया था कि उस समय पाकिस्तान में 60 हजार चीनी कार्यरत थे। जबकि 2013 में ये संख्या सिर्फ 20 हजार थी। वेबसाइट एशिया टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि अब पाकिस्तान में काम कर रहे चीनियों की संख्या लगभग चार लाख है। हालांकि इस बारे में कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
70 से ज्यादा चीनी कंपनियां पाक में
अमेरिकी पत्रिका फॉर्च्यून ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में बताया है कि दुनिया की सर्वोच्च 500 कंपनियों की सूची में जो 143 चीनी कंपनियां शामिल हैं, उनमें से आधी से ज्यादा पाकिस्तान में कारोबार कर रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि चीन की नजर बलूचिस्तान प्रांत के समृद्ध खनिज भंडारों पर है। इसीलिए वहां चीनी कंपनियों का दखल बढ़ा है। यही बलूचिस्तान में फैली चीन विरोधी भावना का मुख्य कारण है।
पाकिस्तान की जानी-मानी राजनीति शास्त्री आयेशा सिद्दिकी ने एशिया टाइम्स से कहा कि सुरक्षा के लिए बढ़ते खतरों के बीच चीन के पाकिस्तान में बने रहने के दो प्रमुख कारण हैं। उन्होंने कहा- ‘पहला कारण तो यह है कि बलूचिस्तान में खनिज के समृद्ध भंडार हैं, जिनकी चीन को जरूरत है। इनमें सोना, तांबा, लोहा, चांदी, शीशा, जिंक, बेराइट और क्रोमाइट के खदान शामिल हैं। दूसरी वजह यह है कि चीन का बलूचिस्तान में भू-राजनीतिक हित है। वहां वह पहले ही ग्वादार बंदरगाह बना चुका है।’