फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   despite attacks Ceasefire still on between TTP and Pakistan

TTP Ceasefire: बढ़ते हमलों के बाद भी टीटीपी के साथ संघर्ष विराम, पाकिस्तान की क्या है मजबूरी?

Mon, 05 Sep 2022 03:24 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 05 Sep 2022 03:24 PM IST
सार

पाकिस्तान के वार्ताकार कबाइली इलाकों में शांति की खातिर टीटीपी से कोई विरोध मोल नहीं लेना चाहते हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी नहीं चाहती हैं कि वे टीटीपी के साथ किसी तरह का टकराव मोल लें। कबाइली नेताओं व पाक सुरक्षा एजेंसियों के बीच जुलाई अंत में वार्ता हुई थी। इसके बाद से बातचीत अटकी हुई है। 

विज्ञापन
despite attacks Ceasefire still on between TTP and Pakistan
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संघर्ष विराम के बाद भी अफगानिस्तान से सटे पाकिस्तान के कबाइली प्रांत में प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के हमले जारी हैं। पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां आदिवासी जिलों में संघर्ष विराम को मजबूर हैं। इन इलाकों में दो दशकों से चल रहे संघर्ष की समाप्ति के लिए वार्ता अटकी हुई है।

विज्ञापन


पाकिस्तान के अखबार 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार आतंकी हमलों की छुटपुट घटनाओं के बाद भी पाक सुरक्षा एजेंसियों ने संघर्ष विराम बनाए रखा है। पाकिस्तान के वार्ताकार कबाइली इलाकों में शांति की खातिर टीटीपी से कोई विरोध मोल नहीं लेना चाहते हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी नहीं चाहती हैं कि वे टीटीपी के साथ किसी तरह का टकराव मोल लें। कबाइली नेताओं व पाक सुरक्षा एजेंसियों के बीच जुलाई अंत में वार्ता हुई थी। इसके बाद से बातचीत अटकी हुई है। 
विज्ञापन


कोई बातचीत नहीं हो रही, स्वात घाटी में लौटे आतंकी
शांति प्रक्रिया से जुड़े पाक अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच कोई गतिविधि नहीं है। सब कुछ अटका हुआ है। इसलिए संघर्ष विराम जारी रखने पर सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में टीटीपी के आतंकी स्वात, दीर और खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के आदिवासी जिलों के कुछ हिस्सों में लौट आए हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


पाक सरकार ने नहीं की कोई टिप्पणी
पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की गई, लेकिन खैबर में लौटे आतंकियों ने दावा किया कि उन्होंने एक समझौते के बाद वापसी की है। हालांकि, काबुल में वार्ता से परिचित सूत्रों ने कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। 

समझौता अनिश्चितकालीन युद्धविराम और जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत जारी रखने का था। इसमें आतंकियों की वापसी और समाज से उनका एकीकरण शामिल है। पाक सरकार की मांग थी कि टीटीपी को भंग किया जाए और उससे जुड़े लोग निहत्थे लौट जाएं, लेकिन आतंकी इसके लिए तैयार नहीं हैं। मई में युद्धविराम समझौते के बाद से टीटीपी लगातार जोर देकर कह रहा है कि जब भी और जहां भी हमला किया गया, वह आत्मरक्षा में किया गया था। इन हमलों में डेरा इस्माइल खान और पेशावर में पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी। 

टीटीपी नहीं तो कौन कर रहा हमले? 
सवाल यह है कि यदि टीटीपी नहीं तो, पाकिस्तान के इस अशांत क्षेत्र हमले कौन कर रहा है? जबरन वसूली की बढ़ती संख्या के पीछे कौन सा समूह है? हालिया हमलों में लिप्त होने से टीटीपी ने इनकार किया है। तालिबान सरकार के कार्यवाहक आंतरिक मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी की निगरानी में काबुल में हुई वार्ता में टीटीपी नेतृत्व और वरिष्ठ पाकिस्तानी वार्ताकारों के बीच क्या कहा गया था या क्या सहमति हुई, इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। 


स्वात घाटी में आतंकवादियों की वापसी की खबरें सामने आने के तुरंत बाद, इस क्षेत्र में एक दशक से अधिक समय तक शांति और सामान्य स्थिति के बाद हिंसा के एक नए चरण की आशंका पैदा हो गई है। 
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed