ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन का जिम्मेदार: डेल्टा वैरिएंट ने बदल दी है यूरोप में सूरत, जुलाई में तेजी से फैला है संक्रमण
प्रो. आल्टमैन ने कहा- ‘गर्मियों में डेल्टा वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। खासकर उन युवाओं में उसका संक्रमण हो रहा है, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। जिन लोगों ने टीके का एक डोज लिया है, दुर्भाग्यवश वे इससे संक्रमित हो रहे हैं। अभी मौजूद किसी वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों को जरूर अधिक सुरक्षा मिली हुई है। ये सुरक्षा उन्हें हर वैरिएंट से मिलती है।’
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जुलाई महीने में कोरोना संक्रमण के मामले तमाम यूरोप में बढ़े हैं। ये बात यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) के एक ताजा आकलन में कही गई है। यह आकलन यूरोपियन यूनियन (ईयू) और यूरोपियन इकोनॉमिक एरिया (ईईए) के तहत आने वाले सभी देशों में कोरोना संक्रमण के दिखे ट्रेंड पर आधारित है। उसके मुताबिक 11 जुलाई को खत्म हुए सप्ताह में इन पूरे इलाके में हर एक लाख की आबादी पर संक्रमण के 89.6 मामले मौजूद थे। एक हफ्ते पहले ये संख्या सिर्फ 51.6 थी। 11 जुलाई के बाद संक्रमण के मामले बढ़ने की दर और तेज हो गई है।
ईसीडीसी की भविष्यवाणी है कि जुलाई के अंत तक यूरोप में हर एक लाख आबादी पर संक्रमित लोगों की संख्या 622.9 होगी। मृत्यु दर हर एक लाख पर 10.5 हो जाएगी। ईसीडीसी से जुड़े विशेषज्ञ प्रोफेसर डैनियल एम आल्टमैन ने टीवी चैनल यूरो न्यूज से कहा- ‘इस बात में कोई शक नहीं है कि कोरोना वायरस का डेल्टा वैरिएंट सारा खेल बदल देता है। उसके कारण ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन के मामले बढ़ जाते हैं। साथ ही युवा लोग संक्रमण का अधिक शिकार होने लगते हैं। इसकी वजह से कोरोना संक्रमण के अधिक लक्षण सामने आने लगे हैं, जैसाकि पहले नहीं देखा गया था।’ प्रो. आल्टमैन लंदन के इम्पेरियल कॉलेज में इम्यूनोलॉजी (रोग प्रतिरक्षण विज्ञान) के प्रोफेसर भी हैं।
ब्रेकथ्रू इन्फेक्शन उन मामलों को कहा जाता है, जिनमें कोरोना वैक्सीन ले चुके लोग संक्रमित हो जाते हैं। प्रो. आल्टमैन ने कहा- ‘सबसे चिंता की बात नए वैरिएंट्स का व्यवहार है। अभी सामने डेल्टा वैरिएंट है, लेकिन भविष्य में और भी ऐसे वैरिएंट सामने आएंगे।’ विशेषज्ञों के मुताबिक डेल्टा वैरिएंट इसके पहले सामने आए वैरिएंट्स की तुलना में अधिक संक्रामक है। ईसीडीसी का अनुमान है कि अगस्त के अंत तक कोरोना संक्रमण के जितने मामले ईयू में होंगे, उनमें 90 फीसदी का कारण डेल्टा वैरिएंट होगा।
प्रो. आल्टमैन ने कहा- ‘गर्मियों में डेल्टा वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। खासकर उन युवाओं में उसका संक्रमण हो रहा है, जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है। जिन लोगों ने टीके का एक डोज लिया है, दुर्भाग्यवश वे इससे संक्रमित हो रहे हैं। अभी मौजूद किसी वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों को जरूर अधिक सुरक्षा मिली हुई है। ये सुरक्षा उन्हें हर वैरिएंट से मिलती है।’
गौरतलब है कि ईयू और ईईए क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसी आबादी है, जिसे वैक्सीन नहीं लगी है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी लोगों का पूरा टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोरोना से बचाव संबंधी प्रतिबंधों का सबको पालन करना चाहिए। डेल्टा वैरिएंट के प्रसार को रोकने का यही एकमात्र तरीका है।
यूरोप में सबसे ज्यादा चिंता ब्रिटेन के हालात से पैदा हुई है। ब्रिटेन यूरोप के उन देशों में है, जहां सबसे ज्यादा लोगों का टीकाकरण हुआ है। लेकिन इस महीने वहां संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। इस बीच राहत की बात सिर्फ यह है कि इस बार पहले की तरह लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आ रही है। मौतों का अनुपात भी कम है। ब्रिटेन के इस हाल के बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए वैक्सीन ही एकमात्र उपाय है। वह संक्रमित होने, संक्रमण फैलाने, संक्रमण के गंभीर लक्षणों आदि से बचाव करता है।