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चिंता: सौर तूफान के नए चक्र का खतरा, होगा खरबों का नुकसान

Mon, 31 May 2021 07:19 AM IST
Jeet Kumar न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन।
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन। Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 31 May 2021 07:19 AM IST
सार

  • 11 साल में उठता है तूफानों का चक्र, बिजली-पानी संकट की भी आशंका 
  • किसी भी दिन शुरू हो सकती है हर 11वें साल होने वाली प्रक्रिया
  • इस बार 2025 में होगा चरम पर, बन सकते हैं 115 सनस्पॉट

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danger of new cycle of solar storm and possibility of loss of trillions
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : NASA

विस्तार

सूर्य पर होने वाली रहस्यमयी गतिविधियां हमेशा चिंता का सबब बनी रही हैं। खगोल भौतिकविद कह रहे हैं कि हर 11 साल में उठने वाले सौर तूफानों का चक्र किसी भी दिन शुरू हो सकता है, जिससे निकलने वाली ऊर्जा हमारे संचार तंत्र से लेकर अंतरिक्ष यात्रियों और स्पेस्क्राफ्टों को खतरे में डाल सकती है। कुछ खगोलविदों के मुताबिक, इस बार सूर्य विध्वंसक तूफानों और सनस्पॉट का रिकॉर्ड बना सकता है। 

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वहीं, कुछ जानकार इनमें थोड़ी कमी की उम्मीद भी जता रहे हैं। पूर्व में हुआ अध्ययन बताता है कि सौर तूफान के सीधे टकराने से धरती पर दो खरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। इससे पावर ग्रिड और सैटेलाइट बंद हो सकते हैं। इंटरनेट से लेकर एटीएम मशीनें थम सकती हैं। घरों में बिजली-पानी का संकट पनप सकता है।
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आठ मिनट में धरती पर पहुंचते हैं न्यूट्रिनो 
सूर्य नियमित रूप से यह काम करते रहा है। कुछ समय पहले इटली में हुए एक प्रयोग में पता लगा था कि बीते एक लाख वर्षों में सूर्य के ऊर्जा उत्पादन में तब्दीली नहीं आई है। शोधकर्ताओं ने जाना कि सूर्य पर परमाण्विक क्रियाओं से पैदा होने वाले उप परमाण्विक कण न्यूट्रिनो आठ मिनट में धरती तक पहुंच जाते हैं। 
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पिछली बार दिखे थे 101 सनस्पॉट
खगोलविदों का कहना है, सूर्य पर हर 11 साल में आने वाले इस रहस्यमयी सनस्पॉट (सूर्य पर धब्बे) चक्र के चरम बिंदु पर विध्वंसक सौर तूफान आने की ज्यादा संभावना रहती है। इस बार यह चरम स्थिति 2025 में बन सकती है। 

पिछले साल नासा के वैज्ञानिकों की एक समिति और नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने इस दौरान 115 सनस्पॉट की संभावना जताई है। हालांकि यह संख्या ऐतिहासिक औसत (160-240) से कम थी। पिछले चक्र के दौरान चरम 2014 में आया था, तब सूर्य पर 101 सनस्पॉट दिखे थे।

कोरोनल मास इजेक्शन है विध्वंस की वजह 
सूर्य पर विस्फोटक सौर लपटें लाखों हाइड्रोजन बमों से कहीं ज्यादा शक्तिशाली हो सकती हैं। कभी-कभी ये लपटें सूर्य की बाहरी सतह के पूरे हिस्सों को अंतरिक्ष में धकेल देती हैं, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है। 

अभी तक का सबसे बड़ा सौर तूफान एक सितंबर 1959 को आया था। तब धरती पर यूरोप और उत्तरी अमेरिका में टेलीग्राफ सिस्टम में आग लग गई थी। 2012 में एक कोरोनल मास इजेक्शन से धरती बामुश्किल बची थी। 


समझें धधकते सूर्य में होने वाली क्रियाएं 
मध्यम आकार का तारा सूर्य दस लाख मील व्यास क्षेत्र में धधकती आयोनित गैस का गोला है। इसका विशाल आंतरिक हिस्सा बाहर के मुकाबले ज्यादा तेजी से घूमता है। इसके केंद्र में हर सेकंड थर्मोन्यूक्लियर क्रियाएं 60 करोड़ टन हाइड्रोजन को करीब 59.6 करोड़ टन हीलियम में जला देती हैं। शेष चार करोड़ टन गैस ऊर्जा में तब्दील हो जाती है, जो धरती समेत सौर मंडल तक पहुंचती है ।

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