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US-India Ties: 'भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान..', टैरिफ को लेकर अमेरिकी प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने किया आगाह
Thu, 11 Dec 2025 07:48 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 11 Dec 2025 07:48 AM IST
सार
US-India Ties: अमेरिकी प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने कहा कि व्यापारिक बाधाएं और आव्रजन नीतियां भारत–अमेरिका आर्थिक संबंध और लोगों के बीच संपर्क को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने टैरिफ के कारण कारोबार और उपभोक्ताओं पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों और भारतीय उत्पादों से जुड़े उदाहरणों का जिक्र किया। जयपाल ने साथ ही हाल की अमेरिकी आव्रजन नीतियों की आलोचना भी की।
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प्रमिला जयपाल
- फोटो : एएनआई/हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी/यूट्यूब
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विस्तार
अमेरिकी प्रतिनिधि प्रमिला जयपाल ने व्यापारिक बाधाओं और आव्रजन नीतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इससे भारत–अमेरिका आर्थिक संबंध और लोगों के बीच संपर्क प्रभावित हो रहे हैं। वह विदेश मामलों की संसदीय समिति और उसकी दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति की सुनवाई में बोल रही थीं, जिसका विषय 'अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी: एक मुक्त और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना' था।
जयपाल ने जारी आयात शुल्क (टैरिफ) से दोनों देशों में पैदा हुई मुश्किलों की ओर फोकस किया और कहा कि इनका असर कारोबार और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, हम अमेरिका और भारत दोनों जगह टैरिफ की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ये टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अमेरिकी कारोबार और उपभोक्ताओं को भी चोट पहुंचा रहे हैं।
ये भी पढ़ें: 'भारत-अमेरिका रिश्ता 21वीं सदी की निर्णायक साझेदारी', टैरिफ विवाद के बीच बोले अमेरिकी सांसद बिल हुइजेंगा
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इसके लिए उदाहरण देते हुए अपने राज्य की एक 120 साल पुरानी कंपनी का जिक्र किया। उन्होंने कहा, पिछले हफ्ते ही मुझे वॉशिंगटन राज्य की एक पांचवीं पीढ़ी से चल रही कंपनी ने बताया कि वह भारत से कृषि उत्पाद मंगाती है, जिन्हें अमेरिका में बड़े पैमाने पर हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ये टैरिफ उनके 120 साल पुराने कारोबार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं और वे बढ़ी हुई लागत का सामना करने के लिए या तो उत्पादन कम करने या फिर विदेश स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं।
व्यापार से जुड़ी इन चिंताओं के साथ ही जयपाल ने हाल की आव्रजन नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने कानूनी तरीकों से होने वाले आव्रजन को लगभग बंद करके लोगों के बीच संपर्क को नुकसान पहुंचाया है। यह उस भेदभावपूर्ण कोटा प्रणाली की याद दिलाता है, जिसने पहले भी भारतीयों के लिए अमेरिका आना बेहद कठिन बना दिया था।
ये भी पढ़ें: शर्मनाक: दुनिया में एक अरब महिलाएं बचपन में यौन हिंसा की शिकार, भारत में हर चौथी महिला ने झेली यौन प्रताड़ना
जयपाल ने यह चिंता उस समय जताई है, जब मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी बाजार में 'सस्ते चावल की डंपिंग' कर रहा है, जिससे अमेरिकी किसानों को नुकसान हो रहा है।
यह बात उन्होंने व्हाइट हाउस की एक बैठक में कही, जहां उन्होंने अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की सहायता योजना की घोषणा भी की। बैठक में कई अमेरिकी किसानों ने शिकायत की कि भारत, वियतनाम और थाईलैंड से आने वाला सस्ता चावल घरेलू कीमतें गिरा रहा है। ट्रंप ने पूछा कि भारत पर अतिरिक्त टैरिफ क्यों नहीं लगाए गए और कहा कि वह इस मुद्दे को देखेंगे। इससे संकेत मिला कि नए टैरिफ जल्द लगाए जा सकते हैं।
ट्रंप ने यह बयान ऐसे समय में दिया, जब 10–11 दिसंबर को एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत में मौजूद था। दोनों देशों के बीच लंबे समय से बाजार तक पहुंच और शुल्क को लेकर वार्ता मतभेदों में उलझी हुई है। अगस्त 2025 में अमेरिका ने अधिकांश भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया था, जब रूसी तेल खरीदने को लेकर तनाव बढ़ा था।
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जयपाल ने जारी आयात शुल्क (टैरिफ) से दोनों देशों में पैदा हुई मुश्किलों की ओर फोकस किया और कहा कि इनका असर कारोबार और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, हम अमेरिका और भारत दोनों जगह टैरिफ की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ये टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अमेरिकी कारोबार और उपभोक्ताओं को भी चोट पहुंचा रहे हैं।
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इसके लिए उदाहरण देते हुए अपने राज्य की एक 120 साल पुरानी कंपनी का जिक्र किया। उन्होंने कहा, पिछले हफ्ते ही मुझे वॉशिंगटन राज्य की एक पांचवीं पीढ़ी से चल रही कंपनी ने बताया कि वह भारत से कृषि उत्पाद मंगाती है, जिन्हें अमेरिका में बड़े पैमाने पर हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि ये टैरिफ उनके 120 साल पुराने कारोबार के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं और वे बढ़ी हुई लागत का सामना करने के लिए या तो उत्पादन कम करने या फिर विदेश स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं।
व्यापार से जुड़ी इन चिंताओं के साथ ही जयपाल ने हाल की आव्रजन नीतियों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने कानूनी तरीकों से होने वाले आव्रजन को लगभग बंद करके लोगों के बीच संपर्क को नुकसान पहुंचाया है। यह उस भेदभावपूर्ण कोटा प्रणाली की याद दिलाता है, जिसने पहले भी भारतीयों के लिए अमेरिका आना बेहद कठिन बना दिया था।
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जयपाल ने यह चिंता उस समय जताई है, जब मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी बाजार में 'सस्ते चावल की डंपिंग' कर रहा है, जिससे अमेरिकी किसानों को नुकसान हो रहा है।
यह बात उन्होंने व्हाइट हाउस की एक बैठक में कही, जहां उन्होंने अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की सहायता योजना की घोषणा भी की। बैठक में कई अमेरिकी किसानों ने शिकायत की कि भारत, वियतनाम और थाईलैंड से आने वाला सस्ता चावल घरेलू कीमतें गिरा रहा है। ट्रंप ने पूछा कि भारत पर अतिरिक्त टैरिफ क्यों नहीं लगाए गए और कहा कि वह इस मुद्दे को देखेंगे। इससे संकेत मिला कि नए टैरिफ जल्द लगाए जा सकते हैं।
ट्रंप ने यह बयान ऐसे समय में दिया, जब 10–11 दिसंबर को एक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत में मौजूद था। दोनों देशों के बीच लंबे समय से बाजार तक पहुंच और शुल्क को लेकर वार्ता मतभेदों में उलझी हुई है। अगस्त 2025 में अमेरिका ने अधिकांश भारतीय सामानों पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया था, जब रूसी तेल खरीदने को लेकर तनाव बढ़ा था।
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