Aeroflot Cyber Attack: कैसे रूसी एयरलाइन एयरोफ्लोट पर हुआ साइबर हमला, जिससे रद्द करनी पड़ीं 100+ उड़ानें?
रूस की राष्ट्रीय विमानन कंपनी एयरोफ्लोट पर सोमवार को बड़ा साइबर हमला हुआ है। जिसके कारण विमानन कंपनी को 100 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और कई अन्य में देरी हुई। इस हमले की जिम्मेदारी यूक्रेन और बेलारूस के हैकरों ने ली है।
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रूस की सरकारी स्वामित्व वाली प्रमुख एयरलाइन एयरोफ्लोट पर साइबर हमला हुआ है। साइबर हमले के चलते सोमवार को कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम ठप पड़ गए। इस साइबर हमले के चलते एयरलाइन को 100 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और कुछ में देरी हुई है।
यूक्रेनी हैकरों ने हमले की जिम्मेदारी ली
इस साइबर हमले की जिम्मेदारी यूक्रेनी हैकर समूह 'साइलेंट क्रो' और बेलारूसी हैकर एक्टिविस्ट समूह 'बेलारूस साइबर पार्टिसंस' ने ली है। यह बेलारूसी समूह राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के शासन का विरोध करता है। हमले के बाद एयरलाइन की सेवाएं कई घंटों तक प्रभावित रहीं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
इस व्यवधान के कारण एयरोफ्लोट की सहायक कंपनियां रोसिया और पोबेडा की उड़ानें भी बाधित हुईं। अधिकांश उड़ानें घरेलू थीं, लेकिन व्यवधान के कारण बेलारूस, आर्मेनिया और उज्बेकिस्तान जाने वाली कुछ अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भी रद्द कर दी गईं। एअरोफ्लोट ने सोमवार सुबह एक बयान जारी कर कहा कि उसकी आईटी प्रणाली तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रही है। जिससे सेवाओं में बाधा आ सकती है। बाद में रूसी प्रशासन ने पुष्टि करते हुए कहा, यह बाधा साइबर हमले के कारण हुई और इस संबंध में आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।
यूक्रेन युद्ध के बाद कई साइबर हमलों का शिकार हो चुका है रूस
यह फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद से रूस पर हुए सबसे विनाशकारी साइबर हमलों में से एक है। पिछले हमलों में रूसी सरकारी वेबसाइटों और अन्य प्रमुख रूसी कंपनियों, विशेष रूप से सरकारी स्वामित्व वाली रूसी रेलवे को निशाना बनाया गया था। लेकिन कुछ ही घंटों में सामान्य सेवाएं फिर से शुरू हो गईं। वहीं रूसी मीडिया इसे एयरोफ्लोट के इतिहास में सबसे बड़ा साइबर हमला बता रही है।
सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में यात्रियों की भीड़ मॉस्को के शेरेमेत्येवो हवाई अड्डे पर दिखाई दे रही है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने हमले को चिंताजनक बताया। यूक्रेनी और बेलारूस के हैकरों ने साइबर हमले की जिम्मेदारी ली है। गौरतलब है कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण रूस के हवाई अड्डों को पहले ही देरी का सामना करना पड़ा है। साइबर हमलों ने सुरक्षा चिंताओं को भी दोगुना कर दिया है।
ऐसे दिया साइबर हमले को अंजाम
हैकर समूह 'साइलेंट क्रो' ने दावा किया कि उसने एक साल तक एअरोफ्लोट के नेटवर्क में पहुंच बनाए रखी। इस दौरान कस्टमर डेटा, कॉल रिकॉर्डिंग्स, कर्मचारियों की निगरानी से जुड़ी जानकारी और अन्य आंतरिक संचार की कॉपी तैयार की। हैकर समूह ने दावा किया कि इनमें से अधिकांश डेटा अब या तो अनुपलब्ध है या नष्ट कर दिया गया है, और इसे बहाल करने में करोड़ों डॉलर का खर्च आ सकता है। यह नुकसान रणनीतिक है।
हैकर समूह ने एअरोफ्लोट की आंतरिक आईटी प्रणाली के स्क्रीनशॉट भी साझा किए हैं और संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में वे डाटा सार्वजनिक कर सकते हैं। टेलीग्राम पर पोस्ट में कहा गया, एअरोफ्लोट से उड़ान भरने वाले सभी रूसी नागरिकों का व्यक्तिगत डाटा अब एक नई यात्रा पर जा चुका है....बिना सामान के और एक ही गंतव्य की ओर।
बेलारूस हैकर समूह साइबर-पार्टिसंस ने बताया कि उन्हें "तबाही मचाने वाला हमला" करने की उम्मीद की थी। इस समूह ने पहले भी कई साइबर हमलों की जिम्मेदारी ली है और अप्रैल 2024 में कहा था कि वे बेलारूस की मुख्य केजीबी सुरक्षा एजेंसी के नेटवर्क में घुसपैठ करने में कामयाब रहे हैं।
हैकर समूह की समूह की समन्वयक यूलियाना शमेटावेट्स ने कहा कि यह बहुत बड़े पैमाने का किया गया हमला है और परिणामों के लिहाज से सबसे तकलीफदेह हमलों में से एक है। उन्होंने बताया कि समूह ने कई महीनों तक इस हमले की तैयारी की थी। वे एअरोफ्लोट के नेटवर्क में मौजूद कई कमजोरियों का फायदा उठाकर घुसपैठ करने में कामयाब रहे।