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कोरोना: पाकिस्तान में उड़ी सरकारी निर्देशों की धज्जियां, मस्जिदों में प्रार्थना के लिए जुटी सैकड़ों की भीड़
Sat, 18 Apr 2020 01:13 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sat, 18 Apr 2020 01:13 AM IST
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लाल मस्जिद, पाकिस्तान(फाइल फोटो)
- फोटो : social media
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पाकिस्तान में शुक्रवार को कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर जारी सरकारी दिशा-निर्देशों की अवहेलना करते हुए कई मस्जिदों में प्रार्थना के लिए सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई। जानकारी के अनुसार धार्मिक नेताओं और पाकिस्तानी सरकार के बीच पूरी तरह से आम सहमति नहीं बन पाने के कारण ही लोगों ने सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाई।
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बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कट्टर धार्मिक नेता अब्दुल अजीज के नेतृत्व में सैकड़ों लोग लाल मस्जिद में इकट्ठा हो गए और सामाजिक दूरी की अनदेखी कर मुख्य हॉल में कंधे से कंधा मिलाकर नमाज की अदायगी की।
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अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार अन्य शहरों के प्रमुख मस्जिदों में भी सामूहिक प्रार्थनाएं आयोजित की गई। बता दें कि इस हफ्ते की शुरुआत में, पाकिस्तान की सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन में ढील देते हुए एक दर्जन से अधिक उद्योगों और व्यवसायों को खोलने की अनुमति दे दी थी। वहीं मस्जिदों को सलाह दी गई थी कि वे प्रार्थनाओं को अधिकतम पांच लोगों तक सीमित रखें जिनमें से सभी मस्जिद परिसर के अंदर रहने वाले स्टाफ हों लेकिन सैकड़ों लोग दिशा- निर्देशों को ताक पर रखकर मस्जिद में प्रवेश कर गए ।
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बताया जा रहा है कि इस्लामाबाद में लाल मस्जिद के बाहर पुलिस का पहरा था। फिर भी भीड़ मस्जिद के अंदर घुस गई और पुलिस ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। घटनास्थल पर मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास लोगों को रोकने के आदेश नहीं थे।
धर्म गुरु अजीज से जब यह पूछा गया कि क्या कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लोगों को उनके बीच दूरी बनाए रखने के लिए कहा जाना चाहिए कि नहीं? तब उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि हमारा रुख इसके खिलाफ है क्योंकि हमारी राय है कि यह भगवान की ओर से एक सजा है, और हमें भुगतना होगा क्योंकि हमने दुनिया को पापों से भर दिया है।
मंगलवार को, एक दर्जन से अधिक प्रमुख धार्मिक संगठनों के धार्मिक नेताओं ने अपनी मस्जिदों को फिर से खोलने का संकल्प लेते हुए कोरोना वायरस के प्रसार के खिलाफ सावधानी बरतने का वादा भी किया था लेकिन फिर इस आदेश को गुरुवार को रद्द कर दिया क्योंकि कई धार्मिक नेताओं की सरकार के साथ भी बातचीत हो रही थी।