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Covid-19: दक्षिण कोरिया में ठीक हुए मरीजों में फिर वायरस मिलने से खलबली

Mon, 20 Apr 2020 05:10 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 20 Apr 2020 05:10 AM IST
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Covid19,Coronavirus again found in South Korea recovered patients
कोरोना वायरस - फोटो : social media

दक्षिण कोरिया में 141 संक्रमित लोगों में दोबारा वायरस की पुष्टि से खलबली मच गई है। दुनियाभर के वैज्ञानिक इसका कारण पता करने में लगे हैं क्योंकि उनका कहना है कि अगर ऐसे मामले लगातार आते रहेंगे तो स्थिति सुधरने की बजाए खराब होती जाएगी। न्यूयॉर्क के ब्लड सेंटर और चीन के शंघाई स्थित फुदान यूनिवर्सिटी में हुए अध्ययन से पता चला है कि वायरस संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं को भी निष्क्रिय कर देता है जिसके कारण इतनी अधिक संख्या में मौतें हो रही है।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर में लाखों की संख्या में टी और बी लिंफोसाइट्स होती हैं। इनका काम शरीर में वायरस के अटैक को पकड़कर इम्यून सेल्स को सचेत करना होता है तब ये कोशिकाएं संक्रमण को फैलने से रोकने का काम करती हैं। वायरस  शरीर में जब किसी वायरस का दखल बढ़ता है और उससे संक्रमण की शुरुआत होती है तो टी-सेल्स संक्रमण से बचाव के लिए सतर्क हो जाती हैं। वैज्ञानिक भाषा में इस प्रक्रिया को ‘साइटोकाइन स्टॉर्म’ कहते हैं।

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शरीर अपनी ही जान का दुश्मन 

वैज्ञानिकों का मानना है कि टी-कोशिकाओं की अधिक सक्रियता के चलते संक्रमण की दर घटने की बजाए बढ़ जाती है और इसी कारण से कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत अधिक संख्या में हो रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता जब अधिक सक्रिय हो जाए तो वे स्वस्थ कोशिका को भी नुकसान पहुंचाती है और शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं दूसरी कोशिकाओं की जान का दुश्मन बन जाती हैं।

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सिर्फ संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करता है 

वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर में मौजूद टी-कोशिका संक्रमित हो चुकी कोशिका को मारता है। इस दौरान वायरस एक के बाद एक लगातार दूसरी कोशिकाओं को प्रभावित करता है और अधिकतर कोशिकाओं को टी कोशिका मारने में लगी रहती है। इस कारण वायरस पूरे शरीर में फैल जाता है और टी-कोशिका एक-एक कर संक्रमित कोशिका को मारता चला जाता है जिसके कारण मरीज की हालत बेहद गंभीर हो जाती है।

वायरस शरीर में छुपा तो नहीं रहता है 

दक्षिण कोरिया के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (सीडीसी) का कहना है कि संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने के बाद दोबारा वायरस का मिलना चिंताजनक है। हम अब इस दिशा में काम कर रहे हैं कि वायरस शरीर में कुछ समय के लिए अपने आप को छुपा तो नहीं लेता है। ये भी हो सकता है कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती या बीमार होते हैं वो उसे अपने शरीर में वायरस की मौजूदगी का पता ठीक होने के बाद नहीं लगा पाते हैं।

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