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कोविड-19: 2022 में ही खत्म हो जाएगी महामारी, यदि दुनिया मान ले डब्ल्यूएचओ प्रमुख की यह शर्त
Mon, 03 Jan 2022 11:09 AM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 03 Jan 2022 11:09 AM IST
सार
डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी (Covid-19) 2022 तक खत्म हो जाएगी, यदि हम मिलकर असमानता खत्म कर दें।' घेब्रेयसस ने यह संदेश अपने नए साल के संबोधन में दिया।
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डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस
- फोटो : ANI
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विस्तार
कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रमुख टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस ने बड़ा संदेश दिया है, ताकि भविष्य की बीमारियों व महामारियों से बचाव किया जा सके। इसके लिए एक शर्त रखते हुए उन्होंने कहा कि इस वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने दुनियाभर के देशों के लिए एक 'बायोहब सिस्टम' (BioHub System) तैयार किया है, ताकि नवीन जैविक सामग्री को साझा किया जा सके।
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डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने फिर कहा, 'कोरोना वायरस महामारी (Covid-19) 2022 के अंत तक खत्म हो जाएगी, यदि हम मिलकर असमानता खत्म कर दें।' घेब्रेसियस ने यह संदेश अपने नए साल के संबोधन में दिया। इस बीच, 2022 की शुरुआत के साथ ही दुनिया भर में कोरोना महामारी को तीसरा साल शुरू हो गया है।
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घेब्रेसियस ने कहा कि कोई भी देश महामारी के खतरे से अछूता नहीं है। हमारे पास कोविड-19 को रोकने और उसका इलाज करने के लिए कई नए तरीके हैं, लेकिन जब तक असमानता जारी रहेगी, तब तक इस वायरस के जोखिम उतने ही अधिक होंगे। इसे हम रोक नहीं सकते और न ही भविष्यवाणी कर सकते हैं। यदि हम असमानता को समाप्त करेंगे तो म महामारी को समाप्त करेंगें'
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उन्होंने कहा कि कोविड-19 एकमात्र स्वास्थ्य खतरा नहीं है, जिसका दुनिया के लोग अगले साल सामना करेंगे। लाखों लोग नियमित टीकाकरण, परिवार नियोजन, संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के उपचार से भी वंचित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व को भविष्य की महामारियों से बचाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने 'बायोहम' बनाया है, ताकि दुनियाभर के देश नई बॉयोलॉजिकल मटेरियल्स को साझा कर सकें।
इससे कुछ दिन पहले भी एक मीडिया ब्रीफिंग में डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा था कि 2022 को महामारी के खात्मे का वर्ष बनाया जाना चाहिए। हाल ही में कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन सामने आया है, डब्ल्यूएचओ ने इसे 'वैरिएंट आफ कंसर्न' घोषित किया है। यह दुनियाभर में तेजी से फैल रहा है। भारत में भी इसके मरीज बढ़कर 1700 तक पहुंच गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के खिलाफ नौंवी वैक्सीन के बतौर सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की नई नोवावैक्स को आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है। संगठन के प्रमुख ने उम्मीद जताई कि यह वैक्सीन वैश्विक टीकाकरण का लक्ष्य पाने में अहम भूमिका निभाएगी।