फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   COVID-19 pandemic: Long working hours are a killer WHO study shows

सावधान: देर तक काम करने की आदत ले सकती है आपकी जान, डब्ल्यूएचओ ने किया आगाह

Mon, 17 May 2021 08:38 AM IST
दीप्ति मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Mon, 17 May 2021 08:38 AM IST
सार

सावधान: अगर आप भी लंबे समय तक काम में जुटे रहते हैं तो आपकी जान को भी खतरा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी एक रिपोर्ट में लोगों को आगाह करते हुए कहा कि लंबे समय तक काम करने की वजह से लोगों की जान जा रही है।

विज्ञापन
COVID-19 pandemic: Long working hours are a killer WHO study shows
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

दुनिया में अगर हम आए हैं, तो जीना ही पड़ेगा...और जीने के लिए कामकाज करना ही पड़ेगा। लेकिन आप काम कैसे करते हैं और कितने घंटे करते हैं, ये आपकी सेहत और जान से जुड़ा मसला है। अगर आप भी दफ्तर में या फिर घर में दफ्तर का काम लंबे समय तक कर रहे हैं तो सावधान हो जाइए। इससे आपकी जान भी जा सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी एक रिपोर्ट में लोगों को आगाह करते हुए कहा कि लंबे समय तक काम करने की वजह से लोगों की जान जा रही है।

विज्ञापन


कोरोना महामारी के चलते लोगों की जीवनशैली पूरी तरह बदल गई है। खाने-पीने से लेकर पार्टी करने, दोस्तों से मिलने से लेकर बाहर घूमने और दफ्तर का कामकाज करने तक के सभी तौर तरीके बदल गए हैं। वहीं लोगों में लंबे समय तक काम करने की प्रवृत्ति कोरोना महामारी के दौरान और बढ़ गई है। 
विज्ञापन


विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को कहा कि लंबे समय तक काम करते रहने की प्रवृत्ति के चलते हर साल सैकड़ों लोगों की जान जा रही है। महामारी के दौरान यह संख्या हजारों में पहुंच सकती है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


दो दशक में मौतों की संख्या 30 फीसदी बढ़ी
एनवायरमेंट इंटरनेशनल जर्नल में 'लंबे समय तक काम करने के जीवन पर असर' को लेकर विश्व का पहला अध्ययन प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया है कि वर्ष 2016 में लंबे समय तक काम करने के चलते स्ट्रोक और हृदय रोग बढ़ गए, जिससे दुनिया भर में 7.45 लाख लोगों की जान चली गई। यह संख्या वर्ष 2000 से की तुलना तकरीबन 30 फीसदी अधिक थी। 

...इतने घंटे काम करने वालों को अधिक खतरा

लंबे समय तक काम करने को लेकर डब्ल्यूएचओ के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य विभाग की निदेशक मारिया नीरा ने कहा, हफ्ते में 55 घंटे या उससे अधिक घंटे काम करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि इस जानकारी से हम उन श्रमिकों की जान बचाना चाहते हैं, जो लंबे समय तक काम में जुट रहते हैं। 

चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया के हालात बेहद खराब 
डब्ल्यूएचओ और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन का यह संयुक्त अध्ययन कुल 194 देशों के आंकड़ों पर आधारित है।अध्ययन में 2000 से लेकर 2016 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया गया है। इसमें कहा गया है कि हर हफ्ते 35-40 घंटे काम करने वालों की तुलना में 55 घंटे या उससे अधिक काम करने वालों में 35 फीसदी स्ट्रोक और 17 फीसदी तक जान जाने का जोखिम बढ़ जाता है। लंबे समय तक काम करने के दुष्प्रभाव से चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया सबसे अधिक प्रभावित देश हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख समेत कई अन्य अधिकारियों का कहना है कि कोरोना महामारी में लंबे समय तक काम करने की प्रवृत्ति 9 फीसदी तक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रवृत्ति में सुधार करना बेहद जरूरी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed