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कोरोना ला सकता है अवसाद की वैश्विक सूनामी, समय रहते कारगर उपाय की जरूरत

Wed, 30 Sep 2020 03:24 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Wed, 30 Sep 2020 03:24 PM IST
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covid 19 mental health impact of covid 19 on mental health Covid-19 may bring global tsunami of depression, need for effective remedy
कोरोना वायरस में मानसिक स्वास्थ्य - फोटो : For Representation Only

दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं। कोई कारोबार चौपट होने से अवसाद में है तो कोई स्कूल नहीं खुलने, कोई लगातार घर में बंद रहने की वजह से अवसादग्रस्त हो गया है। किसी को अपनी नौकरी पर लटकती तलवार सता रही है तो किसी को भविष्य की चिंता खाए जा रही है। इन कारणों से अस्पतालों के मानसिक रोग विभाग में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में भारतीयों के नेतृत्व वाली एक अंतरराष्ट्रीय शोध टीम ने दावा है किया है कि कोविड-19 (कोरोना वायरस) जल्द ही मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की वैश्विक सुनामी ला सकता है। 


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अमेरिका में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में इस शोध-पत्र के लेखक विक्रम पटेल का कहना है, "मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या विश्व स्तर पर सबसे उपेक्षित स्वास्थ्य मुद्दों में से एक है, जो कोरोना महामारी के बाद और बढ़ गई है।" 



पटेल का कहना है कि कोविड-19 महामारी मानसिक स्वास्थ्य का एक सामाजिक निर्धारक बन चुकी है, जो इसे खराब करने में ईंधन का काम कर रही है। अमेरिका में कोरोना वायरस पर आयोजित होने वाले ईएससीएम आईडी कॉन्फ्रेंस में पेश किए जाने वाले इस अध्ययन से पता चला कि मानसिक स्वास्थ्य पर दबाव, जो इस महामारी से पहले ही बहुत ज्यादा मात्रा में मौजूद है, खतरनाक दर से बढ़ रहा है। पटेल ने कहा कि ऐसे कई मुद्दे हैं जो आबादी के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं, जिसमें नौकरियों और आय की सुरक्षा, सामाजिक बहिष्कार, स्कूल बंद होना और परिवारों पर भारी दबाव बनाना आदि प्रमुख हैं। 

विकास का पहिया उल्टा घूमा
विक्रम पटेल ने जोर देकर कहा है कि, "इस सब के अलावा अन्य चिंताएं जैसे चिकित्सा सेवा और देखभाल, संभावित घरेलू हिंसा स्थिति और सबसे बड़ी चिंता इस वायरस से संक्रमित होने का डर लोगों की मानसिक परेशानियां बढ़ा रहा है।" उन्होंने कहा कि यह महामारी वैश्विक विकास की गति को कई वर्ष पीछे धकेल सकती है। इसमें उन देशों को बहुत नुकसान बोलना पड़ेगा जो पहले से ही बहुत पीछे चल रहे हैं। 

विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविड मलपास ने बीते अगस्त महीने में अनुमान लगाया था कि इस महामारी की वजह से 10 करोड़ से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे पहुंच सकते हैं। महामारी की वजह से सभी देशों में आर्थिक मंदी और मानसिक स्वास्थ्य सूनामी फैलने जा रही है। उन्होंने कहा कि महामारी से पूर्व ही मानसिक स्वास्थ्य संकट एक बड़ा सवाल था, जो अब और गहरा गया है। 

कारगर उपाय की जरूरत
गौरतलब है कि विश्व अभी भी कोविड-19 की मार झेल रहा है। कई महीनों तक लागू रहे लॉकडाउन के बाद ज्यादातर देशों में अब जन-जीवन सामान्य होने की दिशा में है। लेकिन जिन जगहों पर संक्रमण के मामले बढ़े रहे हैं वहां लॉकडाउन दोबारा लागू किया जा रहा है। लगभग तीन से चार महीने तक लागू रहे लॉकडाउन से कई लोगों की मानसिक हालत ठीक नहीं थी, ऐसे में अब फिर से लॉकडाउन की आशंका से उनकी परेशानी में इजाफा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं को दूर करने के लिए सरकारों को समय रहते कारगर उपाय करने होंगे जिससे आबादी को बीमारी होने से बचाया जा सके।

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