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गांवों में कोरोना फैलने से चीन परेशान, रोकथाम की पुरानी रणनीति हुई फेल
Fri, 15 Jan 2021 04:23 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 15 Jan 2021 04:23 PM IST
सार
- चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय चिंतित, गांवों में न तो कोई मास्क लगाता है, न टेस्ट कराता है
- वसंत उत्सव को देखते हुए परेशान है चीन, लोगों से गांव न जाने की अपील
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चीन बीजिंग में एक मेट्रो स्टेशन पर काफी संख्या में मौजूद लोग
- फोटो : PTI (फाइल फोटो)
विस्तार
चीन में इस हफ्ते गुरुवार को आठ महीने बाद कोरोना वायरस से पहली मौत हुई। इस खबर से सारे देश में हलचल मच गई है। खुद चीनी मीडिया में छपी रिपोर्टों में इस मौत को इस बात का संकेत माना गया है कि कोरोना महामारी से निपटने की चीन की रणनीति में खामियां हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों में इंतजाम को लेकर कई कमियां सामने आई हैं, जहां बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग लोगों की आबादी है, जो पहले से किसी बीमारी के मरीज हैं।
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खास चिंता इसलिए भी जताई जा रही है कि जल्द ही देश में वसंत उत्सव आने वाला है। इस दौरान चीन में बड़ी संख्या में लोग छुट्टियां मनाने अपने गांव जाते हैं। अब अधिकारियों ने अपील जारी कर लोगों से कहा है कि वे वसंत उत्सव को उसी जगह मनाएं, जहां वे रहते हैं। इसके अलावा गांवों से शहर जाकर काम करने वाले मजदूरों पर भी खास ध्यान देने की जरूरत बताई गई है, जिनके रहने का माहौल सेहत के लिहाज से उचित नहीं होता।
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चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन में रोग रोकथाम के विशेषज्ञ वू हाओ ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार द ग्लोबल टाइम्स से कहा- पहले हमने सोचा था कि देहाती इलाके बहुत विशाल हैं और आबादी दूर-दराज में रहती है। लेकिन ये वायरस बहुत चालाक है, जैसा कि हुबेई प्रांत में इसका संक्रमण फैलने से जाहिर हुआ है। इसी प्रांत में ताजा मौत हुई है। मृतक ग्रामीण इलाके का बाशिंदा था। वू ने कहा कि अब तक ग्रामीण इलाकों में कोरोना वायरस के रोकथाम की रणनीति यह थी कि संक्रमित लोगों को बाहर से यहां आने से रोका जाए। इसके लिए सड़कों को जाम किया जाता था और बाहरी लोगों के आने पर रोक लगाई जाती थी। लेकिन अब ऐसा लगता है कि इस वायरस का संक्रमण अधिक जटिल है। पहले जो समझा गया था, यह उससे अलग ढंग से भी फैल जाता है।
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चीन के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा है कि इन सर्दियों में स्थानीय मामले छिटपुट ढंग से हुए हैं। इनका सबसे ज्यादा असर उम्रदराज लोगों में देखा गया है, जिनकी ग्रामीण इलाकों में ज्यादा आबादी है। कुछ जगहों पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन हुआ है। कहीं-कहीं एक पीढ़ी के व्यक्ति से दूसरी पीढ़ी के व्यक्ति में इसका संक्रमण हुआ है। इससे रोकथाम की चुनौतियां अधिक गंभीर और जटिल हो गई हैं। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक गांवों में ज्यादातर संक्रमण मध्य आयु या उम्रदराज लोगों के बीच हुआ है। हुबेई प्रांत में कोरोना संक्रमित हुए लोगों की औसत आयु 50 वर्ष है। 30 फीसदी मामले 60 साल से ऊपर के लोगों के बीच दर्ज हुए हैं।
द ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में बहुत से लोग कोविड-19 का टेस्ट कराने से बच रहे हैं, क्योंकि वे क्वारंटीन नहीं होना चाहते। इस अखबार ने हुबेई प्रांत में शिजियाझुआंग शहर के एक डॉक्टर का हवाला दिया है, जिसके मुताबिक बहुत से मरीज इस टेस्ट से बचने के लिए उसके पास इलाज कराने आए। उस डॉक्टर ने ये स्वीकार किया कि उसके जैसे बहुत से डॉक्टर हलके लक्षण वाले मरीजों के बारे में शहर के रोग नियंत्रण केंद्र को सूचना नहीं देते हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ पार्टी हिस्ट्री एंड लिटरेचर में रिसर्च फेलॉ ली युवेजुन ने एक अखबार से कहा है कि ग्रामीणों का नजरिया यह है कि कोरोना वायरस शहरों में रहता है, जबकि वे इससे बहुत दूर रहते हैं। इसलिए उनमें से ज्यादातर लोग मास्क नहीं पहनते। अब गांवों में लाउडस्पीकरों के जरिए रोकथाम के उपायों का प्रचार किया जा रहा है। साथ ही इसके लिए बड़े-बड़े बैनर लगाए जा रहे हैं। गांवों में प्रवेश करने वाली सड़कों पर वाहनों और आने-जाने वाले लोगों की सख्ती से जांच की जा रही है। चीन के कई शहरों में वंसत उत्सव के दौरान लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। गांवों में अधिकारी लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वे शादी जैसे समारोह स्थगित कर दें और अंत्येष्टि साधारण ढंग से करें।