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फेफड़ों के बाद कोरोना ने दिमाग को जकड़ा, अपना नाम तक नहीं बता पा रहे हैं मरीज
Sun, 05 Apr 2020 06:10 PM IST
Tanuja Yadav
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Sun, 05 Apr 2020 06:10 PM IST
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Coronavirus Ventilator
- फोटो : Social Media
गले और फेफड़ों के बाद कोरोना ने अब दिमाग को भी जकड़ लिया है। दुनियाभर के कई न्यूरोलॉजिस्ट इस खबर की पुष्टि कर रहे हैं। उनका कहना है कि दुनिया से कुछ दिलचस्प मामले सामने आए हैं। इन मामलों में मरीजों का एक ऐसा तबका भी है जिनमें दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियां पनप रही हैं। कोरोना से संक्रमित मरीजों के दिमाग में सूजन, दिमाग में खून के थक्के बनना और बोल ना पाना जैसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं।
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कोरोना ने अब तक दुनिया में 11 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। कोरोना के मुख्य लक्षण बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत बताई जा रही है लेकिन इस बीमारी से संक्रमित कुछ लोगों में मस्तिष्कविकृति या फिर ब्रेन डिसफंक्शन जैसे लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं। जिससे मरीजों में सूंघने और स्वाद पहचानने की क्षमता घट रही है और साथ ही दिल की बीमारी होने की भी संभावनाएं सामने आ रही हैं।
मरीज में बोलने की क्षमता घटी
मार्च की शुरुआत में एक 74 वर्षीय मरीज को खांसी और बुखार के चलते इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। मरीज का एक्स-रे किया गया तो न्यूमोनिया होने की बात सामने आई और मरीज को घर वापस भेज दिया गया। अगले दिन मरीज को फिर तेज बुखार आया, जिसके बाद परिवारजन उसे अस्पताल ले आए। अचानक ही मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और हालत इतनी बिगड़ गई कि डॉक्टर को अपना नाम बता पाना मुश्किल हो गया। 74 वर्षीय मरीज अब अपनी बोलने की क्षमता गंवा चुका था।
मरीज को फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी थी, इसके अलावा वह पार्किसन बीमारी से भी जुझ रहा था। जल्द ही मरीज को हाथ-पैर चलाने में दिक्कत होने लगी और दिमाग का दौरा पड़ने का खतरा दिखाई दिया। डॉक्टर को शक हुआ कि मरीज को कोरोना वायरस है जिसकी पुष्टि टेस्ट करने के बाद हुई।
सिरदर्द, दिमाग में सुजन जैसे लक्षण
दिमाग से जुड़ा एक और मामला मिशगन के ड्रेटायट में सामने आया। एक 50 वर्षीय महिला एयरलाइन कर्मचारी को कोरोना वायरस था। महिला ने डॉक्टर से सिरदर्द होने की बात कही। बहुत जद्दोजहेद के बाद महिला डॉक्टर को अपना नाम बता पाने में सफल रही लेकिन कुछ समय के बाद कम जवाब देने लगी। जब महिला के दिमाग की स्क्रीनिंग हुई तो दिमाग में कुछ असामान्य सूजन दिखी और दिमाग के एक हिस्से की कुछ कोशिकाएं डैमेज होकर खत्म हो गई।
डॉक्टर ने इसे दिमाग की बेहद खतरनाक स्थिति बताया और बीमारी को 'एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एनसेफेलोपैथी' नाम दिया। इस तरह के कॉम्प्लिकेशन इंफ्लूएंजा और दूसरे वायरस के संक्रमण से होता है। हेनरी फोर्ड हेल्थ सिस्टम की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एजिसा फोरे का कहना है कि संक्रमण के कुछ दिनों के बाद दिमाग में सूजन आती है और लगातार बनी रहती है। इस मामले से ये साफ है कि दुर्लभ स्थिति में कोरोनावायरस दिमाग को भी अपनी चपेट में ले सकता है।
दिमाग में खून के थक्के जमना और दौरे पड़ने जैसे लक्षण
इटली और दुनिया के कई डॉक्टर ने कोरोना के ऐसे कई मामले देखे जिसमें मरीज को खांसी, बुखार के अलावा दिमाग संबंधी बीमारियों के भी लक्षण देखने को मिले। इन लक्षणों में दौरे पड़ना, इंसेफेलाइटिस जैसे लक्षण, दिमाग में खून का थक्का बनना और दिमाग के सून्न हो जाने से लक्षण शामिल है। इटली में ऐसे मरीजों के लिए अलग से न्यूरो-कोविड यूनिट की शुरुआत की गई है।
फेफड़ों के लिए वेंटिलेटर लेकिन दिमाग के लिए कुछ नहीं
पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ शैरी चोउ के मुताबिक इस तरह के लक्षणों पर ज्यादा जानकारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि दिमाग के लिए अभी तक वेंटिलेटर नहीं बना है, अगर फेफड़ों में परेशानी होती है तो मरीज को ठीक करने के लिए वेंटिलेटर पर लेटा दिया जाता है लेकिन दिमाग के लिए ये सुविधा हमारे पास नहीं है।
चीनी शोधकर्ताओं का कोरोना वायरस पर बयान
हाल में छपे एक शोध में चीनी शोधकर्ताओं का कहना है कि कुछ मामलों से ऐसे प्रमाण सामने आए हैं जो बताते हैं कि कोरोना वायरस सिर्फ सांस की नली तक सीमित नहीं है, ये वायरस नर्वस सिस्टम तक पहुंच रहा है। फरवरी में चीन कछ मरीज ऐसे भी सामने आए थे जिनमें मानसिक बीमारी के लक्षण देखे गए थे लेकिन बाद में ये मरीज कोरोना से पीड़ित पाए गए, हालांकि इन मरीजों में खांसी और बुखार जैसे लक्षण नहीं पाए गए थे।