चीन: कोरोना मरीजों को बचाने में जुटे वुहान के 63 फीसदी डॉक्टर-नर्सों के दिमाग पर हुआ बुरा असर
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
कोरोना की वजह से वेंटिलेटरों पर सैकड़ों की संख्या में दम तोड़ते मरीजों को लगातार देखते रहे चीन के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के दिल व दिमाग पर गहरा असर हुआ है। करीब 63 फीसदी ने स्वीकार किया है कि लगातार आघात पहुंचाने वाले दृश्यों ने उनके दिमाग को बीमार किया है।
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
कोरोना की वजह से वेंटिलेटरों पर सैकड़ों की संख्या में दम तोड़ते मरीजों को लगातार देखते रहे चीन के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के दिल व दिमाग पर गहरा असर हुआ है। करीब 63 फीसदी ने स्वीकार किया है कि लगातार आघात पहुंचाने वाले दृश्यों ने उनके दिमाग को बीमार किया है।
इनमें से 17.5 फीसदी मनोचिकित्सकों से थेरैपी करवा रहे हैं। बाकी दूसरे तरीकों से सामान्य होने का प्रयास कर रहे। दिल को झकझोर देने वाली यह जानकारी करीब एक हजार डॉक्टर व नर्सों पर चीन और अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थानों के अध्ययन में सामने आए हैं।
चीन का वुहान शहर जनवरी-फरवरी में कोरोनावायरस संक्रमण का केंद्र बना रहा था। इसके इलाज में जुटे हजारों डॉक्टरों व पैरा मेडिकल स्टाफ ने भी ऐसे विकट भावनात्मक हालात झेले। प्रमुख संस्थानों ने इसके असर को समझने के लिए वुहान के 994 चिकित्सकों व पैरा मेडिकल स्टाफ के बीच अध्ययन करवाया तो यह चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
इन भावनात्मक आवेगों को झेला
- इन लोगों ने महामारी की शुुरुआत में डर और बेचैनी महसूस की। बाद में उनमें अवसाद और पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस के लक्षण सामने आए।
- संक्रमण के जोखिमपूर्ण वातावरण में और संक्रमित लोगों के लिए काम करना इसकी प्रमुख वजह बनी।
- पूर्व में हुए इस प्रकार के अध्ययनों के अनुसार डॉक्टरों के दिमाग पर यह असर जीवन भर बना रहता है।
राहत के लिए क्या किया
- 36.3 फीसदी मनोविज्ञान की किताबें पढ़ रहे।
- 50.4 फीसदी ऑनलाइन सामग्री पढ़ रहे सेल्फ हेल्प समूहों की मदद ले रहे।
- 17.5 प्रतिशत मनोचिकित्सकों से काउंसलिंग और थेरैपी ले रहे।
सिफारिश: 17 फीसदी मनोचिकित्सकों से करवा रहे थेरैपी
अध्ययन के अनुसार बड़ी संख्या में चिकित्साकर्मी महामारी के समय मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझते नजर आए। ऐसे में उनकी समस्याओं पर ध्यान देने और पहले से उन्हें इन हालात के लिए तैयार करने की सिफारिश की गई है। भविष्य में या बाकी देशों में ऐसे हालात होने पर वहां भी व्यापक तैयारियों की जरूरत बताई गई है।