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कठघरे में महामारी पर काबू पाने के दावे: क्यों टूट गई वियतनाम की ‘कोविड-बीटर’ की छवि?

Fri, 10 Sep 2021 04:57 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हनोई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हनोई Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 10 Sep 2021 04:57 PM IST
सार

अब देश में इस पर बहस चल रही है कि इन हालात के लिए जिम्मेदार कौन है। एक राय यह है कि 2020 की कामयाबी के कारण सरकार ने कोरोना वैक्सीन का ऑर्डर देने में देरी की। एक राय यह भी है कि वियतनाम में मौजूद राष्ट्रवादी भावनाओं के कारण वहां मुश्किल खड़ी हुई है...

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coronavirus delta variant cases rising in Vietnam
वियतनाम, हनोई, कोरोना वायरस - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

कोरोना महामारी पर काबू पाने में वियतनाम की सफलता की कहानी कठघरे में है। पिछले साल महामारी के शुरुआती महीनों में वियतनाम ने कोरोना संक्रमण को जल्द रोकने में कामयाबी पा ली थी। उसके बाद उसने धनी पश्चिमी देशों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स (पीपीई) और मास्क की सहायता भी भेजी थी। 2020 में वियतनाम में लगभग 1,500 लोग ही कोरोना से संक्रमित हुए। इससे सिर्फ 35 लोगों की जान गई।

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लेकिन इस साल जुलाई में कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट के फैलाव ने कहानी पलट दी। तब से देश के प्रमुख शहरों में लॉकडाउन लागू है। देश में कारोबारी गतिविधियां लगभग ठहरी हुई हैं। बीते छह सितंबर को देश में पांच लाख 30 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आए। अब तक देश में 13 हजार से ज्यादा लोगों की मौत महामारी के कारण हो चुकी है। देश में कोरोना टीकाकरण की दर काफी नीचे है। अब तक सिर्फ 18 फीसदी आबादी को कोरोना वैक्सीन की एक डोज लगी है। दोनों डोज सिर्फ लगभग तीन फीसदी लोगों को लगी हैं।
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अब देश में इस पर बहस चल रही है कि इन हालात के लिए जिम्मेदार कौन है। एक राय यह है कि 2020 की कामयाबी के कारण सरकार ने कोरोना वैक्सीन का ऑर्डर देने में देरी की। एक राय यह भी है कि वियतनाम में मौजूद राष्ट्रवादी भावनाओं के कारण वहां मुश्किल खड़ी हुई है। इन भावनाओं की वजह से वियतनाम सरकार ने चीन के टीका देने की पेशकश को स्वीकार नहीं किया। वह अपने देश में टीका बनाने की कोशिशों में जुटी रही। जबकि सरकार का कहना है कि डेल्टा वैरिएंट की प्रकृति की वजह से हालात बेकाबू हुए। स्वास्थ्य मंत्री न्गुयेन थान्हा लॉन्ग ने एक बयान में कहा है- डेल्टा वैरिएंट ने महामारी के खिलाफ हासिल हुई तमाम उपलब्धियों को नष्ट कर दिया।

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इस बीच देश में कारोबार खोलने की मांग तेज हो रही है। हाल के वर्षों में वियतनाम ने ‘दुनिया के भरोसेमंद कारखाने’ के रूप में प्रतिष्ठा हासिल की थी। लेकिन अब महामारी के कारण निवेशकों के यहां से भागने की आशंका पैदा हो गई है। रेटिंग एजेंसी फिच ने 2021 में वियतनाम के जीडीपी की वृद्धि दर छह फीसदी रहने का अनुमान जताया था। लेकिन एक ताजा बयान में उसने कहा कि अब ये दर हासिल होने की राह में महामारी बड़ी बाधा बन गई है।

वेबसाइट निक्कई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक वियतनाम एशिया के उन देशों में है, जो मुक्त व्यापार के लिए सबसे ज्यादा खुले हुए हैं। पश्चिमी देश उसकी इस छवि को बनाए रखना चाहते हैं। इसलिए महामारी के इस वक्त में म्यांमार को काफी विदेशी सहायता मिली है। ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और पोलैंड ने हाल के हफ्तों में बड़ी संख्या में कोरोना वैक्सीन का अनुदान वियतनाम को भेजा है। यूरोपीय देशों ने कुल मिल कर अगस्त में वैक्सीन के 15 लाख डोज वियतनाम भेजे। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया से भी वियतनाम को वैक्सीन की मदद मिली है।

जुलाई तक वियतनाम सरकार चीनी से मदद लेने से इनकार कर रही थी। लेकिन अब उसने चीन से आई वैक्सीन की खेप को भी स्वीकार कर लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन की मदद पहुंचने के बाद अब देश में टीकाकरण की रफ्तार तेज हो सकती है। लेकिन इस बीच ‘कोविड बीटर’ यानी कोविड-19 को परास्त करने वाले देश के रूप में वियतनाम की प्रतिष्ठा तार-तार हो चुकी है।

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