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Hindi News ›   World ›   Coronavirus,covid19.The S2 receptor in the eye can also enter the coronavirus

आंखों में मौजूद एस-2 रिसेप्टर से भी शरीर में घुस सकता है कोरोना

Tue, 12 May 2020 06:16 AM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 12 May 2020 06:16 AM IST
सार

  • अभी तक लगाया जा रहा था कयास लेकिन अब पुष्टि
  • जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने शोध में किया दावा

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Coronavirus,covid19.The S2 receptor in the eye can also enter the coronavirus
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

मास्क और दस्ताने पहनकर, चेहरे को छूने से बचकर वायरस से बचा जा सकता है। पहले कयास लगाया जा रहा था की कोरोना आंखों से भी शरीर में घुस सकता है। वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाला खुलासा कर दिया है कि कोरोना आंखों में मौजूद एस-2 रिसेप्टर के जरिए शरीर में घुस सकता है। संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उससे निकलने वाली बूंदों में मौजूद वायरस आंखों में मौजूद एस-2 रिसेप्टर से  चिपककर शरीर में फैल सकता है।

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अमेरिका के जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के आंखों में वायरस के पहुंचते ही संक्रमण की शुरुआत हो जाती है। आंखें लाल होने के साथ उसमें सूजन भी आ सकती है। सबसे बड़ा खतरा ये है कि आंखों में मौजूद आंसू के जरिए ये वायरस अपना प्रसार भी बढ़ा सकता है।
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नेत्र रोग विभाग के डॉ. लिंग्ली झोहू ने बताया कि इस निष्कर्ष तक पहुंचने केलिए 10 लोगों का पोस्टमार्टम किया गया जिनकी मौत कोरोना से नहीं हुई थी। इन लोगों के आंखों की जांच की गई तो पता चला कि आंखों में भी एस-2 रिसेप्टर होते हैं जो कोरोना का सबसे बड़ा वाहक है। वायरस जब यहां पहुंचेगा तो वो रिसेप्टर को निष्क्रिय कर देगा और संक्रमण फैलाने के साथ अपना कुनबा बढ़ाने लगेगा।

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एस-2 रिसेप्टर वालों में वायरल लोड अधिक

वैज्ञानिकों का दावा है कि एस-2 रिसेप्टर जिन लोगों में अधिक होता है उन लोगों में वायरल लोड यानि वायरस की मात्रा अधिक हो सकती है। संक्रमण का पहला डोज रक्त के जरिए शरीर में फैल सकता है। तीस फीसदी लोगों में कोरोना वायरस की शुरुआत आंखों से होने की संभावना है। यही कारण है कि पूरी सावधानी बरतने के बाद भी जो लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं उसका ये एक बड़ा कारण हो सकता है।

श्वास नलिका से आंखों तक पहुंचता हो

वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि वायरस श्वास नलिका से आंखों तक पहुंचता हो। ये भी हो सकता है कि आंखों से शुरु हुआ संक्रमण शरीर के दूसरे अंगों में पहुंचता हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि आंखों से निकलने वाली गंदगी संक्रमण के प्रसार का कारण हो सकती है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतते हुए आंखों की साफ-सफाई पर ध्यान देना चाहिए। जो भी कपड़ा,  तौलिया या रूमाल इस्तेमाल कर रहे हैं उसका प्रयोग कोई दूसरा न करें इसका ध्यान रखें।

बिलकुल संभव है, आंख नाक जुड़ी होती हैं

इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वायरस जिनोमिक्स के प्रो. पॉल केलम का कहना है कि अगर कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो वायरस आंखों में घुसकर श्वास नलिका में उतर सकता है। इसकी पूरी संभावना है क्योंकि आंखें, नाक की लेक्रमिल डक्ट से जुड़ी होती है।



ऐसा इसलिए क्योंकि जब कोई आप दवा आप आंख में डालते हैं तो उसका स्वाद गले के पिछले हिस्से में महसूस होता है। इसी तरह वायरस भी आंख से गले में उतर सकता है।

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