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अमेरिका में अश्वेत बच्चों को कोरोना से सबसे अधिक खतरा, अब तक 121 की मौत
Thu, 17 Sep 2020 05:53 AM IST
संजीव कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 17 Sep 2020 05:53 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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संयुक्त राज्य अमेरिका में 21 साल से कम आयु वाले युवाओं की मौत का 78 फीसदी हिस्सा अश्वेत नागरिकों का है। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के अध्ययन के अनुसार कुल मौतों में 21 वर्ष से कम आयु वाले 121 युवाओं की मौत हुई है। कुल मिलाकर बच्चों और युवाओं के बीच मृत्यु दर वयस्कों की तुलना में बहुत कम है। सीडीसी ने 392,000 मामलों को लेकर ये रिसर्च की। यह कुल आंकड़े का आठ फीसदी था। रिसर्च में सभी मौतों का केवल 0.08 फीसदी 21 साल से कम उम्र वाले युवाओं का आया।
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रिपोर्ट के मुताबिक, 21 साल से कम उम्र अमेरिका की आबादी में 26 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं। मतलब पूरी आबादी का 26 फीसदी 21 साल से कम आयु वाले लोग हैं। लेकिन अध्ययन आगे इस बात का सबूत देता है कि बच्चों और किशोरों में वायरस के प्रति प्रतिरोधक क्षमता नहीं है और पोस्ट-वायरल स्थिति जिसे बच्चों में मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम कहा जाता है।
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सीडीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में अश्वेत बच्चों पर संकट गहराया है। एक मार्च से 25 जुलाई के बीच अस्पतालों में भर्ती हुए 18 साल से छोटे 576 बच्चों पर हुए अध्ययन में पाया गया कि इनमें से आधे किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त थे। इसमें मोटापा, फेफड़ों की बीमारी सामान्य रही।
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सीडीसी ने एमआईएस सी को लेकर भी 2 मार्च से 18 जुलाई के बीच 40 राज्यों के 570 बच्चों पर अध्ययन किया था। इसमें सामने आया कि इस बीमारी से ग्रस्त 40 फीसदी बच्चे हिस्पेनिक और 33 फीसदी अश्वेत थे। वहीं श्वेतों का आंकड़ा सिर्फ 13 फीसदी था।
दुनिया भर में अब तक कोरोना के जितने मामले सामने आए हैं, उनमें 20 साल से कम उम्र वाले मरीजों की संख्या 10 फीसदी से भी कम है। इस उम्र वाले सिर्फ 0.2 फीसदी लोगों की मौत हुई। यह आंकड़े मंगलवार रात डब्ल्यूएचओ ने जारी किए। संगठन ने यह भी कहा कि इस बारे में अभी और रिसर्च की जरूरत है क्योंकि बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा कि हम जानते हैं कि बच्चों के लिए भी यह वायरस जानलेवा है। उनमें भी हल्के लक्षण देखे गए हैं।