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इटली में कोरोना: उत्तरी इलाके में सबसे ज्यादा प्रकोप, दक्षिणी इलाके का ऐसा है हाल

Sun, 05 Apr 2020 02:32 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, मिलान
वर्ल्ड डेस्क, मिलान Published by: योगेश साहू Updated Sun, 05 Apr 2020 02:32 AM IST
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coronavirus : As northern Italy is ravaged by coronavirus, theres trouble brewing down south
लोगों के घरों में रहने की वजह से सूनी पड़ी मिलान की सड़कें - फोटो : PTI

इटली में बीते चार हफ्तों से लगे लॉकडाउन के बाद से यहां लोग अभी भी अपनी बालकनी में या घर के बाहर ताली-थाली बजाते हुए दिख रहे हैं। परंतु अब यह पहले से कम हो गया है। यहां तक कि जगह-जगह लगे झंडे भी अब थोड़े झुके हुए दिखाई देने लगे हैं। कारण कि बीते दिनों में 15 हजार से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं, इनमें बीती 23 फरवरी से संक्रमित मरीजों की देखभाल और इलाज में लगे डॉक्टर व नर्सें भी शामिल हैं। 

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इटली में लॉकडाउन शुक्रवार 3 अप्रैल को खत्म होना था, लेकिन इसे 12 अप्रैल के बाद तक के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि उत्तर से लेकर दक्षिण इलाके तक में लोग लॉकडाउन के जल्द खत्म होने को लेकर प्रति काफी उत्साहित हैं। क्योंकि लॉकडाउन के दौरान उठाए गए सख्त कदमों ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है।
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इटली की नागरिक सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, कोरोना के फैलने का सबसे ज्यादा  नुकसान या खामियाजा उत्तरी इलाके को ही उठाना पड़ा है। क्योंकि यहां समृद्धशाली लोग रहते हैं और कोरोना के 75 फीसदी मामले यहीं सामने आए हैं। जबकि यहां के टस्कनी में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। 
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इटली में डॉक्टर्स फेडरेशन के मुताबिक उत्तरी इलाके में करीब 10 हजार से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित मरीजों का इलाज करते समय कोरोना की चपेट में आए हैं। फेडरेशन का मानना है कि एक तरह से देखा जाए तो चिकित्सा सुरक्षा सामग्री की कमी के कारण ये स्वास्थ्य कर्मी भी कोरोना को फैलाने में अनजाने में अप्रत्यक्ष रूप से योगदान दे बैठे हैं।

वैसे देखा जाए तो पूरे यूरोप में इटली के उत्तरी इलाके में दुनिया की सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं और तंत्र मौजूद है, लेकिन यह सब कोरोना के बढ़ते मरीजों के कारण अब खत्म होने की कगार पर है। 

यदि प्रारंभिक तौर पर वायरस का संक्रमण दक्षिणी क्षेत्र के गरीब इलाके में फैलाना शुरू होता है, तो यहां हालात और भी बदतर हो सकते हैं। क्योंकि इस इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बुनियादी ढांचा तक नहीं है। 

हालांकि दक्षिणी इलाके में पहले से ही इसके अलावा भी कई समस्याएं हैं। इतालवी राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसटीएटी) के अनुसार,  यहां संगठित अपराध सिंडिकेट सक्रिय है। यही वजह है कि यहां 20 फीसदी वयस्क बेरोजगार हैं और इनमें से 50 फीसदी वो हैं जिनकी उम्र 24 साल या इससे कम है। दक्षिण में कोरोना ने कुछ हजार लोगों को संक्रमित किया है। परंतु गैर संक्रमितों के लिहाज स्वास्थ्य सुविधाएं अभी भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही हैं।

दक्षिणी इलाके की अधिकांश आबादी कथित तौर पर कालाधन या हवाला के धंधे में लिप्त हैं। यही वजह है कि वे सरकार की ओर से बेरोजगारी लाभ पाने के लिए कानूनी तौर पर दावा नहीं कर सकते हैं। 

आईएसटीएटी के अनुसार, कानूनी तौर पर रोजगार करने वालों को कुछ बिलों में राहत दी जाती है। लेकिन कालाधन जैसे गैरकानूनी काम करने वालों के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है, खास बात तो यह है कि ऐसे लोगों की आबादी करीब 37 लाख है।


इसके साथ ही ऐसे असंगठित वर्ग के कामगार, रसोइए आदि का कहना है कि रोज उन्हें चोर—उचक्कों या फिर सेक्स वर्कर्स के साथ खाने की लाइन में खड़े होना पड़ता है। ऐसे में दूसरे लोग ऐसे देखते हैं जैसे कि वह भी कोई अपराधी हों। समाज का यह वर्ग, जिसके लिए कोई सार्वजनिक लेखांकन नहीं है, सबसे ज्यादा हताश है।
 

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