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कोरोना वायरस ओमिक्रॉन: विशेषज्ञ बोले- नए वैरिएंट उभरने के लिए जिम्मेदार है धनी देशों की वैक्सीन जमाखोरी

Mon, 29 Nov 2021 04:59 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 29 Nov 2021 04:59 PM IST
सार

ओमिक्रॉन वैरिएंट के सामने आने के बाद कई देशों ने अपने यहां यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। खास कर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों पर रोक लगा दी गई है। लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञों ने कहा है कि जो स्थिति बनी है, उसके लिए धनी देश जिम्मेदार हैं। उनकी वजह से ही धनी और विकासशील देशों की टीकाकरण दर में बड़ा फासला मौजूद रहा है...

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Corona virus Omicron: Expert said - vaccine hoarding by rich countries is responsible for the emergence of new variants
ओमिक्रॉन वेरिएंट(सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई

विस्तार

कोरोना वायरस के नए वैरिएंट- ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों की संख्या में तेजी से हो रही वृद्धि के बीच धनी देश निशाने पर आ गए हैं। जानकारों ने कहा है कि इन देशों ने गुजरे एक साल में कोरोना वैक्सीन की जमाखोरी की, जिससे गरीब देशों में प्रभावी ढंग से टीकाकरण नहीं हो पाया। उसकी वजह से ही नए खतरनाक वैरिएंट सामने आ रहे हैं, जिससे महामारी के फिर से गंभीर रूप लेने की आशंका पैदा हो गई है।

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ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहचान सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी यह मालूम नहीं है कि इसकी उत्पत्ति वहीं हुई या किसी संक्रमित व्यक्ति के जरिए यह वहां तक पहुंचा। लेकिन इसकी पहचान के बाद यूरोप, एशिया, और उत्तर अमेरिका तक में इससे संक्रमित मरीजों की पहचान हो चुकी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन जगहों पर टीकाकरण की दर कम है, वहां ऐसे वैरिएंट के म्यूटेट होने और उनसे संक्रमण फैलने की आशंका ज्यादा है।

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टीकाकरण की धीमी दर है जिम्मेदार

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथम्पटन में ग्लोबल हेल्थ विभाग में रिसर्च फेलॉ माइकल हीड ने कहा है कि नए वैरिएंट की उत्पत्ति दुनिया में टीकाकरण की धीमी दर का स्वाभाविक परिणाम है। उन्होंने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘सहारा अफ्रीका जैसे इलाकों में आज भी बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें टीका नहीं लगा है। ऐसे स्थानों पर महामारी के फिर से बड़े पैमाने पर फैलने की स्थितियां बनी हुई हैं।’

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ओमिक्रॉन वैरिएंट के सामने आने के बाद कई देशों ने अपने यहां यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। खास कर अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों पर रोक लगा दी गई है। लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य के विशेषज्ञों ने कहा है कि जो स्थिति बनी है, उसके लिए धनी देश जिम्मेदार हैं। उनकी वजह से ही धनी और विकासशील देशों की टीकाकरण दर में बड़ा फासला मौजूद रहा है।

स्वास्थ्य संबंधी रिसर्च करने वाली स्वयंसेवी संस्था वेलकम के निदेशक जेरेमी फेरर के मुताबिक नए वैरिएंट ने यही बताया है कि वैक्सीन और दूसरी स्वास्थ्य सुविधाओं के दुनिया भर में समान वितरण की जरूरत है। उन्होंने एक ट्विट में कहा- ‘अगर हमें याद दिलाने की जरूरत थी, तो नए वैरिएंट ने ये याद दिला दी है कि महामारी खत्म नहीं हुई है। महामारी जारी रहने की वजह है वैक्सीन उपलब्धता में गैर-बराबरी।’

जिन देशों पर लगे वहां टीकाकरण की दर कम

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक निम्न आय वर्ग वाले देशों में अभी आबादी के सिर्फ 7.5 फीसदी लोगों को ही कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक डोज लगी है। ओमिक्रॉन वैरिएंट की पहचान के बाद जिन आठ अफ्रीकी देशों पर धनी देशों ने यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं, वहां टीकाकरण की दर बहुत कम है। माली में ये दर सिर्फ 5.6 फीसदी है। इसके विपरीत धनी देशों में 63.9 फीसदी लोगों का टीकाकरण हो गया है। यूरोपियन यूनियन और अमेरिका में तकरीबन 70 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी हैं।



माइकल हीड ने कहा- ‘धनी देश जितनी उन्हें जरूरत है, उससे कहीं ज्यादा वैक्सीन की जमाखोरी कर रहे हैँ। (दुनिया भर में वैक्सीन वितरण के लिए बनी एजेंसी) कोवाक्स को जितने वैक्सीन डोज देने का उन्होंने वादा किया था, उसे उन्होंने पूरा नहीं किया है। यह नए वैरिएंट की उत्पत्ति में उनका योगदान है।’

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