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COP28: 'ऊर्जा परिवर्तन दृष्टिकोण के लिए भारत की प्रशंसा', मनोनीत अध्यक्ष डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने कही यह बात
Sun, 12 Nov 2023 10:53 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sun, 12 Nov 2023 10:53 PM IST
सार
सीओपी28 के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने कहा, ऊर्जा परिवर्तन दृष्टिकोण पर भारत की नीतियां सराहनीय हैं। उन्होंने 30 नवंबर से शुरू होने वाले सीओपी28 से पहले कहा, "100 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिज्ञा जैसे अधूरे वादों को पूरा किया जाना चाहिए।"
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सीओपी28 के मनोनीत अध्यक्ष डॉ जाबेर ने जलवायु परिवर्तन पर जताई चिंता
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पर्यावरण परिवर्तन के मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के मंच से सीओपी28 जैसी विशेष पहल की गई। सीओपी28 यानी संयुक्त राष्ट्र के 28वें कॉन्फ्रेंस का आयोजन एक्सपो सिटी दुबई में हो रहा है। 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम से पहले सीओपी28 के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने भारत की सराहना की है। उन्होंने ऊर्जा परिवर्तन दृष्टिकोण को लेकर देश की नीतियों की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने वित्तीय पहलू पर "नए प्रतिमान" की महत्वपूर्ण जरूरत को भी स्वीकार किया।
अबू धाबी में आयोजित 'फ्रॉम जी20 टू सीओपी28' टाइटल वाले विशेष मंच पर अल जाबेर ने कहा, यूएई और भारत ने "स्थायी सामाजिक-आर्थिक विकास के अनुरूप साझा दृष्टिकोण अपनाया है।" रविवार को जाबेर ने कहा, जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को देखते हुए वैश्विक प्रयास की जरूरत है। मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें दक्षिण का प्रत्येक देश कम से कम कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित कर सके।
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के तत्वावधान में सीओपी28 का आयोजन होता है। इसे वार्षिक जलवायु परिवर्तन वार्ता और कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी) कहा जाता है। इस अहम आयोजन से पहले COP28 के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने कहा, नवीकरणीय ऊर्जा पर संयुक्त फोकस, भविष्य के लिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं को विकसित करने का एक बड़ा अवसर है। डॉ. जाबेर ने कहा, यूएई नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी है। दुनिया की कुछ सबसे बड़ी सौर परियोजनाएं यहां से जुड़ी हैं। सबसे बड़ी वैश्विक परियोजनाओं में से एक क्षेत्र में यूएई निवेशक भी है।
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अल जाबेर ने जी20 दिल्ली घोषणा को पूरा करने और मुख्य जलवायु कार्यों पर उल्लेखनीय प्रगति के लिए भारत के नेतृत्व को धन्यवाद दिया। उन्होंने वैश्विक समझौता करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को विशेष रूप से धन्यवाद दिया। भारत सरकार के सहयोग और बहुपक्षवाद के मजबूत दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए डॉ जाबेर ने कहा कि सीओपी प्रेसीडेंसी इसका अनुकरण करने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा, COP28 जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई के लिए अवसर तैयार करेगा। इसका लक्ष्य "शमन, अनुकूलन और कार्यान्वयन के साधनों के माध्यम से महत्वाकांक्षी और संतुलित परिणाम" हासिल करना होगा।
अल जाबेर ने बहुपक्षवाद के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने सीओपी28 में शिरकत करने वाले प्रतिनिधियों को याद दिलाया कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में, वैश्विक अर्थव्यवस्था के 85 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाले देश 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने पर सहमत हुए हैं। डॉ जाबेर ने कहा कि सभी देश ऊर्जा दक्षता को दोगुना करने के COP28 के वैश्विक लक्ष्य पर भी सहमत हुए हैं।
उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि उन्हें उत्तर और दक्षिण के बीच "विश्वास पुनर्निर्माण" के साथ शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने "निष्पक्ष और समावेशी वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन" सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से जलवायु वित्त में बदलाव का भी आह्वान किया। अल जाबेर ने कहा, "100 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिज्ञा जैसे अधूरे वादों को पूरा किया जाना चाहिए। हरित जलवायु निधि को पूरी तरह से फिर से भरा जाना चाहिए। अनुकूलन वित्त को दोगुना किया जाना चाहिए। नुकसान की भरपाई के लिए बनाई गई निधि को COP28 में पूरी तरह से चालू किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि "व्यापक जलवायु वित्त परिदृश्य (climate finance landscape) को बदलना होगा। पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (आईएफआई) और बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) को तत्काल अपने अधिदेशों को दोबारा तैयार करने की जरूरत है।" जलवायु के मुद्दों पर अधिक पूंजी निवेश, कार्बन उत्सर्जन पर नकेल के लिए स्मार्ट नीतियों और अभिनव मॉडल की जरूरत पर जोर देते हुए जाबेर ने कहा, उत्तर में जो स्वच्छ प्रौद्योगिकियां विकसित हो रही हैं, वे पूरी वैश्विक दक्षिण में सुलभ और सस्ती होनी चाहिए।
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अबू धाबी में आयोजित 'फ्रॉम जी20 टू सीओपी28' टाइटल वाले विशेष मंच पर अल जाबेर ने कहा, यूएई और भारत ने "स्थायी सामाजिक-आर्थिक विकास के अनुरूप साझा दृष्टिकोण अपनाया है।" रविवार को जाबेर ने कहा, जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को देखते हुए वैश्विक प्रयास की जरूरत है। मॉडल ऐसा होना चाहिए जिसमें दक्षिण का प्रत्येक देश कम से कम कार्बन उत्सर्जन सुनिश्चित कर सके।
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बता दें कि संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) के तत्वावधान में सीओपी28 का आयोजन होता है। इसे वार्षिक जलवायु परिवर्तन वार्ता और कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (सीओपी) कहा जाता है। इस अहम आयोजन से पहले COP28 के मनोनीत अध्यक्ष डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने कहा, नवीकरणीय ऊर्जा पर संयुक्त फोकस, भविष्य के लिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं को विकसित करने का एक बड़ा अवसर है। डॉ. जाबेर ने कहा, यूएई नवीकरणीय ऊर्जा में अग्रणी है। दुनिया की कुछ सबसे बड़ी सौर परियोजनाएं यहां से जुड़ी हैं। सबसे बड़ी वैश्विक परियोजनाओं में से एक क्षेत्र में यूएई निवेशक भी है।
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अल जाबेर ने जी20 दिल्ली घोषणा को पूरा करने और मुख्य जलवायु कार्यों पर उल्लेखनीय प्रगति के लिए भारत के नेतृत्व को धन्यवाद दिया। उन्होंने वैश्विक समझौता करने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को विशेष रूप से धन्यवाद दिया। भारत सरकार के सहयोग और बहुपक्षवाद के मजबूत दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए डॉ जाबेर ने कहा कि सीओपी प्रेसीडेंसी इसका अनुकरण करने का प्रयास करेगा।
उन्होंने कहा, COP28 जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई के लिए अवसर तैयार करेगा। इसका लक्ष्य "शमन, अनुकूलन और कार्यान्वयन के साधनों के माध्यम से महत्वाकांक्षी और संतुलित परिणाम" हासिल करना होगा।
अल जाबेर ने बहुपक्षवाद के प्रति प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने सीओपी28 में शिरकत करने वाले प्रतिनिधियों को याद दिलाया कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में, वैश्विक अर्थव्यवस्था के 85 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करने वाले देश 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने पर सहमत हुए हैं। डॉ जाबेर ने कहा कि सभी देश ऊर्जा दक्षता को दोगुना करने के COP28 के वैश्विक लक्ष्य पर भी सहमत हुए हैं।
उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि उन्हें उत्तर और दक्षिण के बीच "विश्वास पुनर्निर्माण" के साथ शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने "निष्पक्ष और समावेशी वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन" सुनिश्चित करने के लिए नए सिरे से जलवायु वित्त में बदलाव का भी आह्वान किया। अल जाबेर ने कहा, "100 अरब अमेरिकी डॉलर की प्रतिज्ञा जैसे अधूरे वादों को पूरा किया जाना चाहिए। हरित जलवायु निधि को पूरी तरह से फिर से भरा जाना चाहिए। अनुकूलन वित्त को दोगुना किया जाना चाहिए। नुकसान की भरपाई के लिए बनाई गई निधि को COP28 में पूरी तरह से चालू किया जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि "व्यापक जलवायु वित्त परिदृश्य (climate finance landscape) को बदलना होगा। पर्यावरण और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (आईएफआई) और बहुपक्षीय विकास बैंकों (एमडीबी) को तत्काल अपने अधिदेशों को दोबारा तैयार करने की जरूरत है।" जलवायु के मुद्दों पर अधिक पूंजी निवेश, कार्बन उत्सर्जन पर नकेल के लिए स्मार्ट नीतियों और अभिनव मॉडल की जरूरत पर जोर देते हुए जाबेर ने कहा, उत्तर में जो स्वच्छ प्रौद्योगिकियां विकसित हो रही हैं, वे पूरी वैश्विक दक्षिण में सुलभ और सस्ती होनी चाहिए।