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UN: इस्राइल-हमास युद्ध के चलते बढ़ा मानवीय संकट, संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जताई चिंता, शांति पर दिया जोर

Thu, 18 Jul 2024 08:08 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यूएन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, यूएन Published by: बशु जैन Updated Thu, 18 Jul 2024 08:08 PM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की डिबेट में भारत की ओर से उपस्थायी प्रतिनिधि और राजदूत आर रवींद्र ने कहा कि पिछले साल सात अक्तूबर को इस्राइल पर हुए आतंकी हमलों की भारत ने कड़ी निंदा की थी। उन्होंने कहा कि इस्राइल-हमास के बीच नौ महीने से चल रहे युद्ध के चलते मानवीय संकट बढ़ रहा है।

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Continuing humanitarian crisis due to Israel-Hamas conflict india in UN
संयुक्त राष्ट्र की बैठक में भाग लेते राजदूत आर रवींद्र - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल-हमास युद्ध के चलते बढ़ रहे मानवीय संकट पर गहरी चिंता जताई है। भारत ने कूटनीति और बातचीत के जरिये दोनों देशों के बीच उपजे तनाव को कम करने और शांति अपनाने पर जोर दिया। मध्य पूर्व क्षेत्र में हुई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की डिबेट में भारत की ओर से उपस्थायी प्रतिनिधि और राजदूत आर रवींद्र ने कहा कि पिछले साल सात अक्तूबर को इस्राइल पर हुए आतंकी हमलों की भारत ने कड़ी निंदा की थी। 

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उन्होंने कहा कि इस्राइल-हमास के बीच नौ महीने से चल रहे युद्ध के चलते मानवीय संकट बढ़ रहा है। यह चिंताजनक है। इस युद्ध में सैकड़ों नागरिकों की मौत की हम निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने तत्काल संपूर्ण युद्ध विराम का आह्वान किया है। साथ ही गाजा पट्टी में समय-समय पर सुरक्षित मानवीय सहायता और मदद पहुंचाई। उन्होंने बंधक बनाए गए सभी लोगों की तत्काल बिना शर्त रिहाई करने की अपील भी की। रवींद्र ने कहा कि ऐसे मामले में कतर और मिस्र की सराहना करते हैं। 
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उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि भारत इस्राइल और फलस्तीन दोनों की मदद कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने कई बार अलग-अलग मंचों पर अपनी स्थिति साझा की। जिसके तहत भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि भारत का लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच सहयोग के जरिए समाधान का रास्ता निकालने की बात कहता रहा है। इसके तहत सहमत सीमाओं के भीतर फलस्तीन में एक संप्रभु, स्वतंत्र राज्य की स्थापना हो। ताकि वह इस्राइल के साथ शांति से सीमाएं और सुरक्षा आवश्यकता साझा कर सके। 
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उन्होंने कहा कि भारत ने बीते सालों में फलस्तीन की सहायता के लिए 120 मिलियन अमेरिकी डालर दिए हैं। जिसमें फलस्तीन शरणार्थियों के लिए संचालित संयुक्त राष्ट्र राहत-कार्य एजेंसी को दी गई 35 मिलियन डॉलर की मदद शामिल है। 

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