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Congo: कांगो के इस प्रांत में मिला इबोला के नए संक्रमण का मामला, डब्ल्यूएचओ ने आरआरटी टीम के साथ भेजे विशेषज्ञ

Thu, 04 Sep 2025 10:51 PM IST
दीपक कुमार शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, डकार (सेनेगल)
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, डकार (सेनेगल) Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 04 Sep 2025 10:51 PM IST
सार

मध्य अफ्रीकी देश कांगो के दक्षिणी प्रांत कासाई में इबोला वायरस का पहला मामला सामने आया है। इसके बाद, स्वास्थ्य मंत्रालय ने नए प्रकोप की घोषणा की है। वहीं, डब्ल्यूएचओ ने कांगो की आरआरटी के साथ अपने विशेषज्ञों को कासाई प्रांत भेजा है। 

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Congo health ministry declares new Ebola outbreak
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को इबोला के नए प्रकोप की घोषणा की है। यह मध्य अफ्रीकी देश में 16वां प्रकोप है। पहला मामला दक्षिणी प्रांत कासाई में सामने आया है, जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कांगो की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (आरआरटी) के साथ अपने विशेषज्ञों को कासाई प्रांत भेजा है। 

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कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल-रोजर काम्बा ने बताया कि अब तक की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, 28 संदिग्ध मामले और 15 मौतें हुई हैं। इनमें से 14 मौतें बौलापे और एक म्वेका में हुई हुई हैं। उन्होंने बताया कि चार स्वास्थ्यकर्मी भी प्रभावित हुए हैं। 
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बौलापे की रहने वाली गर्वभती महिला का है पहला मामला
स्वाथ्य मंत्री काम्बा ने कहा कि मौत की दर (केस फेटैलिटी रेट) लगभग 53.6% है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। मंत्री ने यह भी बताया कि आंकड़े फिलहाल अस्थायी हैं और शोध जारी है। मरीजों में बुखार, उल्टी, दस्त और खून बहने जैसे लक्षण पाए गए हैं। पुष्टि किया गया पहला मामला बौलापे की रहने वाली 34 वर्षीय गर्भवती महिला का है। 


कांगो के पास पहले से ही इबोला वैक्सीन का भंडार मौजूद
डब्ल्यूएचओ ने बताया कि उसने अपने विशेषज्ञों को कांगो की त्वरित प्रतिक्रिया टीम के साथ कासाई प्रांत भेजा है, ताकि निगरानी, इलाज और संक्रमण की रोकथाम को मजबूत किया जा सके। साथ ही वहां सुरक्षा उपकरण, मोबाइल लैब और दवाइयां भी भेजी जा रही हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि कांगो के पास पहले से ही इबोला के इलाज और एर्वेबो इबोला वैक्सीन का भंडार मौजूद है। 

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वायरस के फैलाव को रोकने के लिए तत्परता से कर रहे काम: जनाबी
अफ्रीका के लिए डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मोहम्मद जनाबी ने कहा, 'हम पूरी तत्परता से काम कर रहे हैं ताकि वायरस के फैलाव को जल्दी रोका जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।' इबोला वायरस बेहद संक्रामक है और यह उल्टी, खून या वीर्य जैसे शारीरिक तरल पदार्थों से फैल सकता है। यह बीमारी दुर्लभ है, लेकिन गंभीर और अक्सर जानलेवा साबित होती है।

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