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कोरोना के नए रूप के साथ मानसिक रोग 'कोविड साइकोसिस' की पुष्टि
Wed, 30 Dec 2020 07:22 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 30 Dec 2020 07:22 AM IST
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Mental Disease - सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Pexels
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भारत समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना का नया रूप मिल चुका है। इसी बीच कोरोना संक्रमित में बेहद ही गंभीर मानसिकता रोग (कोविड साइकोसिस) का पता चला है। अमेरिका और ब्रिटेन समेत दुनिया के कई देशों में साइकोटिक लक्षण वाले मरीज मिले हैं।
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ऐसे मरीजों को अचानक सुनाई देता है कि उन्हें खुद को मारना है, तो कभी अपने बच्चों को मारने के लिए कोई कहता हुआ सुनाई देता है। अमेरिका के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हिसाम विली का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बाद ऐसे मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
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उनका कहना है- हैरानी की बात यह है कि अब तक मेरे पास जितने भी मरीज आए हैं उनमें से किसी को पहले से कोई मानसिक स्वास्थ्य संबंधी तकलीफ नहीं थी।
ब्रिटेन में हुए एक अध्ययन से पता चला है कि कोरोना के 153 मरीजों में से 10 मरीजों में नए तरह के साइकोसिस की शुरुआत देखी गई है।
मानसिक और मस्तिष्क रोग विशेषज्ञ अब यह जरूर कहने लगे हैं कि कोरोना शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक और मस्तिष्क के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। इससे कोरोना के गंभीर मरीजों में बड़बड़ाने या भूलने जैसी तकलीफों की पुष्टि हो चुकी थी। इसकी तुलना में यह तकलीफ और अधिक गंभीर है।
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बेहद गंभीर मानसिक तकलीफ
डॉक्टर विली बताते हैं कि उन्होंने जिन मरीजों का इलाज उनको सिर में दर्द, हाथ में कंपन, चक्कर और स्वाद लेने की क्षमता प्रभावित थी। जो न्यूरो संबंधी तकलीफ है। ऐसे मरीजों में मनोविकृति की तकलीफ दो सप्ताह या महीनों बाद विकसित होना शुरू हुई जो बेहद ही गंभीर है और उनके आसपास रहने वाले लोगों के लिए डरावना।
मस्तिष्क तक खराब तत्व पहुंचने से ऐसा संभव
कोरोना मरीजों में मस्तिष्क संबंधी तकलीफ होने के कई कारण हो सकते हैं। ऐसा रक्त वाहिकाओं में संकुचन और सूजन की तकलीफ ज्यादा होने से हो सकता है। कुछ विशेष तरह के न्यूरोटॉक्सिन्स (खराब तत्व) मस्तिष्क तक रक्त के जरिए पहुंच कर भी ऐसी तकलीफ को जन्म दे सकते हैं।
पहला केस
न्यूयॉर्क की 42 वर्षीय महिला में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। महिला को अचानक से गंभीर मानसिक तकलीफ शुरू हो गई जबकि इससे पहले उसे कोई तकलीफ नहीं थी। डॉक्टरों को उसने बताया कि कोई उसके 2 और 10 साल के बच्चे को मारना चाहता है। इस कारण वह खुद भी मरने की योजना बना रही है।
दूसरा केस
न्यूयॉर्क के 30 वर्षीय एक कंस्ट्रक्शन कामगार को कोरोना संक्रमण के बाद भ्रम हो गया कि उसके चचेरे भाई उसकी हत्या कर देंगे। मरीज ने डॉक्टरों को बताया कि वह चचेरे भाई से बचने के लिए बिस्तर पर उसका गला दबा सकता है। पहले केस की तरह ही इस मरीज को भी संक्रमण से पहले कोई मानसिक बीमारी नहीं थी।