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नेपालः पदों की खींचतान के बीच राष्ट्रीय अधिवेशन में कैसा इतिहास बनाएंगे माओवादी?

Mon, 27 Dec 2021 05:17 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र डिजिटल ब्यूरो
डिजिटल ब्यूरो Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 27 Dec 2021 05:17 PM IST
सार

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी-सेंटर) ने अपने संविधान में संशोधन का एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एक महासचिव की नियुक्ति का प्रावधान है। इसके अलावा 15 पदाधिकारियों के नाम भी प्रस्तावित किए गए हैं। 

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Communist Party of Nepal CPN Maoist Centre General Convention to elect new Central Committee know whats at stake for Party news and updates
नेपाल का झंडा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और नेपाली कांग्रेस के बाद अब नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (माओइस्ट सेंटर) का राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू हो गया है। नेपाली मीडिया में माओइस्ट सेंटर का यह सम्मेलन काफी चर्चा में ही है। दरअसल, पार्टी ने पहले अपनी इस बैठक को ‘प्रथम ऐतिहासिक राष्ट्रीय सम्मेलन’ कहा था। उसके नेताओं ने तब कहा था कि इस बैठक में संगठनिक मामलों पर कम, और वैचारिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर अधिक चर्चा होगी। लेकिन रविवार को जब अधिवेशन शुरू हुआ, तो पार्टी ने सम्मेलन का नाम बदल कर ‘आठवां राष्ट्रीय अधिवेशन’ कर दिया। 
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उधर इसकी कार्यवाही पर संगठन के मसले हावी हो गए। सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले पार्टी ने 15 पदाधिकारियों के नाम प्रस्तावित कर दिए। अब ये साफ है कि तीन दशकों से माओवादी गुट के प्रमुख रहे पुष्प कमल दहल एक बार फिर से अगले पांच साल के लिए पार्टी के अध्यक्ष चुने जाएंगे। अब पार्टी ने अपने संविधान में संशोधन का एक प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत एक वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एक महासचिव की नियुक्ति होगी।
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माओइस्ट सेंटर के नेताओं ने दावा किया है कि इस अधिवेशन से पार्टी में एक ‘नई क्रांतिकारी सोच’ विकसित होगी, जिससे ‘क्रांतिकारी पार्टी’ का निर्माण होगा। लेकिन ज्यादातर पार्टी कार्यकर्ताओं को सचमुच ऐसा होने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि पार्टी में पद के लिए खींचतान मची। इसीलिए सिर्फ कुछ नेताओं को जगह देने के लिए नए पद सृजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
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पार्टी की सेंट्रल कमेटी के सदस्य लेखनाथ निउपाने ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘पिछले अधिवेशन के बाद से पार्टी में जब थोड़ा भी बदलाव नहीं आया है, तो अब हम किस तरह के परिवर्तन की आशा कर सकते हैँ। जब तक किसी नीति का व्यावहारिक रूप से अमल नहीं होता, बाकी तमाम बातें फर्जी हैं।’ निउपाने माओइस्ट सेंटर के उन नेताओं में रहे हैं, जो पार्टी नेतृत्व की तड़क-भड़क वाली जीवन शैली और उनके आचरण पर सवाल उठाते रहे हैँ। 

माओइस्ट सेंटर का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन 2013 में हुआ था। तब पार्टी नेताओं ने ये शपथ ली थी कि वे अपनी कार्य शैली, जीवन शैली और आचरण में बदलाव लाएंगे और वैचारिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। तब पार्टी ने ‘समाजवाद की नींव डालने के लिए पूंजीवादी क्रांति की शुरुआत करने’ की टैक्टिकल लाइन तय की थी। निउपाने ने कहा कि वह संकल्प एक धोखा साबित हुआ। पार्टी नेताओं ने अपनी शपथ का पालन करने की कोशिश नहीं की।


पर्यवेक्षकों के मुताबिक संभावना है कि मौजूदा अधिवेशन में पार्टी आठ साल पहले तय की गई अपनी टैक्टिकल लाइन को ही दोहराएगी। इस बीच सम्मेलन से पहले अखबार कांतिपुर खबर को दिए एक इंटरव्यू में दहल ने यह स्वीकार किया कि पार्टी वैचारिक मुद्दों को उतना आगे नहीं बढ़ा पाई है, जितना इसे करना चाहिए था। रविवार को अधिवेशन में उद्घाटन भाषण देते हुए भी उन्होंने पार्टी में आत्म-निरीक्षण की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- ‘हमें इस बात का जायजा लेने की जरूरत है कि हमने कहां गलती की। हमें अवश्य ही आत्म-आलोचना करना चाहिए और इसकी शुरुआत मुझसे ही होनी चाहिए।’
 
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