फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Climate Change: soil magic helps in constructing low-carbon buildings know everything about it

Climate Change: मिट्टी के 'जादू' से निम्न-कार्बन इमारतों के निर्माण में मदद, जानिए इसके बारे में सब कुछ

Thu, 07 Mar 2024 10:22 AM IST
श्वेता महतो यूएन हिंदी समाचार
यूएन हिंदी समाचार Published by: श्वेता महतो Updated Thu, 07 Mar 2024 10:22 AM IST
सार

रोजी और श्रीदेवी जैसे आर्किटेक्ट टिकाऊ संरचनाओं का निर्माण करने के लिए कच्ची मिट्टी से घर बनाने की परम्परा को पुनर्जीवित कर रहे हैं। मिट्टी से बनी इमारतें, अचानक आई बाढ़ और तीव्र गर्मी जैसी चरम मौसम की घटनाओं का भी मजबूती से सामना कर सकती हैं।

विज्ञापन
Climate Change: soil magic helps in constructing low-carbon buildings know everything about it
‘मेसंस इंक’ फर्म और महिला राजमिस्त्रियों की एक टीम - फोटो : Social Media

विस्तार

बंगलूरू शहर में स्थित वास्तुकला कम्पनी ‘मेसंस इंक’ की सह-संस्थापक रोजी पॉल ने  जलवायु परिवर्तन को लेकर अपना विजन साझा किया है। उनका कहना है कि ज्यादातर वास्तुकार जलवायु परिवर्तन के बारे में सोचना जरूरी नहीं समझते, लेकिन हम इस सोच में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। हमें यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन, सीधे आपके घर की इमारतों पर असर करता है। इसलिए इस पहलू को ध्यान में रखकर ही निर्माण जरूरी है।

विज्ञापन


रोजी और श्रीदेवी चंगाली मिट्टी के टिकाऊ गुणों पर आधारित निर्माण की भारत की प्राचीन विरासत को संरक्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। दोनों 16 साल से घनिष्ट मित्र हैं। मिट्टी के ये गुण, उच्च-कार्बन निर्माण की आधुनिक समस्या से निपटने के लिए आदर्श हैं। 
विज्ञापन


नमी सोखने की क्षमता
मिट्टी का जादू? इसकी हवा की आवाजाही की क्षमता से घर में आर्द्रता बनी रहती है। घर की वायु गुणवत्ता में सुधार होता है और सीमेंट की बनी दीवारों के विपरीत यह नमी व फफूंदी को पनपने नहीं देती। मिट्टी की दीवारों का उच्च तापीय द्रव्यमान (high thermal mass) होता है यानि वे धीरे-धीरे सौर विकिरण से गर्मी को अवशोषित करके, संग्रहीत करती हैं और फिर इसे रात में तापमान ठंडा होने पर छोड़ती हैं। इससे एयर कंडीशनिंग इकाइयों की कम जरूरत पड़ती है, जो न केवल बड़ी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं, बल्कि इनमें मौजूद शीतलन तत्व शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


परिवहन लागत व कार्बन पदचिह्न की समस्या खत्म होगी
चूंकि मिट्टी आसानी से उपलब्ध है, इसलिए इससे परिवहन लागत व कार्बन पदचिह्न की समस्या भी खत्म हो जाती है। श्रीदेवी बताती हैं कि इसका विनिर्माण और प्रसंस्करण स्थानीय समुदाय करता है। मतलब यह कि इसे अपनाकर आप बड़े विनिर्माण संयंत्रों तथा कम्पनियों के बजाय स्थानीय लोगों की आजीविकाएं लौटा रहे हैं।

क्या इसका समाधान मिट्टी हो सकता है? 
रोजी और श्रीदेवी जैसे आर्किटेक्ट टिकाऊ संरचनाओं का निर्माण करने के लिए कच्ची मिट्टी से घर बनाने की परम्परा को पुनर्जीवित कर रहे हैं। मिट्टी से बनी इमारतें, अचानक आई बाढ़ और तीव्र गर्मी जैसी चरम मौसम की घटनाओं का भी मजबूती से सामना कर सकती हैं।

महिला मजबूती के प्रयास
यही नहीं, वो अधिक से अधिक महिलाओं को वास्तुकला की पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रेरित कर रही हैं और अपने कार्य क्षेत्र में महिलाओं को पत्थर चिनाई जैसे कौशल में प्रशिक्षित कर रही हैं। रोजी कहती हैं कि मुझे लगता है कि जैसे ही आप लैंगिक मुद्दों के बारे में बात करना शुरू करते हैं तो वो अपने-आप पुरुष बनाम महिला हो जाता है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। हम केवल यह कह रहे हैं कि, ऐसे मुद्दे हैं जो हम पेशे में महसूस कर रहे हैं और हमें इसे बदलने के लिए समर्थन की आवश्यकता है।

उनके शुरुआती समर्थकों में उनके ग्राहक थॉमस पय्यापिल्ली हैं, जिनके मिट्टी के घर के निर्माण में ‘मेसन इंक’ ने न्यूनतम अपशिष्ट का इस्तेमाल किया था। उन्होंने बताया कि इसके निर्माण में दो कारक विशेष हैं- न्यूनतम सम्भव लागत और पर्यावरण पर सबसे कम प्रभाव। उनका यह मैदान अब यह पूरी तरह से प्रमाणित जैविक स्थल है।

उनकी एक अन्य ग्राहक हैं सिंधूर पंगल, जिनका मिट्टी का घर उनके असंतुष्ट शहरी अस्तित्व से प्रस्थान का प्रतीक है। उनका कहना है कि बहुत से लोगों की ही तरह मैंने भी कॉर्पोरेट जगत में अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन कुछ समय बाद, उस तरह के जीवन से मेरा मोहभंग हो गया था। वो ग्रामीण इलाकों में जाकर कुछ ऐसा करने की कोशिश कर ही रही थीं कि उनके पति उत्तम की अचानक मृत्यु हो गई जिससे उनके जीवन ने दुखद मोड़ ले लिया। जब मैंने मेसंस इंक से बात की, तो मेरे लिए यह महत्वपूर्ण था कि वो मेरे पति उत्तम को भी जानते थे। उन्होंने मेरी यात्रा को समझा। उन्होंने समझा कि मैं क्या करना चाह रही हूं और इस तरह यह सब बन गया। ‘मेसंस इंक’ और सिंधूर ने यह घर बनाने के लिए राजमिस्त्रियों की एक महिला टीम के साथ काम किया। 

रोजी और श्रीदेवी का मानना है कि जब बात जलवायु संकट की हो तो हम सभी बड़े बदलाव लाने में योगदान दे सकते हैं। महिलाओं के लिए, आप जहां भी हों, आपका पेशा जो भी हो, कोई फर्क नहीं पड़ता, अगर आप घर पर ही रहती हों तो मुझे लगता है कि जलवायु कार्रवाई के पूरे मामले में जिम्मेदारी से हम में से प्रत्येक को अपना छोटा सा योगदान देना चाहिए और मैं अगली बार यहां अधिक महिलाओं को देखना चाहूंगी और हर एक जगह अधिक महिला आर्किटेक्ट और ज्यादा महिलाएं। भविष्य स्त्रियों का है।


भवन एवं जलवायु सम्बन्धी वैश्विक मंच
पेरिस में 7-8 मार्च 2024 को Buildings and Climate Global Forum आयोजित किया गया है, जिसमें रोजी और श्रीदेवी समेत लगभग 800 लोग शिरकत करेंगे। इस मंच को फ्रांस और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) ने भवन एवं निर्माण के लिए वैश्विक गठबंधन की मदद से सह-संगठित किया है। इसमें देशों के मंत्री तथा प्रमुख संगठनों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधि एकत्रित होकर संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP28 के बाद सहनसक्षम व कार्बनमुक्त इमारतों के निर्माण के लिए, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को एक नई गति देने के प्रयास करेंगे।

(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed