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कोरोना पर चीन बेनकाब, उसी के वैज्ञानिक का खुलासा- देश की सरकारी लैब में बनाया गया वायरस

Mon, 14 Sep 2020 11:11 AM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: अनवर अंसारी Updated Mon, 14 Sep 2020 11:11 AM IST
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Chinese virologist Dr Li-Meng Yan says Covid-19 made in Wuhan lab controlled by China govt
चीनी वायरोलॉजिस्ट डॉ ली-मेंग - फोटो : youtube/Loose Women

कोरोना वायरस महामारी को लेकर चीन पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने इसकी जानकारी को दुनिया से छिपाया है। वहीं, एक बार फिर कोरोना को लेकर चीन का असली चेहरा दुनिया के सामने आया है। चीनी वायरोलॉजिस्ट डॉ ली-मेंग ने दावा किया है कि कोरोना वायरस को एक सरकार के नियंत्रण वाले प्रयोगशाला में तैयार किया गया था और उनके पास अपने दावे को साबित करने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण हैं। 

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कोरोना से निपटने के लिए चीनी सरकार के खिलाफ व्हिसलब्लोअर बनने वाली वायरोलॉजिस्ट को पिछले साल दिसंबर में चीन से निकलने वाले सार्स (कोरोना जैसा वायरस) जैसे मामलों के एक समूह को देखने का काम सौंपा गया था। 
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हांगकांग में काम करने वाली शीर्ष वैज्ञानिक ने दावा किया कि उन्होंने अपनी जांच के दौरान एक कवर-अप ऑपरेशन का पता लगाया और कहा कि चीन की सरकार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से पहले ही वायरस के प्रसार की जानकारी थी। 
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यह भी पढ़ें: वायरस फैलाने के आरोपों पर चीन की सफाई, जिनपिंग ने कहा- हमने कोरोना पर पारदर्शी रूप से काम किया

'हांगकांग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ' से वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी में विशेषज्ञता प्राप्त डॉ ली-मेंग को कथित रूप से सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिका भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। 11 सितंबर को, उन्होंने एक गुप्त जगह से ब्रिटिश टॉक शो 'लूज वीमेन' को एक साक्षात्कार दिया और कोरोना वायरस बीमारी पर अपने शोध और चुनौतियों के बारे में बात की। 

डॉ ली-मेंग ने कहा कि उन्होंने दिसंबर के अंत और जनवरी के शुरू में चीन में 'न्यू निमोनिया' पर दो शोध किए और अपने सुपरवाइजर के साथ परिणाम साझा किए जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सलाहकार थे। 


वह अपने सुपरवाइजर से चीनी सरकार और डब्ल्यूएचओ की ओर से सही काम करने की उम्मीद कर रही थीं। लेकिन उन्हें तब बेहद आश्चर्य हुआ, जब उनसे चुप्पी बनाए रखने के लिए कहा गया और ऐसा नहीं करने पर उन्हें गायब कर दिए जाने की धमकी दी गई। वायरोलॉजिस्ट ने कहा कि चीन में वैज्ञानिकों को गायब कर देना आम बात है। 

डॉ ली-मेंग ने कहा कि इस पर किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी। लोग सरकार से डर रहे थे। वे इस झंझट से बचने और अधिक लाभ प्राप्त करने के लिए सरकार और डब्ल्यूएचओ के साथ सहयोग करने की प्रतीक्षा कर रहे थे लेकिन इसकी जानकारी बेहद जरूरी थी। 

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