South China Sea: चीनी थिंकटैंक की रिपोर्ट, दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन पर ‘अधिकतम दबाव’ डाल रहा है अमेरिका
South China Sea: रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने पिछले साल दक्षिण चीन सागर में 102 बड़े सैनिक अभ्यास किए। इनके अलावा उसने छोटे-मोटे हजारों अभ्यास किए। चीनी विश्लेषकों ने कहा है कि अमेरिका के ऐसे सैनिक अभ्यासों का मकसद दक्षिण चीन सागर में अपनी सैनिक उपस्थिति बढ़ाना और ताइवान जलडमरुमध्य क्षेत्र में हस्तक्षेप करना है...
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अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर में अपने लड़ाकू जहाजों की गतिविधियां बढ़ा दी हैं। यह चीन पर ‘अधिकतम दबाव’ डालने की उसकी रणनीति का हिस्सा है। यह बात बीजिंग स्थित थिंक टैंक साउथ चाइना स्ट्रेटेजिक प्रॉबिंग इनिशिएटिव (एससीएसपीआई) ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में कही है। थिंक टैंक ने कहा है कि अमेरिका के निशाने पर ताइवान जलडमरुमध्य है। उसने चेतावनी दी है कि अमेरिकी गतिविधियां बढ़ने से उस क्षेत्र की स्थिरता पर असर पड़ेगा।
एससीएसपीआई दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी गतिविधियों पर अपनी सालाना रिपोर्ट जारी करती है। ताजा रिपोर्ट में उसन कहा है कि पिछले साल ऐसी गतिविधियों पर मीडिया ने ज्यादा ध्यान दिया, जिससे उनको लेकर राजनीतिक चर्चा अधिक गर्म हो गई। रिपोर्ट में कहा गया है- पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) और अमेरिकी ने बार-बार ऐसी अटकलें लगाईं कि चीन की सेना अमेरिकी जहाजों को खतरनाक ढंग से रोकने की कोशिश और गैर-पेशेवर व्यवहार करेगी। इसके पीछे मकसद चीन पर कूटनीतिक और जनमत का दबाव डालना था।
अमेरिका दक्षिण चीन सागर में नियमित रूप से अपने जहाज भेज रहा है। इसे वह नौवहन स्वतंत्रता कहता है। अमेरिका का दावा है कि दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर चीन की नजर है। लेकिन अमेरिका उन्हें अपने और अपने साथी देशों के जहाजों के लिए खुला रखना चाहता है। चीन ने ऐसे अमेरिकी बयानों की लगातार निंदा की है।
पेंटागन ने दक्षिण चीन सागर में किए गए अपनी एक ऐसी कार्रवाई का जिक्र अपनी एक रिपोर्ट में किया था। उसने इसे चाइना मिलिट्री पॉवर रिपोर्ट नाम से प्रकाशित किया था। इसमें कहा गया था कि चीन ने सैनिक ताकत के जरिए जोर-जबर्दस्ती बढ़ा दी है। साथ ही उसने ताइवान पर कूटनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैनिक दबाव बढ़ा दिया है। इस रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चीन ने कहा था कि अमेरिका तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है, ताकि टकराव भड़काया जा सके।
अब जारी एससीएसपीआई की रिपोर्ट में उन अमेरिकी लड़ाकू जहाजों की पहचान बताई गई है, जिन्होंने ताइवान जलडमरूमध्य को पार किया। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका की ऐसी गतिविधियों के पीछे मकसद चीन पर ‘अधिकतम राजनीतिक और रणनीतिक दबाव डालना’ था।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने पिछले साल दक्षिण चीन सागर में 102 बड़े सैनिक अभ्यास किए। इनके अलावा उसने छोटे-मोटे हजारों अभ्यास किए। उदाहरण के तौर पर रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 28 अगस्त को क्रूजर यूएसएस एंटीएटम और क्रूजर यूएसएस चांसलरर्सविले ने उत्तर से दक्षिण की तरफ जाते हुए ताइवान डलमडरूमध्य को पार किया। दोनों लड़ाकू जहाजों ने मीडिया को संकेत भेजे, जिससे उनकी यात्रा बहुप्रचारित हो और उसको लेकर माहौल गरमाए।
चीनी विश्लेषकों ने कहा है कि अमेरिका के ऐसे सैनिक अभ्यासों का मकसद दक्षिण चीन सागर में अपनी सैनिक उपस्थिति बढ़ाना और ताइवान जलडमरुमध्य क्षेत्र में हस्तक्षेप करना है। एससीएसपीआई ने कहा है कि अब निकट भविष्य में ऐसी अमेरिकी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। अमेरिका ने ताइवान के पास फिलीपींस के एक द्वीप पर अड्डा बना रखा है। वहां से उसे अपनी नौसैनिक गतिविधियों को चलाने की सुविधा मिली हुई है।