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चरम पर तनाव: जानें किन वजहों से तल्ख होते चले गए चीन और अमेरिका के रिश्ते

Sat, 25 Jul 2020 03:46 PM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 25 Jul 2020 03:46 PM IST
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Chinese consulate shuts after four decades america chins relation covid 19 hong kong law trade war
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग (फाइल फोटो)

अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में स्थित चीनी वाणिज्य दूतावास को आधिकारिक तौर पर शनिवार को बंद कर दिया गया। चार दशक पहले खुले इस दूतावास को पहली बार इस तरह बंद करवाया गया है। अमेरिकी एजेंटों ने दूतावास के अंदर घुसकर इसे बंद कराया। कुछ दिन पहले ही अमेरिका ने ह्यूस्टन में चीनी दूतावास बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में जारी तल्खी और बढ़ गई है। तनातनी अब चरम पर है।  

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उधर, जैसे को तैसा वाला रुख अपनाते हुए चीन ने भी शुक्रवार को चेंगदू में स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश दिया। दूतावास को बंद करने का आदेश देते समय, चीन ने अमेरिका पर अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। वैसे दोनों देशों के बीच पहले से ही कई मु्द्दों को लेकर जुबानी जंग जारी है। ऐसे में हम आपको बताते हैं कि चीन-अमेरिका में तनाव के क्या-क्या कारण हैं।

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चीन-अमेरिका ट्रेड वॉर

अमेरिका और चीन के बीच छह जुलाई 2018 को ट्रेड वॉर की शुरुआत हुई थी। तब अमेरिका ने चीन से होने वाले 34 बिलियन डॉलर के आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया। इसके बाद अमेरिका और चीन ने एक-दूसरे पर कई आयात टैरिफ लगाने शुरू कर दिए। दोनों देशों के बीच आखिरकार दिसंबर 2019 में इसे लेकर सैद्धांतिक समझौता हुआ। इसे फेज वन ट्रेड डील कहा गया। 

इसपर दोनों देशों ने औपचारिक तौर पर 15 जनवरी, 2020 को हस्ताक्षर किए। इसे 15 फरवरी, 2020 से लागू किया जाना था। हालांकि कोरोना वायरस महामारी के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। रिश्ते तो बिगड़ ही रहे थे, लेकिन कोरोना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के तेवर बेहद तल्ख हो गए और रिश्ते रसातल में चले गए। अब अमेरिका की कई कंपनियां चीन से अपना व्यापार समेट रही हैं। इसके अलावा अमेरिका ने भी 28 चीनी संस्थानों को ब्लैकलिस्ट किया है।

कोरोना वायरस

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने चीन और अमेरिका के खराब संबंधों को और खराब करने का काम किया। इसकी वजह है वायरस की शुरुआत चीन से होना। अमेरिका लगातार आरोप लगाता रहता है कि चीन ने वायरस को लेकर समय रहते विश्व को इसकी सही जानकारी नहीं दी। इतना ही नहीं अमेरिका चीन से उस लैब की जांच कराने को कह चुका है जहां से वायरस के लीक होने की बात सामने आई थी।

कोरोना वायरस को लेकर अमेरिका चीन पर इसलिए ज्यादा सख्त है क्योंकि इसने उसे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। ट्रंप के अलावा विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भी गाहे-बगाहे चीन पर वायरस को लेकर निशाना साधते रहते हैं। पिछले दिनों उन्होंने कहा था कि चीन सरकार को कोविड-19 संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा होने की जानकारी थी। इसके बावजूद उसने अपने लोगों को देश से बाहर यात्रा करने की अनुमति दी।

हांगकांग पर चीन ने लागू किया नया कानून

चीन ने हाल ही में हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया है। इसका मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र समर्थकों पर लगाम लगाना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना है। कानून के अनुच्छेद 38 के तहत यह उन अपराधों पर लागू होगा जो क्षेत्र के बाहर से हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र में एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किए गए हैं जो क्षेत्र का स्थायी निवासी नहीं हैं।

इसने अमेरिका और चीन के रिश्तों की कड़वाहट को और बढ़ाने का काम किया। इसी बीच 14 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कानून और कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके चीनी लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध का इतंजाम कर दिया। नए कानून पर हस्ताक्षर करने के बाद ट्रंप ने कहा था, 'मैंने एक कानून और आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं जो हांगकांग के लोगों के खिलाफ दमन के लिए चीन को जवाबदेह ठहराता है।' उन्होंने कहा था कि हांगकांग स्वायत्तता अधिनियम चीन को जिम्मेदार ठहराने के लिए अधिक शक्तियां प्रदान करने वाला कानून है।

दक्षिण चीन सागर मामला

दक्षिण चीन सागर में चीन की जरूरत से अधिक दखलअंदाजी ने भी अमेरिका को नाराज कर दिया। उसने यहां पर अपना जंगी जहज तक भेज दिया है। इसके अलावा ताइवान पर चीन का खुला दावा भी अमेरिका को नाराज करता रहा है। लेकिन चीन की लगातार बढ़ रही आक्रामकता ने अमेरिका को खुलकर उसके खिलाफ आने पर मजबूर कर दिया है। बात यहां तक पहुंच गई कि अमेरिका ने चीन को ह्यूस्टन स्थित वाणिज्य दूतावास बंद करने का आदेश दिया। जवाबी कार्रवाई करते हुए चीन ने चेंग्दू स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को बंद करने को कह दिया है। 

कब शुरू हुए थे दोनों देशों के संबंध

चीन और अमेरिका के बीच रिश्तों की शुरुआत 1970 में पाकिस्तान के जरिए हुई थी। इसे 'पिंग-पॉन्ग डिप्लोमेसी' के नाम से भी जाना जाता है। इसमें अमेरिका की टेबल टेनिस की एक टीम चीन गई थी। इसके बाद अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति निक्सन आठ दिनों की चीन यात्रा पर गए थे। सात साल बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए। फिर तत्कालीन राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने चीन के साथ 636 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापारिक समझौता किया था, जो पूरी तरह से चीन के पक्ष में था।

 
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