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Nepal: नेपाल में अमेरिकी परियोजना का लाभ उठाएंगी चीनी कंपनियां?

Tue, 23 May 2023 02:50 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 23 May 2023 02:50 PM IST
सार

पिछले साल 27 फरवरी को नेपाल की संसद ने मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से करार के लिए समझौते पर मुहर लगाई थी। तब उसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए थे। तब यह अफवाह फैली थी कि चीन की शह पर ये प्रदर्शन आयोजित किए गए...

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Chinese companies will take advantage of the United states project in Nepal
नेपाल में एमसीसी की मदद का विरोध - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते टकराव के बीच नेपाल में यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यहां अमेरिकी वित्तीय सहायता से बनने वाली परियोजनाओं का लाभ चीनी कंपनियों को मिलेगा और उस हाल में अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होगी। नेपाल ने पिछले वर्ष अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार की थी। उसके तहत जिन परियोजनाओं का निर्माण होना है, उनके लिए अब टेंडर मंगवाए जा रहे हैं। एक बिजली ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के लिए अमेरिका से हुए करार के तहत गठित मिलेनियम चैलेंज-एकाउंट्स नेपाल (एमसीए-नेपाल) ने निविदा आमंत्रित किए थे। अब यह सवाल आ खड़ा हुआ है कि क्या चीनी कंपनियों ने इस निविदा प्रक्रिया में हिस्सा लिया है?

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पिछले साल 27 फरवरी को नेपाल की संसद ने मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से करार के लिए समझौते पर मुहर लगाई थी। तब उसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए थे। तब यह अफवाह फैली थी कि चीन की शह पर ये प्रदर्शन आयोजित किए गए। तब नेपाल की शेर बहादुर देउबा सरकार ने कहा था कि अमेरिकी मदद से देश में ट्रांसमिशन लाइनों और सड़कों का निर्माण किया जाएगा।

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पिछले साल नवंबर के आखिर में 315 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण के लिए विश्व स्तरीय टेंडर जारी किया गया। इस टेंडर की समयसीमा सोमवार (22 मई) को समाप्त हो रही है। इस बीच देश में इस पर चर्चा गर्म है कि क्या इस परियोजना के लिए चीनी कंपनियों ने भी टेंडर भरा है। इस बारे में अखबार काठमांडू पोस्ट ने एमसीए-नेपाल से जानकारी मांगी थी। उस पर एमसीए-नेपाल ने कहा कि किसी कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से रोका नहीं गया है।

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एमसीए-नेपाल ने कहा- ‘दुनिया भर की प्राइवेट कंपनियां इस निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के योग्य रही हैं। सिर्फ क्यूबा, उत्तर कोरिया, ईरान और सीरिया की कंपनियों को इस प्रक्रिया में प्रतिबंधित किया गया था, क्योंकि इस परियोजना के लिए धन अमेरिका से मिला है।’ गौरतलब है कि इन चार देशों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं।

एमसीए ने साफ किया कि निविदा प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा भावना को सुनिश्चित करते हुए अधिकतम पारदर्शिता बरती गई है। उसने कहा- ‘किसी कंपनी पर सिर्फ इसलिए रोक नहीं लगाई गई है कि वह चीन की है।’ एमसीए-नेपाल ने कहा कि चूंकि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को सरकार से सब्सिडी मिलती है, इसलिए ऐसी कंपनियों को निविदा प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने दिया गया।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस सूरत में संभव है कि एमसीसी परियोजनाओं में से कुछ का ठेका चीनी कंपनियों को मिल जाए। चीनी कंपनियां कम लागत में काम करने के लिए जानी जाती हैं। ऐसे में अगर पारदर्शिता से फैसला हुआ, तो सस्ता टेंडर भरने वाली चीनी कंपनी को ठेका मिलना तय हो जाएगा। उस स्थिति में अमेरिका की क्या प्रतिक्रिया होगी, इसको लेकर यहां कयास लगाए जा रहे हैं।  

एमसीसी-यूरोप के उपाध्यक्ष जोनाथन ब्रुक्स की शनिवार को यहां अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इसके बाद सरकारी सूत्रों ने कहा है कि ठेका किस कंपनी को मिले, इस बारे में अमेरिका से पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। बताया जाता है कि शनिवार की बैठक में ब्रुक्स ने परियोजना पर अमल के लिए जमीन अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस में आने वाली दिक्कतों के बारे में जानकारी हासिल की।

 

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