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शक्ति प्रदर्शन: हिंद महासागर में बढ़ी चीनी नौसेना की ताकत, भारत के पड़ोसी राष्ट्रों को कर रहा नियंत्रित

Mon, 19 Apr 2021 01:29 PM IST
प्रशांत कुमार वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला
वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 19 Apr 2021 01:29 PM IST
सार

चीन, सुरक्षा, सामरिक और आर्थिक क्षेत्रों में लगातार अपनी मजबूती दर्ज करा रहा है। समारिक रूप से चीन दुनिया का सबसे बड़ा देश बनता जा रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वह नौसेना के मामले में शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है।

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Chines navy more powerful in Indian Ocean
हिंद महासागर में चीनी युद्धपोत - फोटो : PTI

विस्तार

 चीन, सुरक्षा, सामरिक और आर्थिक क्षेत्रों में लगातार अपनी मजबूती दर्ज करा रहा है। समारिक रूप से चीन दुनिया का सबसे बड़ा देश बनता जा रहा है। हिंद महासागर में चीनी नौसेना की क्षमता काफी मजबूत हो गई है। यह कहना गलत नहीं होगा कि वह नौसेना के मामले में शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है। हिंद महासागर में उसकी ताकत इतनी बढ़ गई है कि भारत के पड़ोसी राष्ट्र को कंट्रोल कर रहा है। चीन हिंद महासागर में म्यांमार, श्रीलंका और पाकिस्तान को नियंत्रित कर रहा है। यही नहीं वह पूर्वी अफ्रीका देश जिबूती में सैन्य अड्डा खोल दिया है। चीनी की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी ने 1 अगस्त 2017 को विदेशी सैन्य अड्डे की शुरुआत की है। इसके अलावा उसकी नजर अब पश्चिमी अफ्रीकी देश सेनेगेल पर है। चीन पश्चिमी अफ्रीका में एक बंदरगाह बनाने पर विचार कर रहा है। चीनी के अधिकार वाला डोरलेह वाणिज्यिक बंदरगाह पीएलएए जहाजों को रोकने के लिए तैयार किया है। पीएलए द्वारा तेजी से इसका विस्तार किया जा रहा है। 2021 में वह यहां 43 फीसदी हिस्सों को विस्तार कर लेगा। 

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2018 में चीन ने दिखाया था शक्ति प्रदर्शन
  साल 2018 में पीएलए ने दक्षिण चीन सागर में अपनी सामरिक ताकत का प्रदर्शन किया था। जिसमें एक साथ 48 युद्धपोत, दर्जनों लड़ाकू विमान और 10,000 से अधिक नौसैनिक शामिल हुए थे। चीन ने अदन की खाड़ी से समुद्री डाकुओं को खदेड़ दिया है। अब अफ्रीका के हॉर्न के पास समुद्री डकैती की घटना ना के बराबर रह गई है। हालांकि पश्चिमी अफ्रीका में स्थित गिनी की खाड़ी में अब भी कुछ समुद्री लुटेरे अपना अड्डा बना रखे हैं। जिसपर चीन की नजर है।  
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अमेरिका से चुनौती के लिए इस योजना पर कर रहा काम 
इस वक्त अफ्रीकी महाद्वीप पर अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कैंप लेमनीयर तैनात है। लेकिन इस जगह से 15 मिनट की दूरी पर चीन ने जिबूतीयन बेस कैंप बनाया है। चीन की पीएलए बड़े युद्धपोतों को समायोजित करने के लिए  पियर्स का विस्तार कर रहा है। महासागर में अपना ताकतवर प्रदर्शन के लिए चीन को अमेरिकी जैसे देश से चुनौती लेनी पड़ सकती है। हालांकि चीन इस पर अभी खामोश है।अमेरिका ने 9 अप्रैल को "यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी" की एक रिपोर्ट जारी की। जिसमें  लिखा कि चीन लगातार बीजिंग कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) को संरक्षित करने के लिए आर्थिक, तकनीकी और राजनयिक स्थिति के साथ-साथ सैन्य शक्ति बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वह अपनी सीमा को पूर्वाग्रह के तौर पर देखता है। इसको लेकर वॉशिगटन के खर्चे पर अंततराष्ट्रीय सहयोग चाहता है। लेकिन अमेरिका ऐसा होने नहीं देगा। अमेरिकी खुफिया एंजेसी ने बताया कि चीनी सरकार आर्थिक, राजनीतिक विस्तार के लिए अपनी बेल्ट एंड रोल नीति को वापस नहीं लेना चाहता। वहीं चीन वैक्सीन कूटनीति का इस्तेमाल कर अपने प्रभाव को भी आगे बढ़ाने पर विचार कर रहा है। 

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