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UN: '2035 तक 10% कम करेंगे उत्सर्जन..', दुनिया में सबसे ज्यादा कार्बन प्रदूषण फैलाने वाले चीन ने की घोषणा
Thu, 25 Sep 2025 07:53 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 25 Sep 2025 07:53 AM IST
सार
चीन ने पहली बार 2035 तक कार्बन उत्सर्जन में 7 से 10% की कटौती का लक्ष्य घोषित किया, जिसके बाद दुनियाभर के नेताओं ने भी जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीरता दिखाई। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन में यूरोप सहित कई देशों ने भी अपनी योजनाएं बताईं और कार्बन टैक्स, नवीकरणीय ऊर्जा जैसे कदमों पर जोर दिया। चीन और ब्राजील ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना करते हुए कहा कि कुछ देश भले पीछे हटें, लेकिन दुनिया को सही दिशा में आगे बढ़ते रहना चाहिए।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
चीन ने जब पहली बार कार्बन उत्सर्जन में कटौत करने का लक्ष्य घोषित किया तो दुनियाभर के नेताओं ने कहा कि वह अब जलवायु परिवर्तन और उससे होने खतरनाक मौसम से लड़ने को लेकर पहले कहीं ज्यादा गंभीर हो गए हैं। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र के उच्च स्तरीय जलवायु सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने घोषणा की कि उनका देश अब 2035 तक अपने कार्बन उत्सर्जन को सात से 10 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य रखेगा। चीन दुनिया का सबसे ज्यादा कार्बन प्रदूषण फैलाने वाला देश है और 31 फीसदी से अधिक कार्बन उत्सर्जन करता है और यह उत्सर्जन लंबे समय से लगातार बढ़ रहा है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई, जब सौ से ज्यादा विश्व नेता एकत्र हुए थे, ताकि जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन पर गंभीरता से चर्चा की जा सके। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताएं अब से साढ़े छह साल बाद ब्राजील में होनी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को महासभा (यूएनजीए) के दौरान विश्व नेताओं के शिखर सम्मेलन बुलाया, ताकि कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए स्पष्ट योजना पर बात हो सके।
ये भी पढ़ें: शक्तिशाली चक्रवात रगासा के आज चीनी तट से टकराने की संभावना; ताइवान में 17 की मौत, 120+ लापता
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एक वीडियो संदेश में शी ने वादा किया कि चीन 2020 के मुकाबले अपनी पवन और सौर उर्जा क्षमता को छह गुना बढ़ाएगा, आम इस्तेमाल के लिए बिना प्रदूषण वाले वाहन बनाएगा और एक एसा समाज बनाएगा जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाों से निपटने के लिए तैयार हो।
इसके बाद यूरोप ने भी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक नई योजना का संकेत दिया। हालांकि, इस योजना के बार में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुल वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप ने अपनी उर्जा से जुडी बुनियादी सुविधाओं और नवीनीकरण उर्जा में निवेश बढ़ा दिया है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन पर लगने वाले टैक्स में बढ़ोतरी की गई है। इन प्रयासों के कारण यूरोप का कुल कार्बन उत्सर्जन 1940 से अब तक करीब 40 फीसदी तक घट चुका है। पिछले हफ्ते सदस्य देशों ने सहमति जताई कि उनका राष्ट्रीय योगदान 66 फीसदी से 72 फीसदी के बीच रहेगा और वे नवंबर में होने वाली वार्ता से पहले अपनी योजना को संयुक्त राष्ट्र को सौंप देंगे।
ये भी पढ़ें: संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और रूस के विदेश मंत्रियों की मुलाकात, इन मुद्दों पर चर्चा
जिनपिंग और लूला ने ट्रंप पर कसा तंज
बुधवार को शी जिनपिंग और ब्राजील के नेता ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने नवीकरणीय उर्जा और जलवायु परिवर्तन की अवधारणा की आलोचना की थी। दोनों नेताओं ने सीधे नाम तो नहीं लिया लेकिन अपने बयानों से उन पर तंज कसा। शी ने कहा, जब कुछ देश इसके खिलाफ काम कर रहे हैं, तब भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सही दिशा में फोकस रखना चाहिए। वहीं, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने कहा, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से कोई भी सुरक्षित नहीं है। सीमा पर दीवारें सूखा या तूफान को नहीं रोक सकतीं। प्रकृति बमों या युद्धपोतों से नहीं डरती। कोई भी देश दूसरे से ऊपर नहीं है। हम सभी हार सकते हैं, क्योंकि खारिज करने की मानसिकता जीत सकती है।
गुटेरेस ने कहा, विज्ञान कार्रवाई की मांग करता है। कानून उसे अनिवार्य बनाता है। अर्थव्यवस्था उसे जरूरी बनाती है। और लोग इसकी मांग कर रहे हैं।
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यह घोषणा ऐसे समय में हुई, जब सौ से ज्यादा विश्व नेता एकत्र हुए थे, ताकि जलवायु परिवर्तन और कार्बन उत्सर्जन पर गंभीरता से चर्चा की जा सके। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जलवायु वार्ताएं अब से साढ़े छह साल बाद ब्राजील में होनी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बुधवार को महासभा (यूएनजीए) के दौरान विश्व नेताओं के शिखर सम्मेलन बुलाया, ताकि कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए स्पष्ट योजना पर बात हो सके।
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एक वीडियो संदेश में शी ने वादा किया कि चीन 2020 के मुकाबले अपनी पवन और सौर उर्जा क्षमता को छह गुना बढ़ाएगा, आम इस्तेमाल के लिए बिना प्रदूषण वाले वाहन बनाएगा और एक एसा समाज बनाएगा जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाों से निपटने के लिए तैयार हो।
इसके बाद यूरोप ने भी जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए एक नई योजना का संकेत दिया। हालांकि, इस योजना के बार में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुल वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप ने अपनी उर्जा से जुडी बुनियादी सुविधाओं और नवीनीकरण उर्जा में निवेश बढ़ा दिया है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन पर लगने वाले टैक्स में बढ़ोतरी की गई है। इन प्रयासों के कारण यूरोप का कुल कार्बन उत्सर्जन 1940 से अब तक करीब 40 फीसदी तक घट चुका है। पिछले हफ्ते सदस्य देशों ने सहमति जताई कि उनका राष्ट्रीय योगदान 66 फीसदी से 72 फीसदी के बीच रहेगा और वे नवंबर में होने वाली वार्ता से पहले अपनी योजना को संयुक्त राष्ट्र को सौंप देंगे।
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जिनपिंग और लूला ने ट्रंप पर कसा तंज
बुधवार को शी जिनपिंग और ब्राजील के नेता ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने नवीकरणीय उर्जा और जलवायु परिवर्तन की अवधारणा की आलोचना की थी। दोनों नेताओं ने सीधे नाम तो नहीं लिया लेकिन अपने बयानों से उन पर तंज कसा। शी ने कहा, जब कुछ देश इसके खिलाफ काम कर रहे हैं, तब भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सही दिशा में फोकस रखना चाहिए। वहीं, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने कहा, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से कोई भी सुरक्षित नहीं है। सीमा पर दीवारें सूखा या तूफान को नहीं रोक सकतीं। प्रकृति बमों या युद्धपोतों से नहीं डरती। कोई भी देश दूसरे से ऊपर नहीं है। हम सभी हार सकते हैं, क्योंकि खारिज करने की मानसिकता जीत सकती है।
गुटेरेस ने कहा, विज्ञान कार्रवाई की मांग करता है। कानून उसे अनिवार्य बनाता है। अर्थव्यवस्था उसे जरूरी बनाती है। और लोग इसकी मांग कर रहे हैं।
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