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China: चिन गांग बने चीन के नए विदेश मंत्री तो उसका क्या होगा संकेत?

Sat, 05 Nov 2022 04:15 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 05 Nov 2022 04:15 PM IST
सार

China: वाशिंगटन में चिन की नियुक्ति 2021 में हुई थी। उस समय तक दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण हो चुके थे। उनके 15 महीनों के कार्यकाल में संबंधों में तनाव और बढ़ा है। इस बीच वाशिंगटन में चिन का आक्रामक रुख काफी चर्चित रहा...

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China: will the qin gang becomes the new foreign minister
China- Qin Gang - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

क्या अमेरिका में तैनात चीनी राजदूत चिन गांग चीन के नए विदेश मंत्री बनेंगे? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इस बारे में कुछ ठोस संकेत मिल रहे हैं। चिन की पहचान आक्रमक तेवर के साथ अमेरिका को जवाब देने से बनी है। इसलिए समझा जाता है कि उन्हें विदेश मंत्री बना कर राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीन की बहुचर्चित ‘वूल्फ वॉरियर’ कूटनीति को आगे बढ़ाएंगे। अंतरराष्ट्रीय मामलों में पश्चिमी देशों को करारा जवाब देने की हाल के वर्षों में अपनाई गई चीनी रणनीति को ‘वूल्फ वॉरियर’ कूटनीति के रूप में जाना गया है।  

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कुछ समय पहले जब अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन सांसद जोश हॉवले ने शी जिनपिंग को प्रतिबंधित करने का बिल पेश किया, तब चिन ने एक कड़ा बयान जारी किया था। इसमें उन्होंने हॉवले पर दंभी और निंदनीय रुख दिखाने का आरोप लगाया और कहा था कि अमेरिका गलत और खतरनाक रास्ते पर चल रहा है। पिछले महीने हुई चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं कांग्रेस (महाधिवेशन) के दौरान चिन को पार्टी की सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया। इसे उनकी तरक्की के रूप में देखा गया है।

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विश्लेषकों का कहना है कि चिन के विदेश मंत्री बनने का मतलब यह होगा कि अमेरिका-चीन संबंधों में सुधार की दिशा में कोई प्रगति नहीं होगी। चीन के चेंगदू शहर में अमेरिका के महावाणिज्य दूत रह चुके जेफरी मून ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘चिन की तरक्की इसलिए हुई है, क्योंकि वे शी जिनपिंग के प्रति बेहद वफादार रहे हैं। लेकिन यह तथ्य है कि अमेरिका में उनके राजदूत के कार्यकाल में संबंध बेहतर करने की दिशा में प्रगति नहीं हुई।’

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वाशिंगटन में चिन की नियुक्ति 2021 में हुई थी। उस समय तक दोनों देशों के संबंध काफी तनावपूर्ण हो चुके थे। उनके 15 महीनों के कार्यकाल में संबंधों में तनाव और बढ़ा है। इस बीच वाशिंगटन में चिन का आक्रामक रुख काफी चर्चित रहा। अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में सीनियर फेलॉ बॉनी लिन ने कहा है- ‘चिन गांग को वूल्फ वॉरियर स्टाइल की कूटनीति के लिए जाना गया है। अब यह देखने की बात है कि वाशिंगटन से वे क्या तजुर्बा लेकर लौटते हैं। वाशिंगटन में उनका कार्यकाल आसान नहीं रहा है।’

चिन यूरोप और ब्रिटेन में भी कूटनीतिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। इसके अलावा वे चीन के विदेश मंत्रालय में भी काम कर चुके हैं। कुछ अन्य विश्लेषकों का कहना है कि चिन को वाशिंगटन में बहुत कठिन स्थिति में काम करना पड़ा। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में एसोसिएट प्रोफेसर विक्टर शिह ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसी मांग कर रहे थे, उसके बीच वाशिंगटन में चीनी दूतावास को संतुलन बना कर चलना पड़ा। उसके सामने एक तरफ शी की मांग पूरी करने की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करने की कि कहीं चीन को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम ना उठ जाए।’

शिह की राय है कि चिन ने उतना आक्रामक रुख नहीं दिखाया, जितनी आशंका थी। उन्होंने कहा- ‘उन्होंने कूटनीतिक अंदाज कायम रखने की कोशिश की। मेरी समझ में उन्होंने अच्छी भूमिका निभाई।’ कुछ दूसरे विश्लेषकों की राय है कि चीन और अमेरिका के संबंध कई कारणों से सुधार नहीं हो रहा है। इसके लिए राजदूत को दोषी ठहराना सही समझ नहीं है।

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