चीन को चित करने के लिए अमेरिका-यूरोप आएंगे साथ, कहा- ड्रैगन के नापाक मंसूबों को करेंगे नाकाम
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चीन को चित करने के लिए अब यूरोपीय संघ और अमेरिका साथ आएंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने ब्रूसेल्स फोरम के दौरान शुक्रवार को यह जानकारी दी। पोंपियो ने ट्वीट किया, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि चीन कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय संघ आपस में बातचीत को तैयार हैं।
चीन हमारी साझा मूल्यों और जीवनशैली को प्रभावित करने की जो चाल चल रहा है, हम उसे विफल करने को साथ आने वाले हैं। यूरोपीय संघ के प्रमुख राजनयिक जोसेप बॉरेल ने चीन के खिलाफ एक सीमापार मोर्चा तैयार करने के लिए अमेरिका और यूरोप को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है।
बॉरेल ने यूरोपीय यूनियन के 27 विदेश मंत्रियों और अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो के साथ 15 जून को हुई बैठक में भी दोनों से एक साझा अभियान शुरू करने का आह्वान किया था। पोंपियो ने कहा, यह अच्छा संकेत है कि पश्चिमी देशों पर चीन की बुरी नजर के खिलाफ हम साथ आ रहे हैं। हमारा उद्देश्य एक ऐसा तंत्र विकसित करना है जिससे चीन के नापाक मंसूबों को नाकाम किया जा सके और उसके खतरे से अमेरिका और यूरोपीय देशों को बचाया जा सके। इस दौरान पोंपियो ने बार बार चीन से होने वाले खतरों को रेखांकित किया।
भारत सीमा विवाद का भी जिक्र
पोंपियो ने इस दौरान भारत चीन सीमा के पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के दुस्साहस का भी जिक्र किया। यहां एक हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए। पोंपियो ने कहा, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियां से अमेरिका समेत कई देशों के नागरिकों की सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने कहा, दशकों में ट्रंप प्रशासन पहला है जिसने इस खतरे को गंभीरता से लिया है।
कोरोना: यूरोपीय संघ प्रतिबंध घटाने पर कर रहा विचार
यूरोपीय संघ कोरोना संकट के चलते यूरोप में प्रवेश के प्रतिबंधों को कम करने की दिशा में काम कर रहा है। यूरोपीय संघ के राजनयिक ने बताया कि किन देशों को यूरोप में दोबारा प्रवेश की अनुमति दी जाएगी इसको लेकर संघ के अधिकारी काम में जुटे हैं और अगले हफ्ते के अंत तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हालांकि तेजी से बढ़ते मामलों के कारण अमेरिकी लोगों पर प्रतिबंध जारी रहने की उम्मीद है। इस सूची को तैयार करने में संबंधित देश में कोरोना के मामलों और यूरोपीय देशों के प्रतिबंध नियमों को ध्यान में रखा जाएगा।