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Tiananmen anniversary: तियानामेन नरसंहार को 33 साल बीते, ब्लिंकन बोले-इस इतिहास को मिटा नहीं सकेगा चीन

Sat, 04 Jun 2022 11:03 AM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 04 Jun 2022 11:03 AM IST
सार

अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा कि थ्येनआनमन चौक से आंदोलन के स्मारकों को हटाने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन अमेरिका शहीद प्रदर्शनकारियों की स्मृति का सम्मान करता है। 

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China trying to erase history, threaten human rights, Blinken on 33rd anniversary of Tiananmen Massacre
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन - फोटो : Agency

विस्तार

33 साल पहले आज ही के दिन चीन ने राजधानी बीजिंग के तियानामेन चौक में देश में लोकतंत्र की मांग कर रहे लाखों विद्यार्थियों व अन्य लोगों का दमन किया था। चीनी सेना की कार्रवाई में कई लोग मारे गए थे। इसकी 33 वीं बरसी के मौके पर अमेरिका ने चीन को नसीहत दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा है कि चीन भले ही इस इतिहास के स्मारकों को मिटाने का प्रयास करे, लेकिन जहां भी मानवाधिकारों खतरे में होंगे वहां अमेरिका उन्हें बढ़ावा देगा। 

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अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकन ने कहा कि तियानामेन चौक से आंदोलन के स्मारकों को हटाने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन अमेरिका शहीद प्रदर्शनकारियों की स्मृति का सम्मान करता है। वह मानवाधिकारों को बरकरार रखने के प्रयास करेगा, भले ही कुछ लोगों द्वारा इनका हनन करते हुए धमकी दी जाती है।  
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प्रदर्शनकारियों को बताया बहादुर
अमेरिकी विदेश मंत्री ने ट्विटर पर अपनी पोस्ट में लिखा, '33 साल बीत चुके हैं जब दुनिया ने बहादुर प्रदर्शनकारियों और अन्य लोगों को तियानामेन चौक पर लोकतंत्र की मांग करते देखा। स्मारकों को हटाने और इतिहास को मिटाने की कोशिशों के बावजूद, मानवाधिकारों को जहां भी खतरा है, वहां उसे बढ़ावा देकर अमेरिका शहीदों का आदर करता है।'
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तियानामेन चौक पर अप्रैल 1989 में हजारों चीनी विद्यार्थियों, श्रमिकों और अन्य लोगों ने लोकतंत्र के समर्थन में शांतिपूर्ण आंदोलन किया था। इसमें अभिव्यक्ति की आजादी, जवाबदेही और भ्रष्टाचार को समाप्त करने का आह्वान किया गया था। तत्कालीन चीनी सरकार ने मई 1989 के अंत में मार्शल लॉ लागू कर आंदोलनकारियों को कुचला था। 3 और 4 जून को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और दर्शकों पर गोलीबारी कर उन्हें मार डाला। बीजिंग में कुछ नागरिकों ने जवाब में सेना के काफिले पर हमला किया और वाहनों को जला दिया। इसके बाद सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर जेलों में डाला गया था। 


तियानामेन कांड के कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न 
ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा कि चीनी अधिकारियों ने पिछले एक साल में तियानामेन कांड से जुड़े कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न बढ़ा दिया है। इसमें कहा गया है कि चीन सरकार को लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हत्या की जिम्मेदारी स्वीकार करना चाहिए। कुछ महीने पहले हांगकांग के विश्वविद्यालयों ने इस ऐतिहासिक आंदोलन के स्मारकों को हटा दिया था। 

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