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चीन: सीपीटीपीपी की सदस्यता अर्जी पर शुरू हुई खींचतान, अभी मलेशिया व सिंगापुर का ही मिला साथ

Tue, 21 Sep 2021 06:50 PM IST
सुरेंद्र जोशी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Tue, 21 Sep 2021 06:50 PM IST
सार

इस समझौते के तहत सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार होगा। सीपीटीपीपी में 11 देश शामिल हैं। पिछले हफ्ते चीन ने इसकी सदस्यता के लिए औपचारिक रूप से अर्जी दी थी।

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China: The tussle started over the membership application of CPTPP, only Malaysia and Singapore got the support
मुक्त व्यापार - फोटो : pixabay

विस्तार

कॉम्प्रिहेंसिव एंड प्रोग्रेसिव ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप (सीपीटीपीपी) की सदस्यता लेने की चीन को कोशिश को दो देशों का शुरुआती समर्थन मिला है। मलेशिया और सिंगापुर ने चीन की सदस्यता अर्जी को मंजूरी देने का समर्थन किया है। लेकिन जापान और ऑस्ट्रेलिया की शुरुआती प्रतिक्रिया ठंडी रही है।

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मलेशिया के अंतरराष्ट्रीय व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम को दी गई अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वह इस मुक्त व्यापार समझौते में चीन के शामिल होने की इच्छा से खास उत्साहित हुआ है। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि अगले साल के आरंभ तक चीन सीपीटीपीपी का सदस्य बन जाएगा। मलेशिया ने भरोसा जताया है कि चीन के इस मुक्त व्यापार समझौते का सदस्य बनने से चीन और मलेशिया के आपसी व्यापार में भारी बढ़ोतरी होगी। इस समझौते के तहत सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार होगा। सीपीटीपीपी में 11 देश शामिल हैं। पिछले हफ्ते चीन ने इसकी सदस्यता के लिए औपचारिक रूप से अर्जी दी थी।
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सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने कहा है कि उनका देश चीन के इस करार में शामिल होने का स्वागत करता है। सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी सिंगापुर में थे। उनसे बातचीत के बाद बालाकृष्णन ने ये प्रतिक्रिया दी।इस बीच खबर है कि जापान चीन की कोशिश को लेकर आशंकित है। उसे अंदेशा है की सीपीटीपीपी में अगर चीन शामिल हुआ, तो इस समूह में उसकी नेतृत्वकारी भूमिका बन जाएगी। अपनी औपचारिक प्रतिक्रिया मे जापान ने कहा कि वह पहले इस बात की जांच करेगा कि क्या चीन इस समझौते की शर्तों को पूरा करने के लिए तैयार है। ऑस्ट्रेलिया ने संकेत दिया है कि वह चीन की इस अर्जी का समर्थन नहीं करेगा। सीपीटीपीपी के नियमों के मुताबिक किसी नए देश को सदस्यता देने के लिए यह जरूरी है कि सभी 11 सदस्य देश उससे संबंधित प्रस्ताव का समर्थन करें।
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 इस बीच कई विश्लेषकों ने दावा किया है कि सीपीटीपीपी की सदस्यता लेने की चीन की कोशिश के रास्ते में जो बाधाएं नजर आ रही हैं, वे इतनी बड़ी नहीं हैं कि चीन की अर्जी ठुकरा दी जाएगी। सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर हेनरी गाओ और शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड में प्रोफेसर वेइहुआन झाउ ने दावा किया है कि इस बारे में होने वाले निर्णय से बहुत से लोगों को हैरत होगी।

गाओ और झाउ ने निक्कई एशिया पर लिखे एक साझा लेख में कहा है- ‘चीन की ये पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके द्वारा अपनाई गई रणनीति का हिस्सा है। उसने अंतरराष्ट्रीय नियम तय करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की रणनीति अपनाई है। इस समझौते के पहले चीन अपने एशियाई सहयोगी देशों के साथ क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता (आरसीईपी) और यूरोपियन यूनियन के साथ व्यापक निवेश समझौता करने में सफल रहा है।’


सिंगापुर स्थित एडवोकेसी ग्रुप एशियन ट्रेड सेंटर के कार्यकारी निदेशक देबोराह एल्म्स ने कहा है- ‘कई देशों की राय है कि चीन को नियमों के पालन के तर्क से रोके रखने के बजाय बेहतर यह होगा कि समान नियमों के भीतर चीन के साथ प्रतिस्पर्धा की जाए।’ विश्लेषकों के मुताबिक ऐसे देशों का समर्थन चीन को मिल रहा है। उन विश्लेषकों के मुताबिक अगर चीन अपने अंदरूनी व्यापार नियमों को सीपीटीपीपी के लिए जरूरी नियमों के मुताबिक ढाल लेता है, तब जापान के लिए उसकी सदस्यता रोकना कठिन हो जाएगा।

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