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Digital Currency: डिजिटल करेंसी के जरिए खाड़ी देशों से बन रहा है चीन का मजबूत रिश्ता

Fri, 07 Oct 2022 06:11 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, दुबई Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 07 Oct 2022 06:11 PM IST
सार

Digital Currency: चीन सरकारी तौर पर डिजिटल मुद्रा शुरू करने वाला दुनिया का पहला देश इस वर्ष बना था। बीजिंग में हुए विंटर ओलिंपिक खेलों के दौरान उसने औपचारिक रूप से डिजिटल युवान जारी किया, जिसे ई-युवान के नाम से जाना जाता है...

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China strong relationship with Gulf countries is being built through digital currency
Digital Currency eyuan - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

चीन की डिजिटल करेंसी परियोजना में खाड़ी देशों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है। खास कर यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद ऐसा देखा गया है। चीन सरकारी तौर पर डिजिटल मुद्रा शुरू करने वाला दुनिया का पहला देश इस वर्ष बना था। बीजिंग में हुए विंटर ओलिंपिक खेलों के दौरान उसने औपचारिक रूप से डिजिटल युवान जारी किया, जिसे ई-युवान के नाम से जाना जाता है।

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वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक ई-युवान दुनिया में किसी सेंट्रल बैंक से संचालित सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रही डिजिटल मुद्रा है। चीन में 25 करोड़ लोग इसके जरिए लेन-देन कर रहे हैं। आम तौर पर चीन के अंदर इसका इस्तेमाल खुदरा खरीद-बिक्री के लिए होता है। वैसे चीन के सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने पिछले साल ही ये घोषणा कर दी थी कि ई-युवान एक से दूसरे देश में होने वाले लेन-देन संबंधी भुगतान के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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लंदन स्थित थिंक टैंक रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो एंड्रयू कैनी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में रिसर्च फेलॉ अलेसांद्रो एर्दुइनो ने एक साझा टिप्पणी में लिखा है कि चीन की डिजिटल करेंसी के कारण अंतरराष्ट्रीय कारोबार में युवान का इस्तेमाल बढ़ जाए, इसकी कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसा तभी होगा, जब भुगतान में शामिल सभी पक्षों को यह अपने लिए फायदेमंद महसूस होगा। इस बिंदु पर चीन और खाड़ी देशों के हित मिलते नजर आ रहे हैं। ये दोनों पक्ष अमेरिकी मुद्रा डॉलर पर अपनी निर्भरता घटाना चाहते हैं। वे डॉलर का ऐसा विकल्प चाहते हैं, जिसका इस्तेमाल आसान हो और जिसके जरिए वित्तीय भुगतान पर लागत ज्यादा ना आए।

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पिछले हफ्ते चीन, हांगकांग, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएईए) के सेंट्रल बैंकों ने मल्टीपल सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) ब्रिज तैयार कर लेने का एलान किया। इसे एम-ब्रिज परियोजना के नाम से जाना जा रहा है। इसके तहत विभिन्न मुद्राओं में भुगतान हो सकेगा। इस परियोजना में शामिल देशों की मुद्रा में होने वाले भुगतान को प्राप्त करने वाला देश अपनी मुद्रा में हासिल कर लेगा। इन सेंट्रल बैंकों ने बताया कि परियोजना में शामिल देशों के बीच 160 भुगतान सफलतापूर्वक किए गए हैं। इनके तहत दो करोड़ 20 लाख डॉलर की रकम का लेन-देन हुआ है।

विश्लेषकों के मुताबिक ये परियोजना असल में 2019 में यूएई और सऊदी अरब ने आपस में शुरू की थी। तब उनका मकसद एक-दूसरे की मुद्रा में भुगतान सेटलमेंट के लिए डिजिटल करेंसी तैयार करना था। यूक्रेन युद्ध के बाद इस परियोजना में नई गति आई और दूसरे देशों के शामिल होने के साथ इसे एम-ब्रिज के रूप में विकसित किया गया।

जानकारों के मुताबिक ऐसी कोशिशों का विश्व वित्तीय व्यवस्था पर दूरगामी और गहरा प्रभाव होगा। अभी कच्चे तेल का सारा कारोबार डॉलर में होता है। चीन को भी आयातित तेल के बदले भुगतान डॉलर में ही करना पड़ता है। इस वजह से अमेरिका को एक बड़ी ताकत मिली हुई है। उसके प्रतिबंध इसी ताकत की वजह से मारक साबित होते हैं। भुगतान के नए डिजिटल सिस्टम से कई देश डॉलर आधारित सिस्टम का विकल्प तैयार कर रहे हैं।

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि हालांकि खाड़ी देशों के ईरान से संबंध अच्छे नहीं हैं, लेकिन ईरान भी नए प्रयासों में दिलचस्पी ले रहा है। इन प्रयासों में ई-युवान की महत्त्वपूर्ण भूमिका बन रही है। चीन ने जो प्रयोग किए हैं, उससे खाड़ी देशों को मदद मिली है। एंड्रयू कैनी और  अलेसांद्रो एर्दुइनो ने लिखा है कि अगर आर्थिक तर्कों के लिहाज से सोचा जाए, तो नए प्रयोगों का मतलब है कि खाड़ी देशों का चीन से निकट रिश्ता बनेगा। यह जुड़ाव चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में शामिल हुए देशों से उसके बने रिश्ते से भी ज्यादा मजबूत होगा।

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