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'चांद' चुराने की कोशिश : चीन और रूस की अब अंतरिक्ष में भी प्रभुत्व की तैयारी, अमेरिकी खुफिया विश्लेषक का दावा
Wed, 13 Apr 2022 07:39 AM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 13 Apr 2022 07:39 AM IST
सार
अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) के स्पेस एंड काउंटर स्पेस के एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक कीथ राइडर ने यह दावा किया है।
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moon
- फोटो : pixy bay
विस्तार
चीन और रूस धरती के साथ ही अब अंतरिक्ष में भी अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक ने यह दावा किया है। इन दोनों देशों की नजर चांद व मंगल के प्राकृतिक संसाधनों पर भी है।
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अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) के स्पेस एंड काउंटर स्पेस के एक वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक कीथ राइडर ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी। उनका कहना है कि चीन और रूस निकट भविष्य में प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियां बनने की कोशिश कर रहे हैं। ये दोनों देश अगले 30 सालों में चंद्रमा व मंगल ग्रह के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करना चाहते हैं।
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मंगलवार को एक प्रेस वार्ता में राइडर ने कहा कि चीन और रूस सामूहिक रूप से और निजी तौर पर भी अगले तीन दशकों में चांद व मंगल ग्रह पर मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रहे हैं। बीजिंग व मॉस्को के ये साझा प्रयास इन दोनों ग्रहों के संसाधनों पर कब्जे में अगुआ बन सकते हैं।
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राइडर की इस चेतावनी के पूर्व अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी ने एक नई रिपोर्ट प्रकाशित की है। यह रिपोर्ट अंतरिक्ष की चुनौतियों पर आधारित है, जो इस क्षेत्र में अमेरिका के मुख्य प्रतिद्वंद्वी चीन व रूस पर केंद्रित है। डीआईए ने कहा है कि बीजिंग और मॉस्को नए वैश्विक अंतरिक्ष मानदंड बनाने के इरादे से खुद को अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। ये स्पेस और काउंटर-स्पेस क्षमताओं के उपयोग के माध्यम से अमेरिकी वैश्विक नेतृत्व को कमजोर करने की मंशा रखते हैं।
डीआईए ने कहा कि रूस और चीन के साझा अंतरिक्ष बेड़े में 2019 और 2021 के बीच 70 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि 2015-2018 की अवधि में दोनों देशों ने अपने-अपने बेड़े में 200 फीसदी से ज्यादा वृद्धि की है। इतना ही नहीं ये अंतरिक्ष में अपनी क्षमताओं का लगातार विस्तार करते जा रहे हैंं