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चीन का अड़ियल रवैया- आतंकी मसूद अजहर पर उसे कोई अल्टीमेटम नहीं मिला

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 17 Apr 2019 05:09 PM IST
मसूद अजहर पर चीन का बयान
मसूद अजहर पर चीन का बयान - फोटो : अमर उजाला
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चीन ने बुधवार को दावा किया है कि आतंकी मसूद अजहर पर बैन लगाने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने उसे कोई अल्टीमेटम नहीं दिया। मीडिया ने गलत खबर जारी की। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा कि मसूद का मामला समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पता नहीं, मीडिया कैसे कह रहा है कि इस मामले में चीन को तकनीकी बाधा हटाने के लिए 23 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया गया है। जबकि चीन काे कोई अल्टीमेटम नहीं मिला है। मीडिया को उन लोगों से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए, जो ऐसी सूचनाएं जारी करते हैं। यूएन सुरक्षा परिषद और इसकी सहयोगी 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति के नियम और प्रक्रियाएं स्पष्ट हैं।
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लू कांग ने यह भी कहा कि चीन चाहता है कि मसूद का मामला आपसी सहयोग से हल हो। सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों की सहमति के बिना संतोषजनक नतीजे नहीं आएंगे। अमेरिका भी इस मामले में अपने प्रस्ताव को दबाव बनाकर मानने के लिए चीन को बाध्य नहीं करे। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के नियमों को नहीं मान रहा है। उन्होंने कहा कि चीन को मसूद के मामले में पूरा समय मिलना चाहिए। गौरतलब है कि पुलवामा में आतंकी हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का नया प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में लाए थे। चीन ने प्रस्ताव पर तकनीकी बाधा लगाकर इसे रोक दिया था। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर पाकिस्तान में रहकर भारत में आतंकी गतिविधियां चलाता है। 

चीन अब तक मसूद को चार बार वैश्विक आतंकी घोषित होने से बचा चुका है। चीन ने पिछले महीने के अलावा 2009, 2016 और 2017 में उसे बचाया था। जबकि मसूद का संगठन जैश-ए-मोहम्मद 2001 से ही आतंकी संगठन घोषित है। कुछ समय पहले चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शॉन्ग ने कहा था कि अमेरिका का कदम संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक नहीं है। जबकि चीन मसूद मामले के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्रवाई करना चाहता है। 

मामले पर लगातार चर्चा, पर समय की स्पष्ट बात नहीं

मसूद मामले पर चीन की तकनीकी रोक का मतलब अस्पष्ट है। हालांकि, चीन के राजदूत लुओ जाओहुई ने इसका मतलब बताया है। वह कहते हैं कि मसूद मामले में तकनीकी रोक का मतलब लगातार सलाह-मशविरा करना है। इसमें समय की बाध्यता या दबाव नहीं है। वह दावा कर चुके हैं कि बीते साल वुहान सम्मेलन के बाद दोनों पक्षों से सहयोग सही रास्ते पर है। चीन इस सहयोग से संतुष्ट और भविष्य को लेकर आशावादी है।

जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने मसूद के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया था। मसूद पाकिस्तान में रहता है। पाकिस्तान उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा। चीन भी मसूद के खिलाफ इसलिए कार्रवाई नहीं करता क्योंकि उसका पाकिस्तान में सीपीईसी प्रोजेक्ट चल रहा है। उधर, अमेरिका की चीन से व्यापार को लेकर तनातनी तो थी ही, पुलवामा हमले ने इसे और बढ़ा दिया।

चीन के पास सिर्फ 6 दिन बचे, नहीं माना तो नया प्रस्ताव आएगा 

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने चीन से मसूद पर तकनीकी रोक हटाने को कहा है। तीनों देशों का कहना है कि चीन ने 23 अप्रैल तक ऐसा नहीं किया तो वे सुरक्षा परिषद में नया प्रस्ताव लाएंगे। इस पर चीन ने जवाब दिया कि तीनों देश मसूद मामले में अपना पक्ष रख सकते हैं, लेकिन किसी प्रकार का दबाव नहीं बना सकते। चीन के सामने कोई आखिरी तारीख नहीं है। चीन इस मामले को सही तरीके से देख रहा है।

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