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चीन ने रचा इतिहास, चंद्रमा पर उतारा पहला स्पेसक्राफ्ट

Thu, 03 Jan 2019 10:28 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 03 Jan 2019 10:28 AM IST
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China reached a milestone after landing  spacecraft on the far side of the Moon
स्पेसक्राफ्ट

चीन ने अंतरिक्ष में गुरुवार को एक और मील का पत्थर स्थापित कर लिया है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार चीन ने चंद्रमा के बाहरी हिस्से पर इतिहास में पहली बार एक स्पेस क्राफ्ट उतारा है। जिसका नाम चांगे-4 बताया जा रहा है। इससे पहले 2013 में चीन ने चांद पर एक रोवर उतारा था। इससे पहले अमेरिका और सोवियत संघ ने ही वहां पर लैंडिंग करवाई थी। लेकिन चांगे-4 को चंद्रमा पर नीचे की तरफ उस हिस्से पर उतारा गया है जो पृथ्वी से दूर रहता है।

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चीन के अंतरिक्ष प्रबंधन पर बारीकी से काम करने वाली मकाऊ यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर झू मेंघुआ ने कहा, 'यह अंतरिक्ष अभियान दिखाता है कि चीन गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण में उन्नत विश्व स्तर पर पहुंच गया है। हम चीनी लोगों ने कुछ ऐसा कर दिया है जिसे करने की हिम्मत अमेरिकीयों ने नहीं की।'
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विशेषज्ञों का कहना है कि चीन चीजों को बहुत जल्दी पकड़ रहा है। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और दूसरे क्षेत्रों में अमेरिका को चुनौती दे सकता है। चीन 2022 तक अपने तीसरे अंतरिक्ष स्टेशन का पूरी तरह से संचालन शुरू करने की योजना बना रहा है। हालांकि चीन ने चंद्रमा पर एक ऐसी जगह पर विमान उतारा है जहां अभी तक कोई भी नहीं पहुंच सका है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्पेसक्राफ्ट की यह लैंडिंग प्रोपेगैंडा से ज्यादा कुछ नहीं है। 
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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का चंद्रयान-1 पर नहीं उतरा था। उसे चंद्रमा की परिक्रमा के लिए भेजा गया था। इसरो इस महीने के आखिर तक अपने दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 की लांचिंग कर सकते हैं। पहले चंद्रयान-2 को अंकतूबर में लांच किया जाना था। बाद में इसकी तारीख को बढ़ाकर 3 जनवरी कर दिया गया। अब फिर इसकी तारीख को आगे बढ़ाते हुए 31 जनवरी रखा गया है।


2008 में इसरो ने चंद्रयान-1 को भेजा था जिसने चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए उसकी सतह पर पानी होने की पुष्टि की थी। चंद्रयान-2 का पहले से तय भार बढ़ गया है। अब इसे जीएसएलवी से नहीं बल्कि जीएसएलवी-मैक-3 से लांच किया जाएगा। लांचिंग के लिए जीएसएलवी-मैक-3 में कुछ बदलाव किए गए हैं।
 

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