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China: ट्रंप-अल्बनीज बैठक के बाद AUKUS समझौते पर भड़का चीन, कहा- यह हथियारों और परमाणु की दौड़ को बढ़ाएगा

Tue, 21 Oct 2025 06:28 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 21 Oct 2025 06:28 PM IST
सार

चीन ने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए ऑकस समझौते की आलोचना की है। बीजिंग ने कहा कि यह परमाणु प्रसार और हथियारों की दौड़ को बढ़ाएगा। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को अमेरिकी तकनीक से परमाणु पनडुब्बियां बनाने में मदद मिलेगी।

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China raged over AUKUS Pact says it will increase nuclear arms race after Trump-Albanese meet
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल) - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

चीन ने मंगलवार को अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए बड़े रक्षा समझौते यानी ऑकस समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया दी। चीन ने कहा कि यह समझौता एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य तनाव और परमाणु प्रसार के खतरे को बढ़ाएगा। इसके साथ ही इस कदम को ब्लॉक राजनीति और हथियारों की दौड़ को बढ़ावा देने वाला करार दिया।
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ऑकस समझौता वर्ष 2021 में अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुआ था। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया को पहली बार अमेरिकी तकनीक से परमाणु-संचालित पनडुब्बियां बनाने में मदद दी जाएगी। इस समझौते में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर भी सहयोग शामिल है। इसे चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए बनाया गया सुरक्षा गठबंधन माना जाता है।
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चीन की आपत्ति और बयान
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को कहा कि चीन पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि हमें इस तरह के त्रिपक्षीय सुरक्षा गठजोड़ों पर कड़ा ऐतराज है। हम किसी भी ऐसे कदम का विरोध करते हैं जो परमाणु प्रसार के जोखिम को बढ़ाए और हथियारों की दौड़ को तेज करे। चीन ने कहा कि ऑकस और क्वाड (अमेरिका, भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया) जैसी व्यवस्थाएं क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती हैं।
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अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की नई पहल
लंबे समय तक चली अनिश्चितता के बाद मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ बैठक में ऑकस परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया पश्चिमी तट पर अरबों डॉलर की लागत से नौसेना और पनडुब्बी निर्माण सुविधाएं स्थापित करेगा। इन ठिकानों का इस्तेमाल अमेरिकी और ब्रिटिश परमाणु-संचालित पनडुब्बियों के रखरखाव के लिए किया जाएगा। यह क्षेत्र में चीन के प्रभाव को रोकने की रणनीति का हिस्सा है।

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दुर्लभ खनिजों पर भी साझेदारी
दोनों देशों ने दुर्लभ खनिजों और रेयर अर्थ मेटल्स पर भी एक नया समझौता किया है। यह समझौता चीन के एकाधिकार को चुनौती देने के लिए किया गया है, जो दुनिया के करीब 70 प्रतिशत रेयर अर्थ खनन और 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है। अल्बनीज ने कहा कि यह साझेदारी लगभग 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर के रेडी-टू-गो प्रोजेक्ट्स को समर्थन देगी, जिससे ऑस्ट्रेलिया की खनन क्षमता बढ़ेगी। इन खनिजों का उपयोग आधुनिक तकनीक, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र में होता है। चीन ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पश्चिमी देश आर्थिक सहयोग की आड़ में एशिया में सैन्य गुटबंदी बढ़ा रहे हैं।

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