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US: चीन को लेकर अमेरिकी संसद में सुनवाई, सांसदों ने ड्रैगन को बताया देश के अस्तित्व के लिए खतरा

Wed, 01 Mar 2023 12:17 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 01 Mar 2023 12:17 PM IST
सार

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद कृष्णमूर्ति ने कहा, अमेरिका और वैश्विक बाजारों तक पहुंच हासिल करने के बाद से चीन की अर्थव्यवस्था दस गुना से ज्यादा बढ़ी है। सीसीपी ने अपने देश में सत्तावादी नियंत्रण को मजबूत किया है। 

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China poses an existential threat US lawmakers at first Congressional hearing on China
शी जिनपिंग, जो बाइडन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने रिपब्लिकन बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में चीन को अमेरिका के अस्तित्व के लिए खतरा बताया है। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाले चीन से मिलने वाली चुनौतियों से सफलतापूर्वक निपटने के लिए अपने सहयोगियों के साथ समन्वय के लिए हरसंभव प्रयास करने का भी आह्वान किया।

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अमेरिका अबतक चीन के व्यवहार को आक्रामक बताता रहा है। नवगठित समिति का नाम 'चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) पर सदन की प्रवर समिति' है। चीन के मामले पर सुनवाई के दौरान समिति के अध्यक्ष और सांसद माइक गैलाघेर ने मंगलवार को अपने शुरुआती संबोधन में कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के अपने सहयोगियों से कहा, यह टेनिस मैच नहीं है। यह अस्तित्व का संघर्ष है कि 21वीं सदी में जीवन कैसा दिखेगा और बुनियादी आजादी दांव पर है। पूर्व खुफिया अधिकारी गैलाघेर ने कहा, हमें तात्कालिकता की भावना के साथ कार्य करना चाहिए। अगले दस वर्षों में हमारी नीति अगले सौ के लिए मंच तैयार करेगी।
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'डेमोक्रेट और रिपब्लिकन ने चीन को कम करके आंका'
भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने भी चीन से पैदा होने वाले खतरों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, पिछले तीन दशकों में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों पार्टियों ने सीसीपी को कम करके आंका और माना कि व्यापार और निवेश अनिवार्य रूप से पीआरसी सहित अधिक-प्रशांत क्षेत्र में लोकतंत्र और अधिक सुरक्षा का कारण बनेगा। लेकिन सबकुछ इसके विपरीत हुआ। 
 

'दस गुना से ज्यादा बढ़ी चीन की अर्थव्यवस्था'
कृष्णमूर्ति ने कहा, अमेरिका और वैश्विक बाजारों तक पहुंच हासिल करने के बाद से चीन की अर्थव्यवस्था दस गुना से ज्यादा बढ़ी है, सीसीपी ने इसके अलावा वीगर लोगों के नरसंहार में शामिल होने सहित अपने सत्तावादी नियंत्रण को मजबूत किया है। सीसीपी ने ताइवान सहित अपने पड़ोसियों के लिए खतरा पैदा  किया है और बड़े पैमाने पर सैन्य ढांचों के निर्माण को फंडिंग की है। इसने उन आर्थिक और व्यापार नीतियों को आगे बढ़ाया है, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करते हैं।
 

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'स्थायी शांति के लिए रोकनी होगी चीन की आक्रामकता' 
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को भविष्य के उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में निवेश जारी रखना चाहिए और अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देना चाहिए। इसे सीसीपी की आक्रामकता को रोकना ही होगा। कृष्णमूर्ति ने कहा, हम पीआरसी के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं, शीत युद्ध नहीं चाहते हैं, गर्म युद्ध नहीं चाहते हैं, हम सभ्यताओं का टकराव नहीं चाहते हैं। लेकिन, हम एक स्थायी शांति चाहते हैं। और यही वजह है कि हमें आक्रामकता को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को न केवल सीसीपी की सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए बल्कि उसकी प्रतिस्पर्धा विरोधी आर्थिक नीतियों से निपटने के लिए अपनी वैश्विक साझेदारी और गठबंधन को मजबूत करना चाहिए।
 

'चीन की व्यापार नीति से अमेरिकी उद्योग कारोबार से बाहर'  
कांग्रेस सदस्य क्लाउडिया टेनी ने कहा, सीपीसी के प्रभाव ने अमेरिकियों को नुकसान पहुंचाया है। सरकार प्रायोजित जासूसी के प्रयासों ने अमेरिकी बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी) को चुरा लिया है और इसकी अनुचित व्यापार रणनीति ने अमेरिकी उद्योगों को कारोबार से बाहर कर दिया है। उन्होंने कहा, चीन अब दूसरे देशों में खतरनाक, स्वतंत्रता विरोधी सत्तावादी मॉडल को फैलाने के लिए अपने आर्थिक प्रभाव का लाभ उठा रहा है। 

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