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China: चीन में बढ़ी युवा बेरोजगारी दर, शी जिनपिंग को सता रहा विरोध का डर, अमेरिका पर फोड़ा ठीकरा

Fri, 18 Aug 2023 06:55 AM IST
गुलाम अहमद एजेंसी, बीजिंग
एजेंसी, बीजिंग Published by: गुलाम अहमद Updated Fri, 18 Aug 2023 06:55 AM IST
सार

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी अब अर्थव्यवस्था के इन आंकड़ों से डर लगने लगा है, साथ ही उन्हें विरोध का भी डर सता रहा है। यही वजह है कि सांख्यिकी ब्यूरो आंकड़े जारी नहीं करने का एलान किया है।

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China pause releasing data on soaring youth jobless rate President Xi Jinping fear of resentment
शी जिनपिंग - फोटो : Social Media

विस्तार

चीन में आर्थिक मंदी का असर अब व्यापक स्तर पर दिखने लगा है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के मुताबिक जुलाई में 16 से 24 वर्ष के युवा वर्ग की बेरोजगारी दर 21.3 फीसदी पहुंच गई है। इसके अलावा चीन की अर्थव्यवस्था में लगातार संकुचन और गिरावट भी हो रही है।

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राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी अब अर्थव्यवस्था के इन आंकड़ों से डर लगने लगा है, साथ ही उन्हें विरोध का भी डर सता रहा है। यही वजह है कि सांख्यिकी ब्यूरो आंकड़े जारी नहीं करने का एलान किया है। लोगों के बीच अर्थव्यवस्था के आंकड़ों से सरकार के खिलाफ बढ़ रहे रोष को काबू करने के लिए नास्तिक जिनपिंग को आध्यात्म याद आने लगा है। हाल ही में पार्टी कैडरों को भेजे गए पत्र में जिनपिंग ने चीन के खराब आर्थिक हालात के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों पर ठीकरा फोड़ा है।
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इसमें उन्होंने लिखा, भौतिकवाद में लिप्त पश्चिमी देश आध्यात्मिक रूप से गरीब हैं, इसी वजह से वे चीन के लिए संकट पैदा कर रहे हैं। पार्टी के मुखपत्र क्युइशी में प्रकाशित इस पत्र में जिनपिंग ने कहा, हमें धैर्य दिखाते हुए एक-एक कदम बढ़ाना होगा क्योंकि हालात सुधरने में वक्त लगेगा। चीन की विकास दर बीती तिमाही में 0.8 फीसदी तक गिर चुकी है। 
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श्रीलंका को फिर से दिया कर्ज का लालच 
चीन की खुद की अर्थव्यवस्था जहां मंदी की गिरफ्त में आ रही है। वहीं, श्रीलंका को चीन फिर से कर्ज का लालच दे रहा है। जबकि चीन के कर्ज की वजह से ही श्रीलंका आर्थिक बदहाली का शिकार हुआ है। श्रीलंका जहां चीन से पुराने कर्ज के पुनर्गठन की मांग कर रहा है। वहीं, चीन चाहता है कि श्रीलंका उससे नया कर्ज ले। श्रीलंका के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को बताया कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सातवें चीन-दक्षिण एशियाई एक्सपो के मौके पर प्रधानमंत्री दिनेश गुणवरधन को आश्वासन दिया कि वे श्रीलंका की ऋण चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में मदद करेंगे। चीन ने यह भरोसा आईएमएफ की समीक्षा से ठीक पहले दिया है। असल में श्रीलंका को आईएमएफ से बेलआउट पैकेज की अगली किस्त हासिल करने के लिए बाहरी और घरेलू ऋण पुनर्गठन करना है। आईएमएफ 11 से 19 सितंबर के दौरान समीक्षा करेगा, जिसके बाद 2.9 अरब डॉलर के राहत पैकेज का एक हिस्सा जारी किया जाएगा।

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