फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   China-Nepal Relation: Nepal denies China's claim on belt and road initiative project

China-Nepal: बीआरआई परियोजना पर चीन की बात को नेपाल ने काटा, क्या इससे रिश्तों में बढ़ेगी कड़वाहट?

Tue, 27 Jun 2023 04:58 PM IST
शिव शरण शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 27 Jun 2023 04:58 PM IST
सार

नेपाल ने 2017 के समझौते के बाद बीआरआई के तहत निर्माण के लिए नौ परियोजनाओं का चयन किया था। 2019 में चीन में हुए दूसरे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव कॉन्फ्रेंस के दौरान जारी दस्तावेज में ट्रांस हिमालयन मल्टी-डायमेंशनल कनेक्टिविटी परियोजना को शामिल किया गया। लेकिन अब विदेश मंत्री के बयान से साफ है कि नेपाल सरकार की राय में इनमें से किसी परियोजना पर अभी तक अमल नहीं हो सका है।
 

विज्ञापन
China-Nepal Relation: Nepal denies China's claim on belt and road initiative project
चीन, नेपाल - फोटो : self

विस्तार

जिस समय नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल अपनी चीन यात्रा की तैयारी में बताए जाते हैं, तभी देश में इस मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया है कि चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना के तहत नेपाल में अब तक कोई निर्माण हुआ है या नहीं। कुछ समय पहले नेपाल में पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन हुआ था। तब चीन ने ‘एकतरफा ढंग’ से एलान कर दिया था कि इस हवाई अड्डे का निर्माण बीआरआई के तहत हुआ है।

विज्ञापन


सोमवार को नेपाल की संसद में दो सदस्यों- नेपाली कांग्रेस के राम हरि खतिवाडा और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के असीम शाह ने विदेश मंत्री एनपी सउद और पर्यटन मंत्री सुदान किराती से पूछा कि पोखरा हवाई अड्डा बीआरआई का हिस्सा है या नहीं। इस पर विदेश मंत्री सउद ने कहा कि नेपाल और चीन ने 2017 में बीआरआई के तहत फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर दस्तखत किए थे। उन्होंने पोखरा हवाई अड्डे का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि अभी तक बीआरआई के तहत कोई परियोजना आगे नहीं बढ़ी है। 
विज्ञापन


सउद ने कहा- ‘बीआरआई के तहत परियोजना पर अमल के बारे में अभी नेपाल और चीन के बीच बातचीत चल रही है। बीआरआई के तहत किसी परियोजना पर भी अमल नहीं हुआ है।’ विदेश मंत्री के इस बयान को सीधे तौर पर चीन को झुठलाने के रूप में देखा गया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन इस पर संभवतः सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी नहीं करेगा, लेकिन इस पर दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आने का अंदेशा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


नेपाल ने 2017 के समझौते के बाद बीआरआई के तहत निर्माण के लिए नौ परियोजनाओं का चयन किया था। 2019 में चीन में हुए दूसरे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव कॉन्फ्रेंस के दौरान जारी दस्तावेज में ट्रांस हिमालयन मल्टी-डायमेंशनल कनेक्टिविटी परियोजना को शामिल किया गया। लेकिन अब विदेश मंत्री के बयान से साफ है कि नेपाल सरकार की राय में इनमें से किसी परियोजना पर अभी तक अमल नहीं हो सका है।

इस बीच यह चर्चा रही है कि नेपाल सरकार इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने को लेकर अनिच्छुक है। इसके पीछे कारण बीआरआई परियोजना के बारे अमेरिका और भारत की आपत्तियों को बताया जाता है। अमेरिका और भारत की राय है कि इस परियोजना के जरिए चीन अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। 

जब नेपाल ने बीआरआई के लिए फ्रेमवर्ग एग्रीमेंट पर दस्तखत किए, तब पुष्प कमल दहल ही प्रधानमंत्री थे। उसके बाद शेर बहादुर देउबा, केपी शर्मा ओली और एक बार फिर देउबा प्रधानमंत्री बने। अब फिर से दहल प्रधानमंत्री हैं। विश्लेषकों के मुताबिक अलग-अलग पार्टियों के इन नेताओं की सरकारें बीआरआई के तहत किसी परियोजना को निर्मित करने में विफल रहीं। इससे चीन के कूटनीतिकों को यह संदेह हुआ है कि नेपाल में इस परियोजना को आगे ना बढ़ाने को लेकर एक तरह की राजनीतिक सहमति है। 


विश्लेषकों के मुताबिक गुजरे छह वर्षों में नेपाल में बीआरआई को लेकर एकमात्र सकारात्मक घटना जनवरी 2019 में हुई, जब नेपाल की तरफ से नौ परियोजनाओं की सूची चीन को भेजी गई थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed