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उइगर मुसलमानों के पूर्वजों की कब्रें नेस्तनाबूद करने में जुटा चीन
Wed, 09 Oct 2019 08:56 PM IST
अमर शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 09 Oct 2019 08:56 PM IST
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चीन के उइगर मुसलमान (फाइल)
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चीन दावा करता है कि उसके यहां अल्पसंख्यक मुसलमानों पर अत्याचार का उत्पीड़न नहीं हो रहा। पेइचिंग कहता रहा है कि वहां रह रहे उइगर मुसलमानों के मानवाधिकार का हनन नहीं हो रहा। लेकिन इस बीच ऐसी खबरें आई हैं कि चीन उइगरों के इतिहास को खत्म करने पर तुला हुआ है। चीन वहां रह रहे लाखों उइगर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को बंधक बनाने के बाद अब वह उनके कब्रिस्तान को नेस्तनाबूद करने में जुटा हुआ है, जिससे कि उइगर अपने इतिहास और पूर्वजों से कट जाएं।
बता दें कि यह खबर ऐसे वक्त आई है जब उइगर मुसलमानों के मुद्दे को लेकर अमेरिका चीन पर वाणिज्यिक प्रतिबंध लगाने के बाद, अब चीनी अधिकारियों के वीजा पर रोक लगाएगा।
अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, चीन प्रशासन शिंजियांग में कब्रिस्तान को नष्ट कर रहा है जहां से उइगरों की कई पीढ़ियां दफ्न हैं। आलम यह है कि कब्रगाहों के आसपास के क्षेत्रों में इंसानी हड्डियां और कब्र के टूटे हुए हिस्से बिखरे पड़े हैं।
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उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में उइगरों के कई कब्रिस्तानों को दो साल पहले तबाह कर दिया गया था। शायर काउंटी में तीन अलग-अलग जगहों में मानव हड्डियां देखी गई हैं। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि कब्र को तोड़ा नहीं जा रहा जबकि उनका मानकीकरण किया जा रहा है। वहीं, चीन से बाहर रह रहे उइगरों का आरोप है कि यह उनके जीवन पर पूरी तरह से नियंत्रण करने की कोशिश है।
चीन से बाहर रह रहे एक उइगर का कहना है, "यह हमारी पहचान से जुड़े प्रमाणों को प्रभावी तरीके से खत्म करने का चीन का अभियान है, वे प्रभावी रूप से हमें हैन चीनी बनाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "इसलिए वे सारे ऐतिहासिक स्थलों, कब्रिस्तानों को तोड़ रहे हैं ताकि वे हमें हमारे इतिहास, हमारे पिता और हमारे पूर्वजों से काट सकें।"
जिन संगठनों को ब्लैकलिस्ट किया गया है वो मुख्य रूप से सर्विलांस और एआई यानी आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से संबंधित हैं। इनमें हाईकेविजन (Hikvision) और दहुआ (Dahua) जैसी कंपनियां हैं जो सर्विलांस उपकरण बनाती हैं और मेग्वी (Megvii) और आईफ्लाईटेक (IFlytek) जैसी कंपनियां हैं जो फेशियल और वॉइस रेकॉग्नीशन की तकनीक पर काम करती हैं।
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बता दें कि यह खबर ऐसे वक्त आई है जब उइगर मुसलमानों के मुद्दे को लेकर अमेरिका चीन पर वाणिज्यिक प्रतिबंध लगाने के बाद, अब चीनी अधिकारियों के वीजा पर रोक लगाएगा।
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अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, चीन प्रशासन शिंजियांग में कब्रिस्तान को नष्ट कर रहा है जहां से उइगरों की कई पीढ़ियां दफ्न हैं। आलम यह है कि कब्रगाहों के आसपास के क्षेत्रों में इंसानी हड्डियां और कब्र के टूटे हुए हिस्से बिखरे पड़े हैं।
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उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में उइगरों के कई कब्रिस्तानों को दो साल पहले तबाह कर दिया गया था। शायर काउंटी में तीन अलग-अलग जगहों में मानव हड्डियां देखी गई हैं। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने जवाब दिया कि कब्र को तोड़ा नहीं जा रहा जबकि उनका मानकीकरण किया जा रहा है। वहीं, चीन से बाहर रह रहे उइगरों का आरोप है कि यह उनके जीवन पर पूरी तरह से नियंत्रण करने की कोशिश है।
चीन से बाहर रह रहे एक उइगर का कहना है, "यह हमारी पहचान से जुड़े प्रमाणों को प्रभावी तरीके से खत्म करने का चीन का अभियान है, वे प्रभावी रूप से हमें हैन चीनी बनाना चाहते हैं।" उन्होंने कहा, "इसलिए वे सारे ऐतिहासिक स्थलों, कब्रिस्तानों को तोड़ रहे हैं ताकि वे हमें हमारे इतिहास, हमारे पिता और हमारे पूर्वजों से काट सकें।"
उइगर मुसलमानों पर कठोर नियंत्रण का आरोप
अमेरिका ने चीन पर शिनजियांग के पश्चिमी क्षेत्र में उइगर मुस्लिमों के हाइटेक सर्विलांस और कठोर नियंत्रण का आरोप लगाया है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा, "चीन सरकार ने शिनजियांग में उइगर, कजाख और किर्ग अल्पसंख्यक मुस्लिमों पर कड़े नियंत्रण की कोशिशें की हैं।" उन्होंने कहा, "चीन ने बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यक मुस्लिमों को डिटेंशन कैंप में रखा है। उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान पर कड़ा नियंत्रण रखा जा रहा है। विदेश से लौटने वाले लोगों पर भी तरह-तरह के प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और कड़ी निगरानी की जा रही है।"28 चीनी कंपनियों को अमेरिका कर चुका ब्लैकलिस्ट
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने चीन के 28 संगठनों को संयुक्त राज्य अमेरिका की ब्लैकलिस्ट में शामिल किया था। इसके पीछे मानवाधिकारों के हनन में उनकी भूमिका को वजह बताया गया था। ट्रेड वार के बीच अमेरिका के ये फैसले दोनों देशों के संबंधों में और कड़वाहट घोल सकते हैं।जिन संगठनों को ब्लैकलिस्ट किया गया है वो मुख्य रूप से सर्विलांस और एआई यानी आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से संबंधित हैं। इनमें हाईकेविजन (Hikvision) और दहुआ (Dahua) जैसी कंपनियां हैं जो सर्विलांस उपकरण बनाती हैं और मेग्वी (Megvii) और आईफ्लाईटेक (IFlytek) जैसी कंपनियां हैं जो फेशियल और वॉइस रेकॉग्नीशन की तकनीक पर काम करती हैं।