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China Vs Germany: लाल सागर में जर्मन विमान पर चीनी युद्धपोत का लेजर हमला, बर्लिन में ड्रैगन के राजदूत हुए तलब

Tue, 08 Jul 2025 06:44 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: हिमांशु चंदेल Updated Tue, 08 Jul 2025 06:44 PM IST
सार

लाल सागर में चीन के युद्धपोत ने एक जर्मन निगरानी विमान को लेजर से निशाना बनाया, जिससे जर्मनी ने चीन के राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध जताया। यह विमान एक मिशन का हिस्सा था, जो हूती विद्रोहियों से व्यापारिक जहाजों की रक्षा करता है। घटना में कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
 

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China Germany Chinese warship laser attack German aircraft Red Sea ambassador summoned to Berlin
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

लाल सागर में चीन और जर्मनी के बीच तनाव बढ़ गया है। जर्मनी ने आरोप लगाया है कि चीन के एक युद्धपोत ने उनके निगरानी विमान पर लेजर बीम से निशाना साधा। यह विमान यूरोपीय संघ के एस्पाइड्स मिशन का हिस्सा था, जो यमन के हूती विद्रोहियों से व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात है। इस घटना के बाद जर्मनी ने बर्लिन में चीन के राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
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जर्मनी के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हमला इस महीने की शुरुआत में हुआ था। चीन का युद्धपोत पहले भी कई बार उस क्षेत्र में दिखाई दिया था। बिना किसी पूर्व सूचना के इस लेजर हमले ने विमान में मौजूद जर्मन सेना के कर्मचारियों और उपकरणों को खतरे में डाल दिया। हालांकि, चालक दल पूरी तरह सुरक्षित रहा और विमान को सावधानी के तौर पर जबूती के बेस पर उतार लिया गया।
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एस्पाइड्स मिशन क्या है?
एस्पाइड्स मिशन यूरोपीय संघ की रक्षा नीति के तहत चलाया जा रहा एक शांति मिशन है, जिसका मकसद लाल सागर, अदन की खाड़ी और हिंद महासागर में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देना है। यह किसी भी प्रकार के हमले या सैन्य कार्रवाई का हिस्सा नहीं होता। हूती विद्रोहियों द्वारा क्षेत्र में बढ़ते हमलों के बीच यह मिशन और अधिक अहम हो गया है।
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जर्मनी की कड़ी प्रतिक्रिया, चीन चुप
इस हमले के बाद जर्मन विदेश मंत्रालय ने इस कृत्य को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया और कहा कि इससे न केवल जर्मन कर्मचारियों की जान को खतरा हुआ बल्कि मिशन की सुरक्षा भी दांव पर लग गई। इसके जवाब में चीन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। चीन का विदेश मंत्रालय और बर्लिन स्थित दूतावास दोनों ही चुप्पी साधे हुए हैं।

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हूती हमलों के बीच बढ़ता खतरा
घटना के ठीक अगले दिन हूती विद्रोहियों ने एक लाइबेरियन झंडे वाले मालवाहक जहाज पर कई घंटों तक हमला किया। इससे पहले भी उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने एक और जहाज को डुबो दिया है। ये घटनाएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि लाल सागर में खतरे लगातार बढ़ रहे हैं, जहां एस्पाइड्स मिशन लगातार सक्रिय है।


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वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर असर
हालांकि इस लेजर हमले में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह घटना सैन्य बलों के बीच अंतरराष्ट्रीय जल सीमाओं में संचालन के नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जर्मनी का कहना है कि चीन का यह व्यवहार न केवल मिशन के मानकों के खिलाफ है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय विश्वास को भी नुकसान पहुंचाता है।

बढ़ते राजनयिक दबाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को देखते हुए संभावना है कि यूरोपीय संघ को एस्पाइड्स जैसे शांति अभियानों के नियमों और सुरक्षा निर्देशों की समीक्षा करनी पड़ सकती है। जब कई वैश्विक शक्तियां एक ही समुद्री क्षेत्र में काम कर रही हों, तब ऐसे हमले वैश्विक सहयोग के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।


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