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China: पूर्व प्रधानमंत्री ली की मौत से सकते में चीन; निजी शोक सभाओं से बचने का निर्देश, अंतिम संस्कार अभी नहीं
Sat, 28 Oct 2023 10:30 PM IST
ज्योति भास्कर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 28 Oct 2023 10:30 PM IST
सार
चीन में पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग की अचानक हुई मौत के बाद विश्वविद्यालयों को निजी शोक सभाओं से बचने को कहा है। चीनी सरकार ने अभी तक उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था के विवरण की घोषणा नहीं की है।
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चीन के प्रधानमंत्री ली केकियांग (फाइल)
- फोटो : PTI
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विस्तार
चीन के पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग की 68 साल की आयु में आकस्मिक मृत्यु चौंकाने वाली है। शनिवार को आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संभावित सामाजिक उथल-पुथल से बचने के लिए, चीन ने कथित तौर पर कुछ विश्वविद्यालयों में निजी शोक सभाओं से बचने को कहा है। खबरों के मुताबिक अर्थशास्त्री के रूप में लोकप्रिय ली कभी राष्ट्रपति पद के लिए शी जिनपिंग के प्रबल दावेदार थे।
ली का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। चीन में माहौल खराब होने से बचने के लिए सरकार ने छात्र संगठनों से पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग की याद में निजी शोक सभा जैसी गतिविधियों का आयोजन नहीं करने के लिए कहा है।
पूर्वी चीनी प्रांत अनहुई की राजधानी हेफ़ेई पूर्व प्रधानमंत्री का जन्मस्थान है। खबरों के अनुसार, चीनी सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सैकड़ों लोग ली के बचपन के निवास के पास फूलों के गुलदस्ते के साथ उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए कतार में खड़े दिखाई दिए। भावुक करने वाले वीडियो में कुछ लोग ली की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए रो पड़े।
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हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ली का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। शंघाई के दो सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि ली को गुरुवार को डोंग जिओ स्टेट गेस्ट होटल में तैरने के बाद दिल का दौरा पड़ा। उन्हें पास के शुगुआंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचाने में सफल नहीं हुए।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, कुछ चीनी विश्वविद्यालयों ने छात्रों से कहा है कि वे सामाजिक उथल-पुथल से बचने के लिए स्पष्ट रूप से ली की याद में निजी शोक सभाओं का आयोजन न करें। ली की छवि एक उदारवादी सुधारक की थी। उन्होंने अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान मंदी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था के कुशल प्रबंधन के लिए चीनी लोगों की प्रशंसा हासिल की।
हालांकि सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में नंबर दो होने के बावजूद, ली को दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने सरकार में अपने अधिकांश वर्ष अर्थव्यवस्था के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए बिताए। इसी अवधि में वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे हैं। जिनपिंग पार्टी, सेना और राष्ट्रपति पद पर काबिज हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल मार्च में सेवानिवृत्ति के बाद ली की मौत ने देश को स्तब्ध कर दिया है। खबर सामने आने के बाद कई लोगों ने उन्हें ऑनलाइन श्रद्धांजलि दी। कुछ विश्वविद्यालयों ने छात्र सलाहकारों और नेताओं से कहा है कि शोक सभा और स्मारक बनवाने जैसी गतिविधियों की व्यवस्था न करें। सरकार को डर है कि शोक सभा विरोध प्रदर्शन में बदल सकते हैं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग के एक शीर्ष विश्वविद्यालय में एक छात्र परामर्शदाता ने कहा कि उन्हें छात्र नेताओं से बात करने के लिए कहा गया है। नाम न छापने का अनुरोध करते हुए काउंसलर ने कहा, "ऐसा नहीं है कि हम पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग का स्मरण नहीं करेंगे।" मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हमें राष्ट्रीय शोक के विवरण की घोषणा के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की प्रतीक्षा करनी होगी।"
काउंसलर ने कहा, "हम नहीं चाहते कि छात्र अपने शोक कार्यक्रम आयोजित करें। वे अत्यधिक भावुक हो सकते हैं और अनावश्यक अशांति पैदा कर सकते हैं जैसा कि 30 से अधिक साल पहले हुआ था।"
बता दें कि चीनी सरकार ने लोकप्रिय उदारवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख हू याओबांग की मृत्यु के बाद, 1989 में बीजिंग के तियानमेन चौक पर इसी तरह के छात्र विरोध प्रदर्शन से बचने के लिए कथित तौर पर एहतियाती कदम उठाए थे। कथित तौर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हजारों लोग मारे गए थे।
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ली का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। चीन में माहौल खराब होने से बचने के लिए सरकार ने छात्र संगठनों से पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग की याद में निजी शोक सभा जैसी गतिविधियों का आयोजन नहीं करने के लिए कहा है।
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पूर्वी चीनी प्रांत अनहुई की राजधानी हेफ़ेई पूर्व प्रधानमंत्री का जन्मस्थान है। खबरों के अनुसार, चीनी सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में सैकड़ों लोग ली के बचपन के निवास के पास फूलों के गुलदस्ते के साथ उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त करने के लिए कतार में खड़े दिखाई दिए। भावुक करने वाले वीडियो में कुछ लोग ली की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए रो पड़े।
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हांगकांग से प्रकाशित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ली का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। शंघाई के दो सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट में कहा गया है कि ली को गुरुवार को डोंग जिओ स्टेट गेस्ट होटल में तैरने के बाद दिल का दौरा पड़ा। उन्हें पास के शुगुआंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचाने में सफल नहीं हुए।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, कुछ चीनी विश्वविद्यालयों ने छात्रों से कहा है कि वे सामाजिक उथल-पुथल से बचने के लिए स्पष्ट रूप से ली की याद में निजी शोक सभाओं का आयोजन न करें। ली की छवि एक उदारवादी सुधारक की थी। उन्होंने अपने 10 साल के कार्यकाल के दौरान मंदी की मार झेल रही अर्थव्यवस्था के कुशल प्रबंधन के लिए चीनी लोगों की प्रशंसा हासिल की।
हालांकि सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में नंबर दो होने के बावजूद, ली को दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने सरकार में अपने अधिकांश वर्ष अर्थव्यवस्था के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए बिताए। इसी अवधि में वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग पार्टी के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे हैं। जिनपिंग पार्टी, सेना और राष्ट्रपति पद पर काबिज हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस साल मार्च में सेवानिवृत्ति के बाद ली की मौत ने देश को स्तब्ध कर दिया है। खबर सामने आने के बाद कई लोगों ने उन्हें ऑनलाइन श्रद्धांजलि दी। कुछ विश्वविद्यालयों ने छात्र सलाहकारों और नेताओं से कहा है कि शोक सभा और स्मारक बनवाने जैसी गतिविधियों की व्यवस्था न करें। सरकार को डर है कि शोक सभा विरोध प्रदर्शन में बदल सकते हैं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग के एक शीर्ष विश्वविद्यालय में एक छात्र परामर्शदाता ने कहा कि उन्हें छात्र नेताओं से बात करने के लिए कहा गया है। नाम न छापने का अनुरोध करते हुए काउंसलर ने कहा, "ऐसा नहीं है कि हम पूर्व प्रधानमंत्री ली केकियांग का स्मरण नहीं करेंगे।" मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हमें राष्ट्रीय शोक के विवरण की घोषणा के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की प्रतीक्षा करनी होगी।"
काउंसलर ने कहा, "हम नहीं चाहते कि छात्र अपने शोक कार्यक्रम आयोजित करें। वे अत्यधिक भावुक हो सकते हैं और अनावश्यक अशांति पैदा कर सकते हैं जैसा कि 30 से अधिक साल पहले हुआ था।"
बता दें कि चीनी सरकार ने लोकप्रिय उदारवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख हू याओबांग की मृत्यु के बाद, 1989 में बीजिंग के तियानमेन चौक पर इसी तरह के छात्र विरोध प्रदर्शन से बचने के लिए कथित तौर पर एहतियाती कदम उठाए थे। कथित तौर पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के दौरान हजारों लोग मारे गए थे।