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China: चीन में महामारी ने खोली हेल्थ केयर की पोल, सामने आ रही हैं चौंकाने वाली जानकारियां
Sun, 19 Feb 2023 04:16 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 19 Feb 2023 04:16 PM IST
सार
महामारी के उन दिनों के बारे में अधिक जानकारियां सामने आ रही हैं। इनके मुताबिक महामारी शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में तेजी से फैली। बीते 27 दिसंबर को चीन के नेशनल स्वास्थ्य कमीशन ने मरीजों का शुरुआती इलाज ग्रामीण इलाकों में मौजूद हेल्थ सिस्टम के तहत करने का आदेश दिया।
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चीन में कोरोना
- फोटो : Social media
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विस्तार
बीते दिसंबर-जनवरी में चीन में आई कोरोना महामारी की लहर ने देश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था की कमियों को बुरी तरह उगाजर कर दिया है। इस दौरान यह बात खुल कर सामने आई कि चीन के देहाती इलाकों में ना तो पर्याप्त संख्या में अस्पताल हैं और ना अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हैं।
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वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बात की तस्दीक खुद ग्रामीण इलाकों में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों ने की है। मसलन ग्वांगदोंग प्रांत के एक गांव में तैनात डॉक्टर मो हाइकुम ने कहा कि महामारी दस दिन तक अपने पीक (चरम) पर रही। उस दौरान हमारे पास सोने तक वक्त नहीं था। दिसंबर में चीन सरकार ने जीरो कोविड नीति से हटने का एलान किया था। उसके तुरंत बाद देश में कोरोना वायरस के ओमिक्रोन वैरिएंट के कारण संक्रमण बेहद तेजी से फैले।
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अब महामारी के उन दिनों के बारे में अधिक जानकारियां सामने आ रही हैं। इनके मुताबिक महामारी शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में तेजी से फैली। बीते 27 दिसंबर को चीन के नेशनल स्वास्थ्य कमीशन ने मरीजों का शुरुआती इलाज ग्रामीण इलाकों में मौजूद हेल्थ सिस्टम के तहत करने का आदेश दिया। इस बहुस्तरीय सिस्टम के तहत जिन मरीजों के इमरजेंसी इलाज की जरूरत नहीं है, उनकी देखभाल स्थानीय क्लीनिक में की जाती है। जिन मरीजों की स्थिति गंभीर हो, उनकी जरूरत के मुताबिक डॉक्टर दूसरे अस्पताल में भेजते हैं।
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कोविड के दौरान ज्यादातर मरीजों को कहा गया कि वे अपने गांव में ही रह कर ही इलाज कराएं। इससे ग्रामीण व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया। लेकिन संवाददाताओं ने ग्रामीण इलाकों का दौरा करने पर पाया कि वहां के अस्पताल और क्लीनिक इलाज संबंधी मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं थे। ना तो वहां अनुभवी स्वास्थ्य कर्मी हैं और ना ही दवाओं की पर्याप्त आपूर्ति करने में स्थानीय व्यवस्था सक्षम है।
ग्वांगदोंग प्रांत की लियानान काउंटी में स्थित सेनपई कस्बे में कार्यरत डॉक्टर जेंग हाइफेन ने बताया कि हमारे पास बायोकेमिकल टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट करने के उपकरण भी नहीं हैँ। इन उपकरणों से पता चलता है कि मरीज की स्थिति कितनी गंभीर है। साथ ही रोग किस तरह बढ़ या घट रहा है, इसका पता भी इससे चलता है।
अब चीन में महामारी की लहर थम चुकी है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य कर्मचारियों ने जनवरी में जिन हालात का सामना किया, उसे वे भूल नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि महामारी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियां उजागर कर दी हैं। अब जरूरत इन्हें तुरंत दूर करने की है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, नवंबर में इस बात के संकेत मिल गए थे कि चीन को महामारी की एक बड़ी लहर का सामना करना पड़ेगा। अगर तभी तैयारी की जाती, तो दवाओं और उपकरणों की जैसी कमी का सामना करना पड़ा, उससे बचा जा सकता था। लेकिन इस मामले में चीन की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी नाकाम रही। इसकी वजह से बहुत से ऐसे लोग मृत्यु का शिकार हुए, जिनकी जान बचाई जा सकती थी।