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विंटर ओलिंपिक: खेलों के सफल आयोजन को अपनी जीत मान रहा है चीन, अमेरिकी बहिष्कार का नहीं पड़ा असर

Tue, 22 Feb 2022 05:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 22 Feb 2022 05:13 PM IST
सार

विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन ने जब 2008 में ओलिंपिक खेलों का आयोजन किया था, उसकी तुलना में इस बार बीजिंग का कूटनीतिक माहौल बिल्कुल अलग रहा। 2008 में ओलिंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश आए थे। लेकिन इस बार अमेरिका सहित कई देशों ने इस समारोह का बहिष्कार किया...

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China considering the successful completion of Winter Olympics, the US boycott did not affect
बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

विंटर (शीतकालीन) ओलिंपिक खेलों के सफल आयोजन को चीन अपनी एक बड़ी जीत के रूप में पेश कर रहा है। विंटर ओलिंपिक खेल रविवार देर शाम संपन्न हो गए। अमेरिका और उसके साथी देशों ने इन खेलों का कूटनीतिक बहिष्कार किया, लेकिन उससे इस आयोजन की चमक पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। सफल आयोजन के लिए अलावा चीन के लिए दोहरी खुशी की बात यह रही कि उसने पहली बार इन खेलों में नौ स्वर्ण पदक जीते। पदक तालिका में वह अमेरिका के ऊपर रहा। नॉर्वे और जर्मनी के बाद चीन तीसरे स्थान पर रहा।

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बनाया था खास क्लोज्ड लूप सिस्टम

चीन मीडिया में छपी टिप्पणियों से साफ है कि इन खेलों को कोविड-19 संक्रमण से दूर रखने को चीन अपनी सबसे बड़ी सफलता मान रहा है। इन खेलों के लिए दस हजार से अधिक एथलीट और विदेशी अधिकारी बीजिंग आए। शुरुआत में अंदेशा जताया गया था कि इन खेलों पर कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन का साया पड़ सकता है। कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए चीन ने बीजिंग में क्लोज्ड लूप नाम से एक खास सिस्टम लागू किया। उसके तहत खेलों से संबंधित लोगों को बीजिंग के बाकी इलाकों और लोगों से दूर रखा गया।

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अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स मैनेजमेंट की एसिस्टैंट प्रोफेसर स्टेसी लिन सैन्ट ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘चीन ने एक बार फिर खेलों का इस्तेमाल वैश्विक महाशक्ति के रूप में अपनी हैसियत को मजबूत करने के लिए किया है। लेकिन पश्चिमी देशों में उसकी स्थिति फिलहाल विंटर ओलिंपिक खेलों के पहले की तुलना में कमजोर ही हुई है।’
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विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन ने जब 2008 में ओलिंपिक खेलों का आयोजन किया था, उसकी तुलना में इस बार बीजिंग का कूटनीतिक माहौल बिल्कुल अलग रहा। 2008 में ओलिंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश आए थे। लेकिन इस बार अमेरिका सहित कई देशों ने इस समारोह का बहिष्कार किया। ऐसे में उद्घाटन समारोह में आकर्षण का मुख्य केंद्र रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन बन गए।

3000 कलाकारों ने कला का प्रदर्शन किया

विंटर ओलिंपिक्स के आयोजन के लिए चीन ने बर्ड्स नेस्ट नामक एक खास स्टेडियम बनाया। उसमें रविवार को समापन समारोह के दौरान 3000 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस समारोह का निर्देशन ऑस्कर के लिए नामांकित हो चुके फिल्मकार झांग यिमोऊ ने किया। 2008 के ओलिंपिक आयोजन के बारे में झांग ने कहा- ‘तब चीन की इच्छा यह थी कि उसकी शानदार आर्थिक उपलब्धियों और सामाजिक विकास को दुनिया स्वीकार करे। वह मकसद तब पूरा हुआ था।’

चीन में शंघाई स्थित अर्थशास्त्री मेटी बेकिन्क ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘इस बार चीन का उद्देश्य एक साझा भविष्य का संदेश देना था। लेकिन संकेत यह मिला कि चीन पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली व्यवस्था में शामिल होने की बिना कोई अपेक्षा रखे अपना भविष्य तय कर रहा है।’



पर्यवेक्षकों का कहना है कि विंटर ओलिंपिक खेल कूटनीतिक विवादों से प्रभावित नहीं हुए। खिलाड़ियों को यहां अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने का मौका मिला, जिसका उन्होंने खूब फायदा उठाया।

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