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China: चीन ने अमेरिका पर लगाए आरोप-हमारे छात्रों को जबरदस्ती देश से निकाला गया, जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

Mon, 08 Apr 2024 08:26 PM IST
मिथिलेश नौटियाल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Mon, 08 Apr 2024 08:26 PM IST
सार

चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि बिना किसी वैध सबूत के, मनमाने ढंग से चीनी छात्रों के वीजा रद्द कर दिए, अमेरिका में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया और उन्हें जबरन निर्वासित कर दिया।

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China accuses US of forcibly deporting its students without valid evidence Warns countermeasures
जो बाइडन और शी जिनपिंग - फोटो : Social Media

विस्तार

चीन और अमेरिका के बीच एक बार फिर से रिश्तों में तल्खी देखी जा रही है। चीन ने अमेरिका पर चीनी छात्रों को बिना किसी सबूत के जबरन निर्वासित करने का आरोप लगाया है। इस बारे में चीन ने अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि अमेरिका द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बिना किसी वैध सबूत के, मनमाने तरीके से चीनी छात्रों के वीजा रद्द कर दिए, उनके अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया और उन्हें जबरन निर्वासित कर दिया।

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चीन ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी 
माओ ने कहा कि अमेरिका के इस कदम की वजह से  उन छात्रों को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि अमेरिका के अधिकारी चीनी कर्मियों को निर्वासित करने के लिए बहाने बनाने पर आमादा हैं। ये पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और राजनीति से प्रेरित लगता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमारे नागरिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए चीन द्वारा सख्त कदम उठाया जाएगा। अमेरिका को तुरंत इस तरह के उत्पीड़न को बंद करना होगा। 
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‘चीन के छात्रों को जबरन देश से निकाला गया’
अमेरिका में चीन के राजदूत शी फेंग का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में अमेरिका में आने वाले चीन के लोगों और छात्रों को हर महीने प्रवेश से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के पास वैध वीजा था और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं था लेकिन जब वे हवाई अड्डे पर उतरे तो अधिकारियों द्वारा आठ घंटे की लंबी पूछताछ की गई। इसके बाद उन्हें अपने माता-पिता से संपर्क करने से रोका गया और उनके खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए। यहां तक कि उन्हें जबरन देश से निकाला गया और उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया। 
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अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल भारतीय छात्रों ने अमेरिका के शिक्षण संस्थानों में चीन के छात्रों को पीछे छोड़ दिया। पिछले साल अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या बढ़कर 3.20 लाख हो गई। 

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