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यूनिसेफ की रिपोर्ट: बच्चों और किशोरों में तेजी से बढ़ रही हैं मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं, कोरोना ने डाला बड़ा असर

Thu, 07 Oct 2021 08:03 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 07 Oct 2021 08:03 PM IST
सार

बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर यूनिसेफ की एक नई रिपोर्ट में गंभीर चिंता जताई गई है। इसमें कहा गया है कि बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या लगातार बढ़ रही है और कोरोना वायरस महामारी व लॉकडाउन ने इस पर बड़े पैमाने पर असर डाला है।

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Children and Teenagers are facing mental health issues on much bigger scale now says UNICEF report news in Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की ओर से जारी एक नई रिपोर्ट में बच्चों और किशोरों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। इसमें बताया गया है कि पूरी दुनिया में 10 से 19 वर्ष की आयु के हर सात में से एक बच्चा मानसिक स्वास्थ्य की समस्या से पीड़ित है और इसी के साथ जीवन जीने के लिए मजबूक है। रिपोर्ट में बच्चों और किशोरों के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के लिए कोविड महामारी को भी जिम्मेदार बताया गया है। 

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यूनिसेफ का कहना है कि चिंता की बात यह है कि यह असर लंबे समय तक बना रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों और किशोरों को मानसिक समस्या से निजात दिलाने के लिए खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इससे संबंधित संसाधनों में निवेश भी काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न देशों की सरकारें इस ओर अपने सालाना बजट का केवल दो फीसदी हिस्सा ही आवंटित करती हैं और खर्च इससे भी कम होता है।
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कोरोना वायरस महामारी और इसके चलते लगे लॉकडाउन को भी इस समस्या के लिए काफी हद तक जिम्मेदार बताया जा रहा है। यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फोर ने इसे लेकर कहा कि महामारी के पिछले 18 महीने बच्चों के लिए बहुत भारी रहे। लॉकडाउन के चलते दोस्तों आदि से दूरी ने भी इस उम्र के बच्चों पर काफी प्रतिकूल असर डाला है और इन समस्याओं के समाधान के लिए किया गया काम न के बराबर है।
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रिपोर्ट के अनुसार दुनिया के हर पांच में से एक युवा मानता है कि उसे अक्सर मानसिक समस्या का सामना करना पड़ता है। इसमें यह भी कहा गया है कि महामारी की अवधि जितनी बढ़ती जा रही है बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसका दुष्प्रभाव बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट में बच्चों को इस समस्या से निकालने के लिए दुनिया से इस क्षेत्र में निवेश और संसाधनों को तेज रफ्तार के साथ बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।

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